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'CJM साहब को वापस लाओ...', संभल में जज विभांशु विभोर के ट्रांसफर पर भड़का वकीलों का गुस्सा, कोर्ट के बाहर जमकर नारेबाजी

संभल के CJM विभांशु सुधीर के तबादले पर वकीलों ने 'जज साहब को वापस लाओ' के नारों के साथ जोरदार प्रदर्शन किया. उन्होंने हाल ही में संभल हिंसा मामले में ASP समेत कई पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश दिया था. फैसले के कुछ ही घंटों बाद हुए इस ट्रांसफर को लेकर अब तीखी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

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संभल कोर्ट के बाहर वकीलों का प्रोटेस्ट (Photo- ITG)
संभल कोर्ट के बाहर वकीलों का प्रोटेस्ट (Photo- ITG)

यूपी के संभल में सीजीएम विभांशु विभोर के ट्रांसफर के बाद वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा. बुधवार को दर्जनों वकीलों ने कोर्ट के बाहर जमकर प्रदर्शन किया. इस दौरान वकीलों ने 'सीजीएम साहब को वापस लाओ' के नारे लगाए. 

विभांशु विभोर वहीं जज हैं, जिन्होंने एसपी अनुज चौधरी समेत कई पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश दिया था. लेकिन इसके कुछ घंटे बाद उनके तबादले का आर्डर आ गया. अब इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं. सियासत भी देखने को मिल रही है. 

मालूम हो कि 18 सितंबर 2025 को विभांशु सुधीर ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के तौर पर कार्यभार संभाला था. कार्यभार संभालने के कुछ ही महीनों बाद उन्होंने ऐसे फैसले दिए, जिनसे पुलिस महकमे में खलबली मच गई. 

हालांकि, अब संभल हिंसा मामले में ASP समेत 20 पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश देने वाले CJM विभांशु सुधीर के तबादले पर वकीलों ने मोर्चा खोल दिया है. आज चंदौसी में वकीलों ने प्रदेश सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया.

वकीलों का आरोप है कि आलम नामक युवक की मौत के मामले में पुलिस पर कार्रवाई का आदेश देने के कारण ही CJM का सुल्तानपुर तबादला किया गया है. अब आदित्य सिंह संभल के नए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं.

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जानिए पूरा मामला 

संभल के सीजेएम विभांशु सुधीर के तबादले ने कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है. यह पूरा विवाद 24 नवंबर 2024 की संभल हिंसा से जुड़ा है, जिसमें यामीन नामक व्यक्ति ने अपने बेटे को तीन गोलियां लगने का आरोप पुलिस पर लगाया था. 9 जनवरी 2026 को सीजेएम ने एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों पर FIR का ऐतिहासिक आदेश दिया, जो 12 जनवरी को सार्वजनिक हुआ.

इससे पहले भी उन्होंने फर्जी एनकाउंटर मामले में 13 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज करने का कड़ा आदेश दिया था. पुलिस प्रशासन ने इस पर बगावती रुख अपनाते हुए FIR दर्ज करने से मना कर दिया और हाईकोर्ट जाने की बात कही. 22 जनवरी को FIR दर्ज करने की समय-सीमा खत्म होने से ठीक पहले, 20 जनवरी की रात सीजेएम का अचानक सुल्तानपुर तबादला कर दिया गया. वकीलों ने इस टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए इसे पुलिसिया दबाव का परिणाम बताया है.

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