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पिता की लिव-इन पार्टनर, 3 शादियां और कोरियन ऐप्स... गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड केस की जांच में जुड़ीं नई कड़ियां

गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की मौत के मामले में जांच के दौरान अब साल 2015 का एक सुसाइड केस भी सामने आया है, जिसमें पिता की लाइव-इन पार्टनर की मौत हुई थी. पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों के बीच फिलहाल संबंध नहीं है, लेकिन पारिवारिक पृष्ठभूमि और हालात को समझने के लिए पुरानी फाइलों को भी खंगाला जा रहा है.

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तीनों बहनों के पिता की लिव इन पार्टनर ने किया था सुसाइड. (Photo: ITG)
तीनों बहनों के पिता की लिव इन पार्टनर ने किया था सुसाइड. (Photo: ITG)

गाजियाबाद की एक हाईराइज बिल्डिंग की नौवीं मंजिल से तीन बहनों के कूदकर जान देने की घटना ने झकझोर दिया है. इस मामले की जांच में अब कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. तीन नाबालिग बहनें, एक सुसाइड नोट, मोबाइल फोन को लेकर नाराजगी और भावनात्मक टूटन. लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इस परिवार से जुड़ी कई बातें सामने आ रही हैं. इस केस के बीच साल 2015 में आत्महत्या के मामले का पता चला है, जिसमें तीनों बहनों के पिता की लिव-इन पार्टनर की मौत हुई थी.

जांच अधिकारी अब 2015 से 2026 तक की पूरी फैमिली टाइमलाइन जोड़कर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि बंद दरवाजों के पीछे आखिर ऐसा क्या चल रहा था, जिसने तीन मासूम जिंदगियों को इस कदर निराश कर दिया.

गाजियाबाद की भारत सिटी सोसायटी की उस रात को याद करने वाले लोग कहते हैं कि सब कुछ सामान्य लग रहा था. किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में एक ऐसा हादसा होने वाला है, जो पूरे इलाके को स्तब्ध कर देगा.

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16, 14 और 12 साल की उम्र की तीन बहनें अपने कमरे में थीं, जो रात में बिल्डिंग से कूद गईं. बाद में कमरे से एक सुसाइड नोट मिला, एक नौ पन्नों की पॉकेट डायरी मिली, और कई सवाल भी. पुलिस के मुताबिक, नोट में लड़कियों ने अपने पिता को संबोधित किया था. उसमें मां का जिक्र नहीं था.

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अधिकारियों का कहना है कि इससे संकेत मिलता है कि बच्चियां भावनात्मक रूप से पिता से अधिक जुड़ी थीं. इस घटना के बाद से परिवार, सोसायटी और जांच एजेंसियों के बीच लगातार पूछताछ और पड़ताल चल रही है.

मोबाइल फोन से शुरू हुआ तनाव

पुलिस जांच में अहम बिंदु मोबाइल फोन को लेकर सामने आया है. अधिकारियों के अनुसार, पिता ने बेटियों के मोबाइल फोन कुछ समय पहले ले लिए थे. वजह बताई गई - कोरियन ऐप्स, ऑनलाइन गेम्स और विदेशी दोस्तों से बढ़ता संपर्क. बताया गया कि पिता को यह डिजिटल एक्टिविटी ठीक नहीं लगी.

उन्होंने फोन ले लिए और बाद में बेच भी दिए. घटना वाली रात लड़कियों ने अपनी मां का फोन इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन जिन कोरियन ऐप्स तक वे पहुंचना चाहती थीं, वे उसमें मौजूद नहीं थे.

यह भी पढ़ें: 'कोरियन ऐप का अब तक नहीं मिला कोई सबूत, हां डायरी में...', गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड केस में बोली पुलिस

डीसीपी निमिष पाटिल के अनुसार, फॉरेंसिक जांच में मां के फोन में उन ऐप्स का कोई डेटा नहीं मिला. साइबर टीम अब बेचे गए फोन के IMEI नंबर के ज़रिए खरीदारों तक पहुंचने और पुराना डिजिटल डेटा रिकवर करने की कोशिश कर रही है. मामले की जांच से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि डिजिटल एक्टिविटी की बातें और पारिवारिक बयानों के बीच बड़ा गैप दिख रहा है.

