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'कल बात हुई, अब संपर्क नहीं हो रहा', ईरान में फंसे उत्तर प्रदेश के कई लोग, परिवार को सता रही चिंता

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान के क़ोम में रह रहे उत्तर प्रदेश के लोगों से संपर्क टूटने से बाराबंकी के कई परिवारों में चिंता बढ़ गई है. परिजनों का कहना है कि शुरुआत में थोड़ी देर बात हुई थी, लेकिन अब संपर्क नहीं हो पा रहा है. आठ लोग धार्मिक पढ़ाई के लिए वहां मौजूद हैं. परिवार मस्जिदों में दुआ कर रहे हैं और भारत सरकार से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं.

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उत्तर प्रदेश के कई लोग ईरान में फंस गए हैं. Photo ITG
उत्तर प्रदेश के कई लोग ईरान में फंस गए हैं. Photo ITG

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान में रह रहे अपने परिजनों से संपर्क न हो पाने के कारण यहां कई परिवारों में चिंता की लहर दौड़ गई है. ईरान के क़ोम में रह रहे छात्रों और इस्लामी विद्वानों से संपर्क टूटने से परिजन बेहद परेशान हैं. अधिवक्ता दिलकश रिजवी ने कहा कि हमलों की खबर सुनने के बाद से पूरा परिवार बेहद परेशान है. उन्होंने कहा, 'कल जंग की शुरुआत में कुछ लोगों से बात हो पाई थी, लेकिन उसके बाद से संपर्क नहीं हो पा रहा है.' परिजनों ने बताया कि अपने प्रियजनों की सलामती के लिए लोग मस्जिदों में जुटकर दुआ कर रहे हैं.

धार्मिक पढ़ाई के लिए ईरान में हैं आठ लोग
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बाराबंकी के कम से कम आठ लोग इस समय धार्मिक शिक्षा के लिए ईरान में हैं. इनमें मौलाना जफर अब्बास उर्फ फैजी, मौलाना आबिद हुसैन काज़मी, मौलाना अली मेहदी रिजवी, मौलाना सैयद काशिमी रिजवी जैदपुरी, फातिमा रबाब, मोहम्मद रजा, मोहम्मद काजिम, जौरस के मौलाना फैज बकरी और मौलाना अली मेहदी शामिल हैं.

कुछ समय संपर्क हुआ, फिर टूट गया
परिजनों ने बताया कि उनमें से कुछ से थोड़ी देर के लिए बात हो पाई थी, लेकिन बाद में संपर्क पूरी तरह टूट गया, जिससे परिवारों की चिंता और बढ़ गई.

हमले के बाद भाई से हुई थी बात: सदफ
मौलाना अब्बास मेहदी सदफ ने बताया कि उनके बड़े भाई मौलाना जफर अब्बास फैजी क़ोम में पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'हमले के बाद हमारी उनसे बात हुई थी. उन्होंने बताया कि हमला क़ोम की सीमा के पास हुआ है. उन्होंने कहा कि हालात नियंत्रण में हैं और आम लोग सड़कों पर सामान्य रूप से आ-जा रहे हैं.'

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भारत सरकार से लगाई मदद की गुहार
प्रभावित परिवारों ने भारत सरकार से अपील की है कि ईरान में मौजूद छात्रों और विद्वानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं.

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