नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के तीसरे और चौथे चरण के विस्तार के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का विरोध करने के लिए गौतम बुद्ध नगर के जेवर में 14 गांवों के किसानों ने महापंचायत में भाग लिया. किसानों ने कहा कि इस क्षेत्र को हवाई अड्डा परियोजना के बाद के चरण में विकसित करने का प्रस्ताव है, तो सरकार अब भूमि का अधिग्रहण क्यों कर रही है.
इसके चलते उनका मुआवजा कम हो जाएगा. हवाईअड्डे के अन्य अधिग्रहणों से तुलना करते हुए, उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवार अभी भी संकट में हैं और ऊंची कीमतों के कारण कहीं भी जमीन नहीं खरीद पा रहे हैं. हम किसी भी प्रकार के विकास का विरोध नहीं कर रहे हैं. इतिहास में कभी भी किसानों ने समाज के विकास का विरोध नहीं किया है.
प्रशासन को किसानों से बात करनी चाहिए
पंचायत की अध्यक्षता करने वाले नीमका शाहजहांपुर गांव के मास्टर तेजपाल सिंह ने कहा कि प्रशासन को किसानों से बात करनी चाहिए. साथ ही कानूनी कारण बताना चाहिए कि इस स्तर पर अधिग्रहण क्यों किया जा रहा है. हमारा गांव औद्योगिक शहर के अंतर्गत आता है. आप इसे एक दिन में नहीं उखाड़ सकते हैं. हमने देखा है कि उन किसानों का क्या हुआ, जिन्होंने पहले और दूसरे चरण के अधिग्रहण में अपनी जमीनें दी.
साल 2041 की मुद्रास्फीति को ध्यान में रख कर दें मुआवजा
कई पीढ़ियों से किसान थे, वे अब भूमिहीन हैं. हम जमीन भी नहीं खरीद सकते, क्योंकि कीमतें आसमान छू रही हैं. अगर, किसी व्यक्ति ने जीवन भर खेती की है, आप उसकी जमीन ले लेंगे, तो वह क्या करेगा. प्राधिकरण वास्तव में हमारी जमीन चाहती है, तो उन्हें 2041 की मुद्रास्फीति और सर्कल दर को ध्यान में रखना होगा और फिर उसके अनुसार हमें मुआवजा देना होगा.
किसानों को उठाना पड़ेगा भारी नुकसान
वहीं, किसानों का कहना है कि सरकार भविष्य के लिए भूमि बैंक बनाने के लिए ही उनकी जमीन का अधिग्रहण कर रही है. हवाई अड्डे के विस्तार के लिए क्षेत्र पर वास्तविक काम बाद में शुरू होगा, शायद 2041 तक. फिर सरकार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी क्यों शुरू की है. अगर, वे आज जमीन खरीदते हैं, तो उन्हें यह सस्ती दर पर मिलेगी. भविष्य में जमीन की कीमत में बढ़ोतरी होगी और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.
8424 परिवारों का किया जाएगा पुनर्वास
बता दें कि नोएडा इंटरनेशनल हवाई अड्डा विस्तार के लिए 14 गांवों की कुल 2053 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है. इसमें से कुल 1888 हेक्टेयर जमीन किसानों की है और बाकी सरकारी जमीन है. अधिग्रहण से लगभग 11483 परिवार प्रभावित होंगे और परियोजना के तहत छह गांवों के लगभग 8424 परिवारों का पुनर्वास किया जाएगा. अधिग्रहण के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) द्वारा किया गया था.
प्रशासन इतने हेक्टेयर जमीन कर चुकी है अधिग्रहण
जीबीयू ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. किसानों ने सबसे पहले इस कदम का विरोध तब किया, जब जिला प्रशासन के अधिकारी सार्वजनिक सुनवाई के लिए गांव पहुंचे. यह 15 दिसंबर से 21 दिसंबर तक निर्धारित थी. प्रभावित गांव थोरा, नीमका शाहजहाँपुर, ख्वाजपुर, रामनेर, किशोरपुर, बनवारी बांस, परोही, मुकीमपुर शिवरा, जेवर बांगर, सबौता मुस्तफाबाद, अहमदपुर चुरोली, दयानतपुर, बंकापुर और रोही हैं. सरकार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण के लिए 1365 हेक्टेयर और दूसरे चरण के लिए 1334 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण कर चुकी है.