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'नोएडा डीएम CEC ज्ञानेश कुमार की बेटी...', युवराज केस में एक्शन पर सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल

नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद योगी सरकार की कार्रवाई पर सियासत तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी ने अधिकारियों के ट्रांसफर को दिखावा बताते हुए नोएडा डीएम मेधा रूपम को प्रशासनिक संरक्षण देने का आरोप लगाया है, जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं.

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इंजीनियर की मौत मामले में यूपी सरकार ने नोएडा अथॉरिटी पर कार्रवाई की है.
इंजीनियर की मौत मामले में यूपी सरकार ने नोएडा अथॉरिटी पर कार्रवाई की है.

उत्तर प्रदेश के नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने प्रशासनिक लापरवाही और रेस्क्यू सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है. 16-17 जनवरी की रात घने कोहरे के बीच युवराज की कार सेक्टर-150 स्थित एक निर्माणाधीन स्थल पर पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई. आरोप है कि मौके पर प्रशासन और रेस्क्यू टीम की मौजूदगी के बावजूद समय रहते उन्हें नहीं बचाया गया. इस हादसे के बाद यूपी सरकार ने कार्रवाई करते हुए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को निलंबित कर दिया, लेकिन इस कदम पर आम आदमी पार्टी ने सवाल खड़े किए हैं.

आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सरकार की कार्रवाई को महज औपचारिक बताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि आईएएस अधिकारियों का हर कुछ साल में ट्रांसफर होना कोई सख्त कार्रवाई नहीं मानी जा सकती. भारद्वाज ने नोएडा की डीएम मेधा रूपम पर सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है.

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AAP नेता ने कहा, "नोएडा की DM मेधा रूपम ही असल में SDRF और रेस्क्यू ऑपरेशन की जिम्मेदार हैं, लेकिन उन्हें बचाया जा रहा है." एक अन्य पोस्ट में सौरभ भारद्वाज ने लिखा, "नोएडा की DM, जिनके अंडर रेस्क्यू ऑपरेशन और SDRF आते हैं, ECI ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं. ऐसे में आप सोच सकते हैं कि भ्रष्ट IAS अधिकारियों पर केस चलाना कितना मुश्किल है. दोषी ठहराना तो दूर, पूरा सिस्टम ही खराब है."

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सीएम योगी ने नोएडा अथॉरिटी के CEO को पद से हटाया

इंजीनियर के साथ हुई इस घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे. 19 जनवरी को नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम को पद से हटाकर वेटलिस्ट पर डाल दिया गया. साथ ही उन्हें नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी पद से भी हटा दिया गया. सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया है, जो पांच दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. इनके अलावा एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया गया है और ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़े अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं.

कैसे हुई इंजीनियर युवराज मेहता की मौत?

16-17 जनवरी की रात युवराज अपने गुरुग्राम स्थित ऑफिस से सेक्टर-150 स्थित घर लौट रहे थे. घने कोहरे और बेहद कम विजिबिलिटी के कारण उनकी मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा अनियंत्रित होकर टूटी हुई बाउंड्री वॉल से टकराते हुए 30 से 70 फीट गहरे, पानी से भरे खुदाई वाले गड्ढे में गिर गई.

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saurabh bharadhwaj

जान बचाने के लिए युवराज किसी तरह डूबती कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर चढ़ गए, जहां वे करीब 90 से 120 मिनट तक फंसे रहे. इस दौरान उन्होंने अपने पिता को फोन कर मदद की गुहार लगाई और मोबाइल की टॉर्च जलाकर इशारे करते रहे, कहते रहे, "पापा, मुझे बचा लो." इस दौरान वहां पुलिस और रेस्क्यू टीम मौजूद थी, लेकिन किसी ने उन्हें बचाने की हिमाकत नहीं की.

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इंजीनियर युवराज मेहता की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह एस्फिक्सिया यानी दम घुटना और कार्डियक अरेस्ट बताई गई है. इस हादसे ने नोएडा अथॉरिटी और जिला प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर उस स्थिति में जब इलाके में निर्माण कार्य चल रहा था और सुरक्षा इंतजाम नाकाफी थे. पुलिस और रेस्क्यू टीम की मौजूदगी के बावजूद युवक की जान न बच पाना सिस्टम की बड़ी विफलता मानी जा रही है.

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