उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने एक हाई-प्रोफाइल ठग गिरोह का खुलासा किया है, जिसने लोगों का भरोसा जीतकर उन्हें लाखों रुपये का चूना लगाया. इस गिरोह की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें शामिल मुख्य आरोपी सरकारी शिक्षक हैं, जो समाज को शिक्षा देने के बजाय ठगी का जाल बिछा रहे थे.
लखनऊ के उत्तरी जोन की सर्विलांस टीम और थाना माल पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में एक सरकारी शिक्षक दंपति और उनका भाई शामिल है. पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था और नकली सोने के बिस्कुट देकर उनसे मोटी रकम ठग लेता था.
नकली सोने के बिस्कुट दिखकर ठगी
डीसीपी नार्थ गोपाल कृष्ण चौधरी ने बताया कि आरोपी राह चलते लोगों को रोककर उनसे बातचीत शुरू करते थे और फिर भारी मुनाफे का लालच देते थे. अपने शिक्षक होने का फायदा उठाकर वे लोगों का भरोसा जीत लेते थे और उन्हें नकली सोना बेच देते थे. पुलिस ने आरोपियों के पास से 10 नकली सोने के बिस्कुट, 2 नकली रोल्ड गोल्ड चेन, 16 अलग-अलग कंपनियों के सिम कार्ड और 8 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया जाता था.
इस गिरोह का खुलासा तब हुआ जब ग्राम कुशमौरा निवासी सुभाष चंद्र मौर्या ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने बताया कि एक अर्टिगा कार में आए लोगों ने उनकी स्कूटी के बैग से करीब 5 लाख रुपये निकाल लिए. पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर जांच शुरू की और सीसीटीवी व सर्विलांस की मदद से आरोपियों तक पहुंची. जांच के दौरान पुलिस ने 10 अप्रैल की सुबह करीब 2:50 बजे काकराबाद अंडरपास के पास घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मो. अफसर, उसकी पत्नी दानिशा फातिमा और भाई मो. अजमल के रूप में हुई है.
ठगी के आरोप में तीन गिरफ्तार
पुलिस जांच में सामने आया है कि मो. अफसर बदायूं के प्राथमिक विद्यालय बौरा में सहायक अध्यापक है, जबकि उसकी पत्नी दानिशा फातिमा लखनऊ के कालीचरन इंटर कॉलेज में सरकारी अध्यापिका है. उनका भाई अजमल, जो पीओपी का काम करता था, इस ठगी के धंधे में उनका साथ देता था. फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया है. मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित पीड़ितों की तलाश कर रही है.