UP News: हाथरस में हुई भगदड़ के बाद सुर्खियों में आया सूरजपाल उर्फ नारायण साकार हरि (Narayan Saakar Hari alias Bhole Baba) बेहद शातिर दिमाग है. बाबा सोशल मीडिया से बिल्कुल दूर रहता है. भक्तों को सत्संग में मोबाइल नहीं लाने दिया जाता. किसी के वीडियो बनाने पर भी पाबंदी रहती है. बाबा ने अपने आश्रम को भी लोगों की नजरों से बचाकर रखा है. जीटी रोड के किनारे करोड़ों की जमीन पर बना आश्रम सारी सुख सुविधाओं से लैस है.
जो बाबा अपने ही भक्तों के बीच सत्संग के लिए जाने पर निजी सुरक्षा गार्ड्स के साथ चलता हो, गाड़ियों का काफिला, सिक्योरिटी में चलता हो, उस बाबा के आश्रम पर कोई सीसीटीवी नहीं लगा है. यह जानकर ताज्जुब होता है कि बाबा के पूरे आश्रम में कहीं पर भी सीसीटीवी नहीं है. ना ही गेट पर, न ही बाउंड्री पर सीसीटीवी कैमरे हैं.
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सुनसान इलाके में बनी इस कोठी पर सीसीटीवी का न लगा होना कई सवाल खड़े करता है. आखिर बाबा सीसीटीवी की निगरानी से क्यों बचना चाहता है? क्या आश्रम में आने जाने वाले किसी नजर में ना आएं, इसके लिए सीसीटीवी नहीं लगे? या फिर बाबा के आश्रम के अंदर ऐसा कुछ है, जो बाबा दुनिया के सामने नहीं आने देना चाहता?

हाथरस हादसे के दो दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं
बता दें कि हाथरस में सत्संग के दौरान हुई भगदड़ में 121 लोगों की जान चली गई. इस मामले में आयोजकों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है. हाथरस हादसे के दो दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. पुलिस की पांच टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी हैं.
बाबा की छह आश्रमों में तलाश की जा रही है. एफआईआर में बाबा को आरोपी नहीं बनाया गया है. इस मामले में मुख्य सेवादार देव प्रकाश मधुकर पर केस दर्ज किया गया है. उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई है. सूरजपाल उर्फ भोले बाबा का अब तक अता पता नहीं है. सूरजपाल ने वकील के जरिए बयान दिया है.

घटना के बाद कब गायब हुआ था सूरजपाल?
घटनास्थल से 1 बजकर 40 मिनट पर बाबा गायब हो गया था. इस दौरान बाबा ने घटना के मुख्य आरोपी देव प्रकाश मधुकर से फोन पर बात की थी. इसके बाद 4 बजकर 35 मिनट पर बाबा का फोन ऑफ हो गया. उसके बाद बाबा कहां गया और देव प्रकाश मधुकर कहां है, इसके बारे में पुलिस को कोई जानकारी नहीं है.
दर्शन करने आश्रम पहुंच रहे बाबा के भक्त
सूरज पाल उर्फ नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के भक्तों को हाथरस में हुए हादसे की जानकारी है. इसके बावजूद बाबा के भक्त पूरी आस्था रखते हैं. गुरुवार को मैनपुरी के बिछवा स्थित बाबा के आश्रम पर मीडिया और पुलिस का जमावड़ा था. इस दौरान बाबा के भक्त भी आश्रम के दर्शन करने फरीदाबाद तक से आ रहे हैं.

एक भक्त प्रेमचंद कहते हैं कि वह 2 जुलाई को हाथरस के सिकंदरा राव में सत्संग में मौजूद थे. वह लोगों को बाबा से मिलने के लिए मना कर रहे थे. प्रेमचंद ने कभी बाबा के चरणों की रज को खुद तो नहीं लगाया, लेकिन कहते हैं कि लोग उनकी पैरों की धूल को घर ले जाते हैं, यह उनका बाबा के लिए विश्वास है.
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बाबा के पास अकूत संपत्ति और मैनपुरी में करोड़ों का आश्रम कहां से आया, सवाल किया गया तो प्रेमचंद कहते हैं कि यह तो बाबा के भक्तों ने उन्हें दान में दे दिया है. बाबा तो अपनी पेंशन से दाल रोटी खाते हैं. किसी से पैसा भी नहीं लेते, ना ही किसी को अपने पैर छूने देते हैं.
प्रेमचंद कहते हैं कि बाबा ने कभी भक्तों से कहा ही नहीं कि उनके चरणों की धूल ले लो, भक्त अपने आप ही उनकी भक्ति में लीन होकर जान देने के लिए उनके चरणों की रज उठाने दौड़ जाते हैं और जान गंवा देते हैं.