उत्तर प्रदेश में इस बार भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदों पर पानी फिर गया. बीजेपी पिछली बार से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रही थी, लेकिन इस बार लगभग आधी सीटों का नुकसान हो गया. आखिर बीजेपी को इतनी कम सीटें कैसे मिलीं. इस बार जातीय समीकरण से लेकर संविधान और रोजगार के मुद्दों ने बीजेपी को पीछे धकेल दिया.
1- कौशाम्बी
कौशाम्बी में जहां बीजेपी ने दलित बिरादरी से आने वाले विनोद सोनकर को टिकट दिया था. वहीं समाजवादी पार्टी ने पासी चेहरमे इंद्रजीत सरोज के बेटे पुष्पेंद्र सरोज को मैदान में उतारा था. बताया जा रहा है कि विनोद सोनकर के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी काफी ज्यादा थी. इतना ही नहीं इस सीट पर कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भईया ने भी विनोद सोनकर समर्थन देने से इनकार कर दिया. जनता का गुस्सा ही था कि सोनकर एक लाख से ज्यादा वोटों से पिछड़ गए.
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2- बांदा
बांदा सीट पर जहां बीजेपी ने दो बार के सांसद आरके सिंह पटेल को उतारा था. वहीं सपा ने कृष्णा देवी शिवशंकर पटेल को टिकट दिया था. इस सीट पर कृष्णा देवी 70 हजार से ज्यादा वोटों से आगे हैं. बताया जा रहा है कि बांदा सीट पर पहले से ही आरके सिंह पटेल के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा था. इतना ही नहीं ब्राह्मणों के बड़े तबके में भी उनके खिलाफ नाराजगी थी. जब बीएसपी ने ब्राह्मण चेहरे को उतारा तो चर्चा शुरू हुई कि ब्राह्मण भी बीजेपी छोड़कर हाथी की सवारी करेगा, लेकिन जातीय समीकरण सपा प्रत्याशी की ओर हुए.
3- बाराबंकी
बाराबंकी से कांग्रेस ने पीएल पुनिया के बेटे तनुज पुनिया को टिकट दिया था. इस सीट पर शुरू से ही कांटे की टक्कर बताई जा रही थी. दरअसल यहां से सांसद उपेंद्र रावत का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद बीजेपी ने उनका टिकट बदलकर राजरानी रावत को दे दिया था. लेकिन यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी और दलितों के एक बड़े तबके ने कांग्रेस का साथ दिया और तनुज पुनिया 2 लाख 15 हजार वोटों से लीड कर रहे हैं.
4- फैजाबाद
फैजाबाद सीट, जहां अभी भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हुआ है. माना जा रहा था कि ये सीट भाजपा के लिए बहुत आसान है, लेकिन आज आए परिणामों में ये सीट सबसे चौंकाने वाली रही. सपा के अवधेश प्रसाद 50 हजार वोटों से आगे चल रहे हैं. उन्होंने कई राउंड में भाजपा के प्रत्याशी लल्लू सिंह को पछाड़ दिया.
बता दें कि अवध इलाके में 2019 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 14 में से 13 सीटें जीतीं थीं, लेकिन इस बार जातीय समीकरण ऐसे बदले इन सीटों पर बीजेपी अपना कमल नहीं खिला पाई. समाजवादी पार्टी में दलित के पासी समाज के तीन सबसे बड़े चेहरे अवधेश पासी, इंद्रजीत सरोज और आर.के. चौधरी को अपनी पार्टी में लाकर इन्हें टिकट से नवाजा. इसके बाद इस बिरादरी ने बीजेपी से छोड़कर कई सीटों पर सपा को पूरा समर्थन दिया है.
कुर्मी बिरादरी जो कि बीजेपी का ओबीसी में सबसे सॉलिड वोट बैंक हुआ करता था उसमें भी बड़ी सेंध समाजवादी पार्टी ने लगा दी. सपा ने कुर्मी बिरादरी से 10 टिकट दिए, जिसका असर कई सीटों पर दिखाई दे रहा है.