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मोहन भागवत बोले- भाजपा का रिमोट कंट्रोल RSS के हाथ में नहीं', यूजीसी पर दिया बयान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी के रिश्ते को लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लखनऊ में खुलकर बात रखी. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बीजेपी का रिमोर्ट कन्ट्रोल संघ के हाथ में नहीं है. इतना ही नहीं यूजीसी के नए नियमों को लेकर भी अपनी बात रखी.

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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बीजेपी के रिश्ते पर खुलकर की बात (Photo-ANI)
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बीजेपी के रिश्ते पर खुलकर की बात (Photo-ANI)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को लेकर कार्यक्रमों की श्रृंखला में संघ प्रमुख मोहन भागवत लखनऊ प्रवास पर हैं. इस दौरान संघ प्रमुख ने बुधवार को कहा कि संघ भाजपा का रिमोट कंट्रोल नहीं है. संघ के स्वयंसेवक बीजेपी में जाते हैं और पार्टी में सियासी तौर पर आगे भी बढ़े हैं, लेकिन यह कहना गलत है कि संघ भाजपा को चलाता है. 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बीजेपी और आरएसएस के संबंधों पर बात किया.उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक अलग-अलग क्षेत्रों में जाते हैं, उसमें से कुछ स्वयंसेवक राजनीति में भी सक्रिय होते हैं, लेकिन यह कहना गलत है कि संघ भाजपा को चलाता है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि बीजेपी का विरोध करने वाले लोग ही आरएसएस का विरोध करते हैं. 

जाति व्यवस्था पर संघ प्रमुख ने रखी बात
मोहन भागवत ने परिवार और संस्कार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार भले कम हो गए हों, लेकिन रिश्तों की भावना बनी रहनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सप्ताह में कम से कम एक दिन परिवार को साथ बैठना चाहिए। बच्चों को संस्कार घर और स्कूल दोनों से मिलते हैं.

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संघ प्रमुख ने हिंदू समाज की एकता पर जोर देते हुए कहा कि समाज में अपार शक्ति है, लेकिन वह बंटा हुआ है और स्वार्थ में फंसा है. यदि समाज एकजुट हो जाए तो देश को आगे बढ़ाने की क्षमता रखता है.जाति व्यवस्था को पुराना बताते हुए उन्होंने कहा कि अब जाति नाम की कोई व्यवस्था नहीं रहनी चाहिए. 

उन्होंने कहा कि पहले यह काम के आधार पर थी, लेकिन समय बदल चुका है. जाति की दीवारें धीरे-धीरे टूट रही हैं. संघ प्रमुख ने कहा कि हम सब भारत माता की संतान हैं. रंग, रूप या जाति अलग हो सकती है, लेकिन अपनापन बना रहना चाहिए.इसी भावना से छुआछूत जैसी बुराई समाप्त हो सकती है. जाति व्यवस्था अब पुरानी हो चुकी है. जाति नाम की कोई व्यवस्था अब रहनी नहीं चाहिए. पहले यह काम के आधार पर थी, अब समय बदल गया है. जाति की दीवारें धीरे-धीरे टूट रही हैं.

सरकारी नियंत्रण से मंदिर मुक्त हों-संघ प्रमुख
मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि असली चिंता यह होनी चाहिए कि मंदिरों की व्यवस्था और नियमित पूजा-पाठ की जिम्मेदारी कौन संभालेगा. उन्होंने उदाहरण दिया कि सिख समाज अपने गुरुद्वारों का संचालन व्यवस्थित ढंग से करता है. धर्माचार्यों और समाज को इस दिशा में आगे आना चाहिए.

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यूजीसी के नियम पर संघ प्रमुख ने रखी बात
यूजीसी की गाइडलाइंस पर उन्होंने संयमित रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए अदालत का फैसला आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी. इससे पहले उन्होंने कानून के पालन की बात कही थी और जोड़ा था कि यदि कोई कानून गलत है तो उसे बदलने का संवैधानिक रास्ता मौजूद है. उन्होंने कहा कि समाज जागरूक होगा तो राजनीति सुधरेगी.राजनीति समाज से बनती है। अगर समाज में सद्भाव और समझदारी होगी तो नेता भी वैसे ही होंगे. समाज जागरूक रहेगा तो हालात सुधरेंगे

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