UP News: महोबा जिले में भाजपा पूर्व जिला मंत्री दीपाली तिवारी द्वारा जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा पर लगाए गए गंभीर आरोपों का 'द एंड' हो गया है. प्रदेश उपाध्यक्ष कमलावती सिंह और क्षेत्रीय महामंत्री संत विलास शिवहरे की जांच समिति ने मंगलवार को विरमा भवन में पांच घंटे तक बंद कमरे में बैठक की. समिति ने जिलाध्यक्ष, जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और शिकायतकर्ता नेत्री से पूछताछ की. इस दौरान संगीन आरोपों को संवादहीनता और प्रमोशन न होने के कारण उपजा गुस्सा करार दिया गया. अंत में दोनों पक्षों ने सहमति जताते हुए विवाद को पारिवारिक गिले-शिकवे का नाम देकर खत्म कर दिया.
पैर छुए और लगाए जिंदाबाद के नारे
बैठक के बाद एक हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला. जो मामला पुलिस अधीक्षक की चौखट तक पहुंच चुका था और जिसमें पद के बदले हमबिस्तर होने जैसे संगीन आरोप लगे थे, वहां सुलह हो गई.
दोनों पक्षों ने प्रदेश उपाध्यक्ष कमलावती सिंह के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और 'भाजपा जिंदाबाद' के नारे लगाए. कमलावती सिंह ने स्पष्ट किया कि संगठन एक परिवार की तरह है और परिवार में कोई जांच नहीं, बल्कि केवल संवाद होता है.
सिर्फ गुस्से और महत्वाकांक्षा का था मामला
क्षेत्रीय महामंत्री संत विलास शिवहरे ने इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक महत्वाकांक्षा और गलतफहमी का नतीजा बताया. उन्होंने कहा कि संवाद की कमी के चलते यह विषय उठा था. वहीं, आरोप लगाने वाली नेत्री दीपाली तिवारी के सुर भी पूरी तरह बदल गए. उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्होंने जो कुछ भी किया, वह केवल गुस्से में किया था. दीपाली ने कहा कि पार्टी उनके लिए सर्वोपरि है और उन्हें अब संगठन से कोई गिला-शिकवा नहीं है.
अनसुलझे रह गए कई सवाल
भले ही पार्टी ने इसे 'ऑल इज वेल' कहकर खत्म कर दिया हो, लेकिन जिले की राजनीति में कई सवाल तैर रहे हैं. लोग हैरान हैं कि आखिर इतने गंभीर आरोपों का अंत इतनी सादगी से कैसे हो गया? जांच समिति का मानना है कि दीपाली तिवारी प्रमोशन न होने से क्षुब्ध थीं, जिसे अब सुलझा लिया गया है. इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के शांत होने के बाद अब जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा ने राहत की सांस ली है.