उत्तर प्रदेश में संचालित 4,000 से अधिक मदरसों की फंडिंग की जांच एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने शुरू कर दी है. ये वो मदरसे हैं जिसे राज्य की तरफ अनुदान नहीं मिलता है. इसकी जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है.
मदरसों की फंडिंग की जांच
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी संजय मिश्रा ने बताया कि इनमें से 495 मदरसे अकेले बहराइच जिले में हैं, जिनमें से कम से कम 100 भारत-नेपाल सीमा के गांवों में संचालित हो रहे हैं.
अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक जे रीभा ने 21 अक्टूबर को सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को एक पत्र जारी किया था जिसमें राज्य के सभी अनुदान रहित मदरसों की फंडिंग की जांच के बारे में जानकारी देने को कहा था. इस पत्र के अनुसार, एटीएस के महानिदेशक को 4,191 मदरसों की सूची सौंपी गई है.
आतंकवाद से जुड़े फंडिंग की जांच
एटीएस की फील्ड यूनिट को इन मदरसों की फंडिंग की जांच कर अपनी रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं. यह जांच राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और संभावित आतंकवाद के फंडिंग से जुड़े किसी भी संभावित खतरे की पहचान के लिए की जा रही है.
ATS इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन मदरसों को किसी अवैध स्रोत से धन प्राप्त हो रहा है, खासकर उन मदरसों में जो सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित हैं. बहराइच जिले के अधिकारियों ने इस दिशा में सतर्कता बढ़ा दी है.
खासतौर पर नेपाल सीमा के निकट स्थित मदरसों पर नजर रखी जा रही है. यह कदम राज्य सरकार के उस कोशिश का हिस्सा है जिसमें सभी अनुदान रहित मदरसों की फंडिंग के स्रोत को पारदर्शी बनाने की मांग की गई है.
मदरसों के बैंक खातों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच
इस मामले में अब राज्य की एटीएस यूनिट और संबंधित जिला अधिकारी मदरसों के बैंक खातों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच करेंगे. जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या इन मदरसों को किसी विदेशी संस्था या संगठन से आर्थिक मदद मिल रही है और क्या इसमें कोई गड़बड़ी है. इस जांच का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मदरसों के संचालन में पारदर्शिता हो और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को रोका जा सके, जिससे राज्य की सुरक्षा और स्थिरता को कोई खतरा न हो.