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आरी से चीरा, टुकड़ों में काटा: नीले ड्रम में पिता की लाश 'फिट' करने के लिए बेटे ने पार की हैवानियत की हदें

Lucknow Murder Case: लखनऊ के आशियाना इलाके में एक कलयुगी बेटे ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं. पिता की हत्या के बाद लाश को ड्रम में छिपाने के लिए उसने आरी से शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए. सबूत मिटाने के लिए सिर को कार में रखकर 21 किलोमीटर दूर फेंक आया.

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पिता की हत्या कर लाश ड्रम में कर दी पैक (Photo- ITG)
पिता की हत्या कर लाश ड्रम में कर दी पैक (Photo- ITG)

लखनऊ में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई, जहां एक बेटे ने अपने ही पिता की निर्मम हत्या कर दी और फिर उनके शव को ठिकाने लगाने के लिए रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश रची. आरोपी बेटे ने पहले अपने पिता को रायफल से गोली मारी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इसके बाद जब शव को नीले ड्रम में छिपाने की कोशिश की, तो शरीर भारी होने के कारण वह उसमें समा नहीं रहा था. इसके बाद जो हुआ, उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए.

आरी से किए टुकड़े, 21 KM दूर फेंका सिर

शव को ड्रम में फिट करने के लिए बेटे ने हैवानियत दिखाते हुए आरी उठाई और पिता के दोनों हाथ काट दिए. इसके बाद भी जब सिर और पैर ड्रम में बाधा बनने लगे, तो उसने सिर को भी धड़ से अलग कर दिया. 

आरोपी यहीं नहीं रुका, वह पिता का कटा हुआ सिर अपनी कार में रखकर घर से 21 किलोमीटर दूर सुनसान इलाके में फेंक आया, ताकि शिनाख्त न हो सके. हाथ और पैरों को भी अलग-अलग जगहों पर ठिकाने लगा दिया गया.

गड्ढे में दबाई रायफल, पुलिस ने खोला राज

वारदात को पूरी तरह छिपाने के लिए शातिर बेटे ने हत्या में इस्तेमाल की गई रायफल को एक गड्ढे में गहरा दबा दिया था. उसे लगा कि वह पुलिस की नजरों से बच जाएगा, लेकिन कड़ियां जुड़ती गईं और खौफनाक सच सामने आ गया. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसकी निशानदेही पर शरीर के हिस्से व हथियार बरामद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. बीते सोमवार को सामने आए इस हत्याकांड ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी है.

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क्या है हत्या की वजह?

बताया जा रहा है कि चार महीने पहले मानवेंद्र सिंह के मकान से कीमती गहने चोरी हो गए थे. मानवेंद्र ने नौकरानी पर शक जताते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में पता चला कि जेवर उसने नहीं चुराए थे. ऐसे में बेटे अक्षत सिंह की करतूत छिपाने के लिए पिता ने थाने से अपनी शिकायत वापस ले ली थी. इसके बाद से मानवेंद्र अपने बेटे अक्षत की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे थे. 22 फरवरी की तड़के मानवेंद्र ने अक्षत को पढ़ाई के लिए समझाया, जिसके बाद उसने वारदात को अंजाम दे दिया. हैरानी की बात यह है कि 20 फरवरी से लापता मानवेंद्र की गुमशुदगी की रिपोर्ट उनके बेटे अक्षत ने खुद दर्ज कराई थी.

परिजनों के अनुसार, आरोपी अक्षत ने एक कोचिंग संस्थान से नीट की तैयारी की थी और दो बार परीक्षा भी दी, मगर सफल नहीं हो पाया. पिता पढ़ाई को लेकर जोर डालते थे. डांट-डपट भी देते थे. इसी से तंग आकर उसने खौफनाक कदम उठा लिया.

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