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हरीश राणा के परिवार से मिलीं ब्रह्माकुमारी लवली दीदी, सुनाई संघर्ष और पीड़ा की अनकही दास्तां

Harish Rana Euthanasia: गाजियाबाद के हरीश राणा द्वारा इच्छामृत्यु की मांग के बीच ब्रह्माकुमारी संस्थान की लवली दीदी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. पिछले 18 वर्षों से परिवार के साथ जुड़ीं लवली दीदी ने इस कठिन समय में आत्मा, परमात्मा और परिवार के संघर्षपूर्ण सफर के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है.

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हरीश राणा के परिवार से मिलीं ब्रह्माकुमारी लवली दीदी (Photo- Screengrab)
हरीश राणा के परिवार से मिलीं ब्रह्माकुमारी लवली दीदी (Photo- Screengrab)

Harish Rana Euthanasia Case: गाजियाबाद के राज नगर एक्सटेंशन और मोहन नगर केंद्र की सेवा प्रभारी ब्रह्माकुमारी लवली दीदी ने रविवार को हरीश राणा के परिवार से मुलाकात की. उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और परिवार की मानसिक स्थिति पर अपनी बात रखी. लवली दीदी के अनुसार, हरीश राणा का परिवार पिछले 18 वर्षों से ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़ा हुआ है. हरीश की गंभीर शारीरिक स्थिति के कारण परिवार ने करीब 5 साल पहले दिल्ली का घर बेचकर राज नगर एक्सटेंशन में एक छोटा फ्लैट लिया था. यह फैसला एंबुलेंस से आवाजाही और इलाज में होने वाली परेशानियों को देखते हुए लिया गया था.

मालूम हो कि हरीश राणा की अंतिम विदाई से जुड़ा एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. यह वीडियो गाजियाबाद स्थित उनके घर का है, जिसमें ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ी लवली दीदी हरीश को आध्यात्मिक संदेश देती नजर आ रही हैं. वीडियो में वह भावुक होकर कहती हैं- “सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ.” इस पल को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं. 

भावुक समय और आध्यात्मिक सत्य

लवली दीदी ने कहा कि हरीश राणा के परिवार के लिए यह बेहद भावुक और चुनौतीपूर्ण समय है. जब कोई अपना करीब होता है और उसका शरीर साथ छोड़ने की स्थिति में होता है, तो गहरे भावनात्मक संबंधों के कारण परिवार को बहुत पीड़ा होती है. उन्होंने समझाया कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से आत्मा शरीर छोड़कर परमात्मा के पास जाती है. हम सभी परमात्मा के पास से इस संसार में अपना रोल अदा करने आए हैं और एक दिन सभी को वापस लौटना है.

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मौत और तैयारी का संदेश

ब्रह्माकुमारी लवली दीदी ने बताया कि इस दुनिया से विदा होना एक अटल सत्य है. कोई पहले जाता है तो कोई बाद में, लेकिन हर किसी को इस परिवर्तन के लिए आध्यात्मिक रूप से तैयार रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि हरीश राणा के सामने यह कठिन परिस्थिति दूसरों से पहले आ गई है. ऐसे में संस्थान का उद्देश्य परिवार को मानसिक शक्ति देना है ताकि वे इस सत्य को स्वीकार कर सकें और आने वाले समय के लिए खुद को तैयार रख सकें.

दिल्ली से गाजियाबाद तक का संघर्ष

परिवार के जुड़ाव पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि राणा परिवार पहले दिल्ली के केंद्र से जुड़ा था. हरीश की बीमारी ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया. दिल्ली के पुराने मकान से उन्हें अस्पताल ले जाने और एंबुलेंस में शिफ्ट करने में बहुत दिक्कतें आती थीं. इसी असुविधा को दूर करने के लिए उन्होंने दिल्ली का घर बेचा और गाजियाबाद शिफ्ट हो गए. राज नगर एक्सटेंशन के फ्लैट में रहने से उन्हें हरीश की देखभाल और परिवहन में काफी आसानी हुई.

18 वर्षों का अटूट विश्वास

लवली दीदी ने पुष्टि की कि यह परिवार करीब 18 सालों से संस्थान से जुड़ा है और पिछले 5 सालों से गाजियाबाद केंद्र में सक्रिय है. उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में भी परिवार ने अपना धैर्य और आध्यात्मिक विश्वास बनाए रखा है. वर्तमान में जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह एक परिवार की उस चरम पीड़ा का प्रतिबिंब है, जहां शारीरिक कष्ट और भावनात्मक लगाव के बीच संघर्ष चल रहा है. संस्थान इस घड़ी में परिवार के साथ खड़ा है.

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