ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सोमवार को बरेली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'सड़क पर नमाज न पढ़ने' वाले बयान पर मुस्लिम समाज का पक्ष रखा. आगामी 28 तारीख को होने वाले ईद के त्योहार के मद्देनजर सीएम योगी ने बयान दिया था कि नमाज शिफ्ट में पढ़ी जाए, सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर इसे न होने दिया जाए. मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि मुख्यमंत्री की यह बात खुद इस्लाम का साफ नजरिया है. मुसलमान शांति और सुकून हासिल करने के लिए मस्जिद या घर में नमाज पढ़ता है और शरियत के मुताबिक भीड़ बढ़ने पर इमाम बदलकर दूसरी, तीसरी, चौथी या पांचवीं जमात (शिफ्ट) में नमाज अदा करने की व्यवस्था खुद इस्लाम में बताई गई है, ताकि ट्रैफिक बाधित न हो.
मस्जिद और घर में नमाज पढ़ने का महत्व
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने स्पष्ट किया कि नमाज पढ़ने वाले बंदे और खुदा के दरमियान खुशू और खुजू पैदा होती है, जिसमें बीच में कोई खलल या डिस्टर्बेंस नहीं होना चाहिए. मस्जिद में नमाज पढ़ने पर ज्यादा शवाब मिलता है और घर पर भी नमाज पढ़ने का शवाब मिलता है. कोई भी मुसलमान जानबूझकर रोड या सड़क पर नमाज नहीं पढ़ता है. इस्लाम सहन पसंद है और वह आराम फरमान करता है. इस शरियत के सिस्टम से लोगों की नमाज भी शांति से हो जाएगी और किसी आम राहगीर को परेशानी भी नहीं होगी.
कुर्बानी को लेकर जारी की विशेष गाइडलाइन
आगामी 28 तारीख को देश में पारंपरिक तरीके से मनाई जाने वाली बकरीद को लेकर मौलाना ने कहा कि इस दिन पूरे शान-शौकत के साथ कुर्बानी की जाएगी. उन्होंने समाज के लोगों को समझाते हुए अपील की है कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थान, गली, चौराहे या खुले में कुर्बानी बिल्कुल न करे. लोग अपने घरों या निजी स्थानों पर ही कुर्बानी करें. जिस स्थान पर यह धार्मिक कार्य हो रहा हो, उसे चारों ओर से बंद कर लिया जाए, ताकि बाहर किसी को कोई आपत्ति न हो.
प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर पूर्ण रोक की अपील
मौलाना ने आगे कहा कि सरकार हमेशा साफ-सफाई और कानून व्यवस्था को बेहतर से बेहतर करती है. कुर्बानी सदियों से चली आ रही परंपरा है जो आगे भी चलती रहेगी. उन्होंने हिदायत दी कि कुर्बानी के बाद जानवर के बचे हुए अवशेषों को वहीं पर गड्ढा खोदकर दफन कर दिया जाए, जिससे किसी को कोई शिकायत या एतराज न हो. इसके साथ ही उन्होंने मुस्लिम समाज से पुरजोर अपील की कि किसी भी प्रतिबंधित पशु की कुर्बानी बिल्कुल न की जाए.