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2015 का मामला फिर चर्चा में क्यों?

तीन बहनों की मौत के बाद जांच जब आगे बढ़ी तो पुलिस रिकॉर्ड में एक पुराना केस फिर सामने आ गया. साल 2015 में तीनों लड़कियों के पिता की लिव-इन पार्टनर की मौत हुई थी. वह राजेंद्र नगर कॉलोनी साहिबाबाद क्षेत्र के एक फ्लैट की छत से गिरने से मृत पाई गई थी. 

डीसीपी (ट्रांस हिंडन) निमिष पाटिल ने बताया कि उस समय मौत को पहले संदिग्ध माना गया था, लेकिन बाद की जांच में इसे आत्महत्या बताकर केस बंद कर दिया गया था.

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अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उस पुराने केस और तीन बहनों की मौत के बीच कोई संबंध है, लेकिन पारिवारिक पृष्ठभूमि को समझने के लिए उस घटना को भी जांच के दायरे में रखा गया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब एक ही परिवार में अलग-अलग समय पर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो पूरी पारिवारिक और सामाजिक संरचना को देखकर आगे बढ़ते हैं.

तीन शादियां, जटिल फैमिली सिस्टम

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में पता चला है कि तीनों बहनों के पिता की तीन पत्नियां हैं. तीनों आपस में सगी बहनें हैं. यह असामान्य फैमिली स्ट्रक्चर भी जांच का हिस्सा है.

अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या घरेलू माहौल, रिश्तों की जटिलता या भावनात्मक असंतुलन का बच्चों की मानसिक स्थिति पर असर पड़ा. एक अधिकारी ने कहा कि हम यह देख रहे हैं कि घर का वातावरण बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए कितना सहायक या दबावपूर्ण था.

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सुसाइड नोट और डायरी क्या बता रही है?

तीनों बहनों के कमरे से मिला सुसाइड नोट और नौ पन्नों की डायरी अब फॉरेंसिक लैब में है. हैंडराइटिंग, फिंगरप्रिंट और इंक टेस्ट कराए जा रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार, नोट में तनाव, निराशा और पिता को संबोधित बातें हैं. हालांकि पुलिस ने नोट की पूरी बातें सार्वजनिक नहीं की हैं. जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि क्या यह कदम अचानक उठाया गया या काफी समय से मानसिक दबाव बन रहा था.

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महिला आयोग ने क्या कहा?

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह ने तीनों बहनों के परिवार से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि मामला केवल मोबाइल या ऐप्स तक सीमित नहीं लगता. उनके अनुसार, प्राथमिक संकेत बताते हैं कि बच्चों पर पढ़ाई का दबाव और माता-पिता की लापरवाही दोनों हो सकते हैं. बच्चों की मानसिक स्थिति को समय रहते समझा नहीं गया. महिला आयोग ने जिला प्रशासन और पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

पुलिस की जांच हर एंगल पर

फिलहाल पुलिस इस केस को आत्महत्या मानकर जांच कर रही है, लेकिन हर पहलू की पुष्टि के लिए साइबर, फॉरेंसिक और मनोवैज्ञानिक एंगल से पड़ताल जारी है.

जांच के मुख्य बिंदुओं में डिजिटल एक्टिविटी और ऑनलाइन कॉन्टैक्ट, पारिवारिक संबंध और घरेलू माहौल, सुसाइड नोट और डायरी एनालिसिस,पुराने केस की पृष्ठभूमि, सामाजिक सर्कल से इनपुट शामिल हैं. डीसीपी पाटिल ने कहा कि हम किसी निष्कर्ष पर जल्दबाज़ी में नहीं पहुंचेंगे. सभी सबूतों और रिपोर्ट्स के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. 

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लोगों का कहना है कि तीन बहनों की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है. क्या हम अपने बच्चों की चुप्पी को सुन पा रहे हैं? क्या डिजिटल बिहेवियर के पीछे छिपी भावनात्मक जरूरतों को समझ रहे हैं?

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(एजेंसी के इनपुट के साथ)
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