मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा में ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी को भावुक कर दिया. लखनऊ से लेकर सैफई तक शोक की लहर दिखाई दी. प्रतीक यादव भले ही राजनीति से दूर रहे हों, लेकिन उनके निधन ने पूरे यादव परिवार और सैफई गांव को गहरे दुख में डुबो दिया. प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा में सैफई गांव उमड़ पड़ा. गांव के बुजुर्ग, नौजवान, महिलाएं और यादव परिवार के करीबी लोग बड़ी संख्या में अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे. हर किसी की आंखों में दुख और चेहरे पर गम साफ दिखाई दे रहा था.
प्रतीक यादव का सैफई से रिश्ता हमेशा थोड़ा अलग माना जाता रहा. राजनीति में सक्रिय न रहने के कारण वो सार्वजनिक जीवन से काफी दूर रहते थे. उनका जीवन निजी दायरे तक सीमित था. इसके बावजूद सैफई गांव के लोगों के लिए यह काफी था कि वह मुलायम सिंह यादव के बेटे थे. यही वजह रही कि अंतिम यात्रा में पूरा गांव शामिल होता नजर आया.
अंतिम दर्शन के लिए यादव परिवार की लगभग सभी महिलाएं भी पहुंचीं. देर शाम से लेकर सुबह तक परिवार के सदस्य और रिश्तेदार लगातार प्रतीक यादव के घर पहुंचते रहे. माहौल पूरी तरह गमगीन था। हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश करता दिखाई दिया.
राजनीति से दूर रहे प्रतीक यादव की मौत ने सैफई को रुला दिया
अखिलेश यादव भी पूरे समय परिवार के साथ मजबूती से खड़े नजर आए. वह पहले पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और उसके बाद सीधे प्रतीक यादव के घर पहुंचे. उनके साथ डिंपल यादव और बच्चे भी मौजूद रहे. शिवपाल यादव, धर्मेंद्र यादव, तेज प्रताप यादव, अक्षय यादव समेत परिवार के कई सदस्य अंतिम यात्रा में शामिल हुए. हालांकि रामगोपाल यादव दिखाई नहीं दिए, लेकिन उनके परिवार के सदस्य वहां मौजूद थे.
सैफई गांव के लोगों की नजरें लगातार प्रतीक यादव की दोनों बेटियों पर टिकी रहीं. घर से लेकर बैकुंठ धाम तक दोनों बेटियां अपने पिता के आखिरी सफर में साथ रहीं. इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया. कई लोग अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक सके. अंतिम यात्रा के दौरान ऐसा लग रहा था जैसे पूरा सैफई गांव अपने बेटे को विदाई देने निकल पड़ा हो. जो लोग घर तक नहीं पहुंच पाए, वो सीधे गोमती नदी के किनारे स्थित बैकुंठ धाम पहुंच गए. हर कोई चाहता था कि वह प्रतीक यादव को आखिरी श्रद्धांजलि जरूर दे.
प्रतीक यादव हमेशा परिवार के कार्यक्रमों और रस्मों में शामिल होते रहे. भले ही वह राजनीति से दूर रहे, लेकिन परिवार के संस्कारों और परंपराओं से उनका गहरा जुड़ाव था. मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद परिवार और सैफई से उनकी दूरी कुछ बढ़ी जरूर थी, लेकिन उन्होंने कभी पारिवारिक कार्यक्रमों से खुद को अलग नहीं किया. यादव परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि प्रतीक यादव अपनी निजी दुनिया में रहना पसंद करते थे. उन्हें राजनीति और सार्वजनिक बयानबाजी से दूरी बनाए रखना अच्छा लगता था. यही कारण था कि वह अक्सर सार्वजनिक मंचों से दूर दिखाई देते थे.
बेटियों के साथ अंतिम सफर पर निकले प्रतीक यादव, भावुक हुआ माहौल
लेकिन उनकी मौत ने परिवार के बीच मौजूद सारी दूरियों को खत्म कर दिया. अंतिम यात्रा में जिस तरह पूरा यादव परिवार और सैफई गांव एकजुट दिखाई दिया, उसने यह साफ कर दिया कि रिश्तों की डोर अब भी उतनी ही मजबूत है. अंतिम यात्रा के दौरान पूरे माहौल में सिर्फ शोक और खामोशी दिखाई दी. गांव के लोग चुपचाप अंतिम यात्रा के साथ चलते रहे. कई बुजुर्गों की आंखें नम थीं. लोग एक-दूसरे से बस यही कहते नजर आए कि मुलायम सिंह यादव के परिवार पर यह एक और बड़ा दुख आ गया है.
प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा ने यह भी दिखाया कि भले कोई राजनीति में सक्रिय हो या नहीं, परिवार और समाज में उसकी अपनी एक पहचान होती है. सैफई गांव ने अपने अंदाज में मुलायम सिंह यादव के बेटे को आखिरी विदाई दी और यह दृश्य लंबे समय तक लोगों की यादों में बना रहेगा.