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न पछतावा, न चेहरे पर शिकन... हत्यारे बेटे को घर ले गई पुलिस तो किसी से नहीं मिलाई नजरें

लखनऊ हत्याकांड में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस ने बताया कि पिता की हत्या के बाद बेटे ने शव को नीले ड्रम में रख दिया था. घर में रह रही उसकी चाची को शक न हो, इसलिए आरोपी अक्षत और उसकी बहन उनसे रूटीन में मिलते रहे.

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हत्यारे बेटे को नहीं था कृत्य पर पछतावा. (Photo: ITG)
हत्यारे बेटे को नहीं था कृत्य पर पछतावा. (Photo: ITG)

लखनऊ हत्याकांड इस वक्त सुर्खियों में है. इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. मामले में अब पुलिस ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है. पुलिस ने बताया कि बेटे अक्षत ने पहले पिता की गोली मारकर हत्या की. फिर शव के कई टुकड़े किए और नीले ड्रम में भर दिया. हत्या के बाद अक्षत और उसकी बहन कृति शव के पास बैठकर नॉनवेज खाते रहे. जबकि बाहर सामान्य दिनचर्या का दिखावा चलता रहा. वहीं जब पुलिस उसे क्राइम सीन के लिए घर लेकर गई तो पिता की हत्या का न तो उसे पछतावा था और न ही चेहरे पर शिकन थी. 

घर में पड़ी थी लाश और चाची को भनक तक नहीं लगी 

हत्याकांड के बाद कृति अपना एग्जाम देने भी जाती रही. अक्षत शव को ठिकाने लगाने के लिए आरी और नीला ड्रम खरीदकर लाया. दोनों अपनी चाची नम्रता से रूटीन में मिलते रहे, ताकि वे कमरे में न जाएं और न ही उन पर शक करें. घर की चारदीवारी के भीतर जो हुआ, उसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया. पुलिस पूछताछ में सामने आया कि पिता की हत्या के वक्त बेटी कृति कमरे में मौजूद थी.

यह भी पढ़ें: ब्लिंकिट से मंगवाए चाकू, बाजार से खरीदी आरी-ड्रम... लखनऊ में बेटे ने ऐसे रची पिता की हत्या की साजिश

वारदात उसकी आंखों के सामने हुई, लेकिन उसने करीब 24 घंटे तक जुबान बंद रखी. पुलिस ने लगभग 40 मिनट की गहन पूछताछ के बाद उसके बयान दर्ज किए हैं. अब सवाल यही है कि क्या वह सिर्फ डरी हुई थी या कहानी में उसका भी कोई रोल है?

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हत्या के बाद आरोपी अक्षत ने बहन को इस कदर डराया कि उसने रूटीन सामान्य रखा. 20 और 21 फरवरी को कृति 11वीं की परीक्षा देने एपीएस स्कूल गई, ताकि किसी को शक न हो. घर में खून की साजिश चलती रही और बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश होती रही. करीब तीन साल पहले पिता मानवेंद्र ने बेटे अक्षत और बेटी कृति के खातों में करीब 5 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे.

घर से एक बार भाग चुका था अक्षत

इसके बाद अक्षत छह पन्नों का पत्र लिखकर घर से भाग गया था और खुद को बिजनेस करने वाला घोषित कर दिया था. 24 फरवरी को जब पुलिस उसे घर लाई, तो भीड़ की नजरें उसी पर टिकी रहीं. वह आंखें चुराकर अंदर चला गया. उसके चेहरे पर न पछतावा था और न ही जुर्म के लिए शिकन. मोहल्ले के लोग कहते हैं, जैसे कुछ हुआ ही न हो. 

बताया जा रहा है कि बेटे की हरकतों के बाद पिता ने घर में सख्ती बढ़ा दी थी. वे अक्सर कहते थे “तुम लोगों के लिए अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं, दूसरी शादी भी नहीं कर रहे.” इसी बीच उन्होंने मोहल्ले के एक दोस्त से शादी की सलाह भी ली थी. यह बात अक्षत को नागवार गुजरती थी. लोकेशन ट्रैकिंग में पता चला कि 20 फरवरी को अक्षत काकोरी गया था.

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जानबूझकर गया था काकोरी

काकोरी पहुंचकर उसने जानबूझकर फोन ऑन किया, ताकि आखिरी लोकेशन घर की जगह काकोरी दिखे और जांच भटक जाए. पुलिस के मुताबिक आरोपी काफी शातिर दिमाग का है. उसने शव ठिकाने लगाने के लिए आरी और नीला ड्रम खरीदा. बहन कृति, चाची नम्रता से रोजमर्रा की तरह मिलती रही, ताकि किसी को कमरे में झांकने का ख्याल भी न आए. 

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