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रामपुर: विधायक की जगह बेटे ने किया सरकारी अस्पताल का निरीक्षण, डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर झाड़ा रौब! गनर भी थे साथ

उत्तर प्रदेश के रामपुर में अपना दल (एस) विधायक शफीक अहमद अंसारी के बेटे ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नवल निरीक्षण किया. विधायक पुत्र ने न केवल चिकित्सा अधिकारी की कुर्सी पर कब्जा किया, बल्कि अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी दिए, जिसके बाद सीएमओ ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं.

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डॉक्टर की कुर्सी पर बैठे विधायक शफीक अहमद अंसारी के बेटे (Photo- Screengrab)
डॉक्टर की कुर्सी पर बैठे विधायक शफीक अहमद अंसारी के बेटे (Photo- Screengrab)

Uttar Pradesh News: रामपुर की स्वार तहसील के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में स्वार-टांडा विधायक शफीक अहमद अंसारी के पुत्र पुलिस बल के साथ निरीक्षण करने पहुंचे. इस दौरान उन्होंने सरकारी प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए चिकित्सा अधिकारी की कुर्सी पर बैठकर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए. यह घटना हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो के जरिए सामने आई है. विधायक पुत्र के इस व्यवहार पर रामपुर की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) दीपा सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए एडिशनल सीएमओ के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित कर दी है.

डॉक्टर की कुर्सी और विधायक पुत्र का टशन

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिख रहा है कि विधायक पुत्र किस तरह सत्ता के रसूख में डूबे हुए हैं. बिना किसी वैधानिक अधिकार के वे अस्पताल पहुंचे और एमबीबीएस एमडी स्तर के चिकित्सा अधिकारी को दरकिनार कर उनकी मुख्य कुर्सी पर बैठ गए. वहां मौजूद स्टाफ के साथ उनका व्यवहार किसी बड़े अधिकारी जैसा था, मानो वे अस्पताल के सर्वेसर्वा हों. विधायक पुत्र ने खुद इस 'भौकाल' का वीडियो बनवाकर वायरल करवाया.

सीएमओ ने बिठाई जांच, पुलिस प्रोटोकॉल पर सवाल

मामला तूल पकड़ते ही सीएमओ रामपुर दीपा सिंह ने स्पष्ट किया कि विधायक के आने की सूचना थी, लेकिन उनके स्थान पर पुत्र का आना और कुर्सी पर बैठना किसी प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं है. प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के अनुसार, उन्होंने कुर्सी ऑफर नहीं की थी. सीएमओ ने यह भी सवाल उठाया कि किस नियम के तहत विधायक पुत्र को भारी पुलिस बल मुहैया कराया गया था. उन्होंने कहा कि जांच के तथ्यों के आधार पर शासन के निर्देशानुसार कार्रवाई होगी.

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रसूख के आगे बेबस सरकारी तंत्र?

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि सरकारी व्यवस्था में बाहरी हस्तक्षेप किस हद तक बढ़ गया है. विधायक पुत्र का इस तरह पुलिस बल के साथ घूमना और सरकारी दफ्तरों में हुक्म चलाना चर्चा का विषय बना हुआ है. अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर हैं कि क्या रसूखदार विधायक के बेटे पर कोई कानूनी कार्रवाई या एफआईआर दर्ज होगी या मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा. 

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