इंसानी जिंदगी में आंख, नाक और कान जैसे अंग बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. अगर इनमें से किसी एक अंग में भी समस्या आ जाए तो व्यक्ति का जीवन प्रभावित हो जाता है. उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक ऐसी ही भावुक और प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां चार मासूम बच्चे, जो बचपन से सुन नहीं पाते थे, अब सर्जरी के बाद सुनने और बोलने लगे हैं. यह पूरा मामला रामपुर जनपद के अलग-अलग इलाकों से जुड़ा है. स्वार तहसील क्षेत्र के गांव नानकार निवासी रियाज अहमद, रायपुर चुनाव वाला निवासी शरद खान, मोहल्ला खास निवासी नाजिम और शाहाबाद क्षेत्र के नरेंद्रपुर निवासी अरविंद के बच्चे बचपन से ही सुनने में असमर्थ थे. इस वजह से उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा था और उनके परिवार भी चिंता में थे.
इन बच्चों के माता-पिता ने अपनी समस्या लेकर डीएम रामपुर अजय कुमार द्विवेदी के जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंचकर गुहार लगाई. परिजनों की इस अपील को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने तुरंत कार्रवाई शुरू कराई. दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के तहत संचालित योजना के अंतर्गत इन बच्चों की सर्जरी कराई गई. डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि ये परिवार जनता दर्शन में अपनी समस्या लेकर आए थे. उन्होंने बताया कि दोनों बच्चियां बचपन से सुन और बोल नहीं सकती थीं. विभाग की ओर से उनकी सर्जरी कराई गई. सर्जरी के बाद बच्चों को फिजियोथैरेपी और अभ्यास कराया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं.
निशुल्क सर्जरी से बदली बच्चों की जिंदगी
उन्होंने कहा कि जिन बच्चों की सर्जरी 5 से 6 महीने पहले हुई थी, उन्होंने अब सुनना और बोलना शुरू कर दिया है. दूसरी बच्ची की प्रगति भी अच्छी है और उम्मीद है कि वह भी जल्द सामान्य जीवन जी सकेगी. इस पहल के बाद परिवारों में खुशी का माहौल है. डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की सर्जरी पूरी तरह निशुल्क कराई जाती है. इसका पूरा खर्च दिव्यांगजन कल्याण विभाग द्वारा उठाया जाता है. उन्होंने बताया कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य यही है कि जरूरतमंद और गरीब परिवारों को इसका लाभ मिल सके.
इसके अलावा उन्होंने आगे कहा कि सर्जरी के बाद बच्चों को फिजियोथैरेपी और नियमित अभ्यास कराना जरूरी होता है. इसी प्रक्रिया के बाद बच्चों में सुनने और बोलने की क्षमता विकसित होती है. उन्होंने बताया कि जिन बच्चों की सर्जरी कराई गई है, उनमें से कुछ ने पहले ही अच्छे परिणाम दिखाने शुरू कर दिए हैं और बाकी बच्चों से भी इसी तरह की उम्मीद है.
फिजियोथैरेपी के बाद सुनने और बोलने लगे बच्चे
इस पहल के जरिए जिला प्रशासन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सही तरीके से लागू होने पर लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं. डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सभी कल्याणकारी योजनाओं को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. रामपुर में इस पहल की अब चारों तरफ सराहना हो रही है. जिन परिवारों ने कभी अपने बच्चों को सामान्य जीवन जीते हुए नहीं देखा था, अब वे उन्हें बोलते और सुनते हुए देखकर भावुक हो रहे हैं. यह पहल न सिर्फ इन बच्चों के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा बन गई है.