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महाकुंभ जाने से पहले स्टीव जॉब्स की पत्नी ने किए काशी विश्वनाथ के दर्शन

एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेंस पॉवेल जॉब्स ने वाराणसी स्थित बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा कर आशीर्वाद लिया. गुलाबी पारंपरिक परिधान में वह मंदिर पहुंचीं, जहां उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात था. जल्द ही लॉरेंस जॉब्स का सनातनी नाम 'कमला' हो जाएगा.

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एप्पल के को-फाउंडर की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स पहुंची काशी विश्वनाथ.
एप्पल के को-फाउंडर की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स पहुंची काशी विश्वनाथ.

एप्पल कंपनी के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेंस पॉवेल जॉब्स महाकुंभ में शामिल होने से पहले द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद लेने वाराणसी पहुंचीं. उन्होंने बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन किए. इस दौरान वह काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश करते समय गुलाबी सूट और दुपट्टे के पारंपरिक परिधान में नजर आईं. इस दौरान उनकी सुरक्षा में कई पुलिसकर्मी भी तैनात थे. 

दरअसल, लॉरेंस पॉवेल जॉब्स निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि और अमेरिकी संत महर्षि व्यासानंद गिरि के साथ विश्वनाथ मंदिर पहुंची थीं. विश्वनाथ मंदिर में पूजा के दौरान उन्होंने बाबा विश्वनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना की. कैलाशानंद गिरि प्रयागराज में पेशवाई के बाद महादेव को कुंभ नगरी में आमंत्रित करने विश्वनाथ मंदिर पहुंचे थे और उन्होंने बाबा विश्वनाथ को जल चढ़ाकर कुंभ के सफल आयोजन की प्रार्थना की.

लॉरेंस पॉवेल जॉब्स

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जल्द ही लॉरेंस जॉब्स का सनातनी नाम 'कमला' हो जाएगा और अगले 17 दिनों तक वह प्रयागराज में निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि की कथा सुनेंगी और वह कथा की प्रथम यजमान भी होंगी. इसके अलावा वह 10 दिनों तक कल्पवास के नियमों का पालन करेंगी.

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आध्यात्मिक गुरु स्वामी कैलाशानंद गिरि ने कहा, लॉरेंस जॉब्स बहुत धार्मिक और आध्यात्मिक हैं. वह हमारी परंपराओं के बारे में जानना चाहती हैं. वह मुझे एक पिता और गुरु के रूप में सम्मान देती हैं. हर कोई उनसे सीख सकता है. भारतीय परंपराओं को दुनिया स्वीकार कर रही है. काशी विश्वनाथ मंदिर में उनके दौरे को लेकर कोई विवाद नहीं है. मैं यह बहुत स्पष्ट करना चाहता हूं. मैं एक आचार्य हूं और परंपराओं और मूल सिद्धांतों का पालन करना और आचरण बनाए रखना मेरा काम है. वह मेरी बेटी हैं और महर्षि व्यासानंद भी वहां थे. हमारे पूरे परिवार ने अभिषेक और पूजा की. उन्हें प्रसाद और माला दी गई, लेकिन एक परंपरा है कि हिंदू के अलावा कोई भी काशी विश्वनाथ को नहीं छू सकता. अगर मैं इस परंपरा का पालन नहीं करूंगा, तो यह टूट जाएगी.

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