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शादी के 8 साल बाद हुआ बेटा, अस्पताल की लापरवाही ने 12 दिन में छीनी सांसें... पिता ने कहा-'मेरे साथ बहुत गलत हुआ है'

झांसी के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान 12 दिन के नवजात की मौत हो गई. पिता शिवम अहिरवार ने अस्पताल स्टाफ पर ऑक्सीजन मास्क निकलने और लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि 8 साल बाद बेटा हुआ था. वहीं, डॉक्टर ने आरोपों से इनकार किया है. पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और मामले की जांच शुरू कर दी है.

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मन्नतों से मिला था वारिस.(Photo: Pramod Kumar Gautam/ITG)
मन्नतों से मिला था वारिस.(Photo: Pramod Kumar Gautam/ITG)

उत्तर प्रदेश के झांसी में एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान 12 दिन के नवजात शिशु की मौत हो गई. बच्चे के पिता शिवम अहिरवार ने अस्पताल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि शादी के आठ साल बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी, लेकिन अस्पताल की लापरवाही के कारण उन्होंने अपना इकलौता बेटा खो दिया. घटना के बाद पुलिस ने बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.

शिवम अहिरवार झांसी के उल्दन क्षेत्र के रहने वाले हैं और निजी काम करते हैं. उन्होंने बताया कि उनकी शादी आठ साल पहले रविता से हुई थी, लेकिन लंबे समय तक संतान नहीं हुई. औलाद की चाहत में उन्होंने कई धार्मिक स्थलों पर मन्नतें मांगीं. आखिरकार उनकी पत्नी गर्भवती हुई और 9 फरवरी को ऑपरेशन से बेटे का जन्म हुआ. परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी.

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भर्ती के दौरान बिगड़ी हालत, स्टाफ पर गंभीर आरोप

शिवम के अनुसार, जन्म के चार दिन बाद बच्चा घर आ गया था और दो दिन तक स्वस्थ रहा, लेकिन तीसरे दिन उसे हल्का बुखार आया. इसके बाद वे बच्चे को झांसी के वात्सल्य हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर प्रमोद गुप्ता ने बच्चे के गले में छाले होने की बात कहकर भर्ती कर लिया. इलाज के दौरान बच्चे की हालत में कुछ सुधार भी हुआ था.

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नवजात

पिता का आरोप है कि 21 तारीख को अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के कारण बच्चे का ऑक्सीजन मास्क निकल गया, लेकिन स्टाफ ने इस पर ध्यान नहीं दिया. उनका कहना है कि उस समय स्टाफ अन्य कामों में व्यस्त था और परिजनों को अंदर जाने से भी रोका जाता था. आरोप है कि ऑक्सीजन हटने के बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई और उसके मुंह से खून आने लगा, जिसके बाद उसकी मौत हो गई.

डॉक्टर ने आरोपों को बताया निराधार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

शिवम अहिरवार ने कहा कि यह उनका इकलौता बेटा था और अब उनकी पत्नी का तीसरा ऑपरेशन संभव नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि डॉक्टर मौजूद होते तो उनके बच्चे की जान बच सकती थी. उन्होंने मामले में न्याय की मांग की है और कहा कि उनके साथ बहुत गलत हुआ है.

वहीं, वात्सल्य हॉस्पिटल के डॉक्टर प्रमोद गुप्ता ने आरोपों को निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि जब नवजात को अस्पताल लाया गया था, तब उसकी हालत गंभीर थी और उसे सांस लेने में दिक्कत थी. इलाज के दौरान कुछ सुधार हुआ, लेकिन अचानक हालत बिगड़ गई. बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका. उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी.

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