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जिस कांग्रेसी नेता ने की थी संविधान सभा में 'भारत' नाम की पैरवी, उनके परपोते ने सुनाया पूरा किस्सा

टीएमसी नेता ललितेश पति त्रिपाठी ने कहा है कि आज बहस इस बात की है कि देश का नाम इंडिया हो या भारत, लेकिन संविधान सभा की बहस इस बात की थी कि इंडिया और भारत दोनों ही नाम को संविधान में रखेंगे तो देश कैसे जाना जाएगा?

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पूर्व विधायक और TMC नेता ललितेश पति त्रिपाठी (Photo Aajtak).
पूर्व विधायक और TMC नेता ललितेश पति त्रिपाठी (Photo Aajtak).

आज जिस 'भारत बनाम इंडिया' की लड़ाई में विपक्ष खासकर कांग्रेस इंडिया की तरफ खड़ा है, आपको जानकर हैरानी होगी कि उसी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पंडित कमलापति त्रिपाठी ने आजादी के बाद संविधान सभा में भारत नाम की पैरवी की थी. साथ ही 'भारत दैट इज इंडिया' यानी भारत अर्थात इंडिया के नाम का प्रस्ताव रखा था. हालांकि, वोटिंग में 'इंडिया दैट इज भारत' के नाम पर मुहर लगी. 

क्या था पूरा वाक्या और अब आज के परिदृश्य में उस घटना को कैसे देखा जा रहा है? इसपर आजतक ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे पंडित कमलापति त्रिपाठी के परपोते पूर्व विधायक और TMC नेता ललितेश पति त्रिपाठी से बात की है.

आजतक ने वाराणसी में ललितेश पति से खास बातचीत की है. उन्होंने बताया कि संविधान सभा की चर्चा कई दिनों तक चली थी और 18 सितंबर 1949 को मत होना था कि संविधान में इस देश का क्या नाम रखा जाए? आज की बहस और 1949 की बहस में एक मुख्य अंतर है. वह अंतर यह है कि आज बहस इस बात की है कि देश का नाम इंडिया हो या भारत, लेकिन संविधान सभा की बहस इस बात की थी कि इंडिया और भारत दोनों ही नाम को संविधान में रखेंगे तो देश कैसे जाना जाएगा?

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'एक-एक नागरिक की भावनाएं इन चार शब्दों में निहित थी'

उन्होंने आगे बताया कि सभा में जो एकमत हुए वे इस बात हुए कि 'इंडिया दैट इज भारत' यह दोनों एक ही चीज हैं. इसके बाद 'इंडिया दैट इज भारत' अपनाया गया और फिर यह प्रस्ताव पारित हुआ. क्योंकि यह देश के कोने-कोने से देश में रहने वाले एक-एक नागरिक की भावनाएं इन चार शब्दों में निहित थी.

जहां तक पंडित कमलापति का सवाल है तो उनकी यह इच्छा प्रबल थी कि भारत नाम इस प्रस्ताव में रहे, इसलिए इतिहास के साथ धर्म का भी उदाहरण दिया गया. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भी उदाहरण दिया गया था. 

भारत नाम पर क्या है व्यक्तिगत मत क्या है?

इस सवाल पर ललितेश पति त्रिपाठी ने बताया कि संविधान सभा के सभी सदस्य और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सभी सहमत हो गए कि इंडिया दैट इज भारत और फिर इसका कोई विरोध भी नहीं हुआ, लेकिन आज इस तरह का बहस छेड़ना उस वक्त के संविधान सभा के सदस्यों का अपमान है और पवित्र संविधान का अपमान है. उन्होंने बताया कि मौजूदा सरकार को 9 साल हो गए, लेकिन इस 9 साल में एक भी निमंत्रण या पत्र में कहीं भारत के प्रधानमंत्री या भारत राष्ट्रपति कहकर संबोधित किया गया हो.

इंडिया गठबंधन भाजपा को टक्कर दे रहा है: ललितेश पति त्रिपाठी

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2 महीने पहले ही इंडिया गठबंधन हुआ है. इंडिया गठबंधन जिस तेजी से भाजपा को मुकाबला दे रही है तो उससे इन लोगों के दिमाग में ये बात आई होगी कि यही बहस छेड़ देते है. हमारी नेता ममता बनर्जी और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अभिषेक बनर्जी, दोनों ही लोगों ने स्पष्ट रूप से यह कहा कि भारत और इंडिया यही देश है. सिर्फ इंग्लिश और हिंदी का फर्क है. सिर्फ ये चीजे राजनीति से प्रेरित है. महंगाई, बेरोजगारी, यूपी में सूखा, FCI के गोदाम में खाद्यान्न की कमी और गिरती अर्थव्यवस्था पर चर्चा न हो. देश भारत और इंडिया में बंट जाए, यहीं इन लोगों का खेल है, लेकिन जनता जाग गई है. 

पं.कमलापति त्रिपाठी के 118वीं जयंती को यूपी के सभी कांग्रेस कार्यालयों में मनाए जाने से लेकर पुराने भूले-बिसरे कांग्रेस परिवार को जोड़ने के सवाल पर ललितेश पति ने बताया कि सभी कार्यालयों पर जयंती मनाया जाना पहली बार हुआ है, लेकिन इसका कारण प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस ही बताएंगे. जहां तक पुराने लोगों को कांग्रेस से जोड़ने की बात है तो मैं शुभकामनाएं देता हूं, लेकिन अभी मुझसे इस विषय पर चर्चा नहीं हुई और मैंने इस पर विचार भी नहीं किया है.

क्या कांग्रेस में होगी वापसी, क्या बोले ललितेश पति त्रिपाठी

कांग्रेस में वापसी को लेकर बातचीत की बात से भी ललितेश पति त्रिपाठी ने इंकार कर दिया. आपके परिवार को वापस कांग्रेस में लाने के पीछे ब्राह्मण वोट बैंक की राजनीति हो सकती है के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब तक कोई औपचारिक बातचीत नहीं होती है तो मैं कैसे कमेंट कर सकता हूं.

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