
Uttar Pradesh News: सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज में राप्ती नदी के तट पर धर्म रक्षा मंच द्वारा आयोजित 'राम राम दंगल' के दौरान पूर्व बीजेपी विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने विवादित बयान दिया है. इसका वीडियो अब वायरल हो रहा है. यह घटना 18 जनवरी की है, जब भारत और नेपाल के पहलवानों के बीच किसी बात को लेकर मारपीट हो गई थी.
दरअसल, विवाद शांत कराने पहुंचे पूर्व विधायक को जब किसी ने बताया कि मुस्लिम पहलवान ने लड़ाई शुरू की है, तो उन्होंने मंच से सरेआम 'खतना' चेक करने की बात कह डाली. इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद थानाध्यक्ष का नाम लेते हुए कहा कि वे खतना चेक करने के लिए ही हैं.
मारपीट के बीच विवादित टिप्पणी
दंगल के अंतिम दिन जब पहलवानों के दो गुट आपस में भिड़ गए, तो पूर्व विधायक माइक लेकर उन्हें समझाने पहुंचे थे. तभी भीड़ में से किसी ने मुस्लिम पहलवान का नाम लिया, जिस पर राघवेंद्र सिंह ने कहा, "ओझा जी, कोई मुसलमान हो तो उसका खतना चेक कीजिये." उन्होंने रेफरी और जनता के सामने बार-बार इस बात को दोहराया. इस दौरान मंच पर मौजूद रेफरी भी एक नेपाली पहलवान से उसके धर्म को लेकर सवाल करता नजर आया.
पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान
राघवेंद्र प्रताप सिंह का यह पहला विवादित बयान नहीं है; वे पहले भी कई बार अल्पसंख्यकों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर चुके हैं. इस बार उन्होंने पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में ऐसी बात कही, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया है. वीडियो में वे साफ तौर पर थानाध्यक्ष का जिक्र करते हुए खतना चेक करने की बात कह रहे हैं. 2022 से लगातार आयोजित हो रहे इस दंगल में इस साल भारी संख्या में दर्शक मौजूद थे.

सफाई में कही ये बात
पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने वायरल बयान पर कायम रहते हुए कहा कि 'राम-राम दंगल' एक अत्यंत पवित्र आयोजन है, जहां बजरंगबली की पूजा होती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि दंगल में मांस खाने वालों और विशेष रूप से मुस्लिम पहलवानों का प्रवेश प्रतिबंधित है. राघवेंद्र सिंह के अनुसार, 2024 में भी मांस की मांग को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद उन्होंने मुसलमानों के आने पर रोक लगा दी थी.
हालिया घटना पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि हरिद्वार के एक पहलवान को कुछ लोग साजिश के तहत मार रहे थे. जब भीड़ से उनके मुस्लिम होने की बात उठी, तब उन्होंने 'जांच' और 'खतना' चेक करने की बात कही थी. पूर्व विधायक ने तर्क दिया कि दुर्व्यवहार के कारण ही इन्हें डांडिया जैसे खेलों में भी प्रतिबंधित किया जा रहा है. पूर्व विधायक ने दो टूक कहा कि वे अपने बयान पर अडिग हैं और भविष्य में भी किसी मुस्लिम पहलवान को दंगल में अनुमति नहीं दी जाएगी.