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अजीत सिंह हत्याकांड के आरोपी 'कबूतरा' की राजभर की पार्टी में एंट्री! सुभासपा की सफाई- 'ये वो वाला प्रदीप सिंह नहीं है'

यूपी की योगी सरकार के सहयोगी दल सुभासपा में अजीत सिंह हत्याकांड के आरोपी प्रदीप सिंह कबूतरा की एंट्री से सियासत गरमा गई है. पूर्व वांटेड प्रदीप को कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सदस्यता दिलाई. हालांकि, पार्टी प्रवक्ता अरुण राजभर ने नाम का कन्फ्यूजन बताते हुए इस दावे को खारिज किया है.

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प्रदीप सिंह कबूतरा ओमप्रकाश राजभर की पार्टी में शामिल (Photo- ITG)
प्रदीप सिंह कबूतरा ओमप्रकाश राजभर की पार्टी में शामिल (Photo- ITG)

सियासत मे ना दोस्त तय होते हैं ना दुश्मन. कब कौन दोस्त होगा और कौन दुश्मन, यह वक्त जरूरत के हिसाब से सियासत तय करती है. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के गठबंधन में शामिल सुभासपा का कुछ ऐसा ही खेल कर रही है. एक तरफ मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी सुभासपा के विधायक हैं तो वहीं, दूसरी तरफ मुख्तार अंसारी के करीबी अजीत सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रदीप सिंह कबूतरा को भी सुभासपा में शामिल कराया गया है. मंगलवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने जिस प्रदीप को पीला गमछा पहनाकर 'माननीय' बनने की राह पर चलाया वो कभी यूपी पुलिस का वांटेड था. 

आपको बता दें कि ओमप्रकाश राजभर के साथ खड़े इस शख्स का नाम प्रदीप सिंह 'कबूतरा' है. यह आजमगढ़ के तरवा थाना क्षेत्र के कबूतरा गांव का रहने वाला है. प्रदीप आजमगढ़ के गैंगस्टर ध्रुव कुमार सिंह उर्फ कुंटू सिंह और अखंड सिंह का करीबी बताया जाता है. गैंगस्टर सुनील राठी और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के शूटर राजन जाट उर्फ कुणाल का भी करीबी रहा है. 

गौरतलब है कि साल 2020 में लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू की गई थी. पुलिस कमिश्नर रेट व्यवस्था के लागू हुए 1 साल भी पूरा नहीं हुआ था कि लखनऊ में एक बड़ी हत्याकांड को अंजाम दिया गया. 6 जनवरी 2021 को मऊ के मोहम्मदाबाद के ब्लॉक प्रमुख पति अजीत सिंह की गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई. क्रॉस फायरिंग में एक शूटर राजेश तोमर भी घायल हुआ.

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लखनऊ के विभूति खंड थाना क्षेत्र में हुए इस हत्याकांड में प्रदीप सिंह कबूतरा का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा. वजह पुलिस की जांच में पता चला कि अजीत सिंह हत्याकांड को अंजाम देने वाले शूटरों को शरण देने वाला, मदद करने वाला प्रदीप सिंह ही था. कहा तो यहां तक जाता है कि वारदात में शूटर राजेश तोमर को गोली लगी तो उसे लखनऊ के निजी डॉक्टर से इलाज करवाने और फिर सुल्तानपुर में एक नर्सिंग होम में इलाज कराने वाला भी प्रदीप ही था.

जब प्रदीप सिंह का नाम सामने आया तो लखनऊ पुलिस ने छापेमारी शुरू कर दी. लखनऊ से लेकर आजमगढ़, मऊ, वाराणसी, दिल्ली तक छापेमारी की गई. प्रदीप ने लखनऊ में सरेंडर करने की कोशिश की लेकिन पुलिस की चौकसी से सरेंडर नहीं हो पाया तो उसने अप्रैल 2021 में आजमगढ़ एसीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया.

अब कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के साथ सुभासपा ज्वाइन करने वालों में एक प्रदीप सिंह कबूतरा भी है जिसके ऊपर कभी अजीत सिंह हत्याकांड के शूटरों को शरण देने के आरोप लगे. जिसे यूपी पुलिस कभी शहर दर शहर खोज रही थी वही प्रदीप सुभासपा का सदस्य बनकर माननीय बनने की राह पर है. 

हालांकि, इस संबंध में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह पार्टी के कार्यक्रम में लखनऊ से बाहर है. उन्हें इस जॉइनिंग की जानकारी नहीं है. वहीं, अरुण राजभर का कहना था कि अजीत सिंह हत्याकांड में अखंड सिंह का नाम आया था प्रदीप सिंह का नहीं और एक नाम के कई लोग होते हैं. यह वह प्रदीप सिंह कबूतरा नहीं है. 

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