उत्तर प्रदेश के बांदा में हत्या के इरादे से गोली चलाने वाले सिपाही चंदन प्रसाद और उसके बेटे को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. साथ ही कोर्ट ने दोनों पर 33-33 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. दोषी जमानत पर थे, जिन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है.
सिपाही घटना के बाद विभागीय कार्रवाई में बर्खास्त हुआ था. पैलानी थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत डांडा मऊ चौकी पुरवा में 18 अक्टूबर 2014 को खुली बैठक के दौरान हल्का लेखपाल शिव प्रसाद गांव के अयोध्या पुत्र मनुवा के दरवाजे पर आठ व्यक्तियों के साथ बैठकर खतौनी तस्दीक कर रहे थे.
इसी दौरान सिपाही शराब के नशे में आया और हंगामा करने लगा. मना करने पर पुलिस में होने का रौब झाड़ने लगा और गाली गलौच करने लगा. इसके बाद उसने अपने बेटे से बंदूक मांगवा कर फायर कर दिया.
लेखपाल ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट
इससे अयोध्या प्रसाद के पेट में गोली लगी और वह घायल हो गया. कानपुर में उसका इलाज कराया गया. आरोपी ने दूसरा फायर भी किया. लेकिन अन्य लोग बाल-बाल बच गए. चश्मदीद हल्का लेखपाल ने चंदन और उसके दो बेटे शैलेंद्र और एक अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई.
मामले में विभागीय जांच के बाद सिपाही को बर्खास्त कर दिया गया था. आज करीब 8 साल 8 महीने बाद मामले का फैसला अदालत ने सुनाया. न्यायाधीश ने तमाम दलीलों के बाद आरोपी सिपाही और उसके बेटे को उम्रकैद की सजा सुनाई.
मामले में पेश किए गए थे 7 गवाह
जज का कहना था कि सिपाही को कानून की जानकारी होने के बावजूद उसने इस घटना को अंजाम दिया. इसलिए उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए. कोर्ट ने सजा के बाद दोषियों को जेल भेजने के आदेश दिए. आरोप चार्ट बनने के बाद कोर्ट में अभियोजन की तरफ से सरकारी अधिवक्ता सुशील तिवारी और श्रवण कुमार ने 7 गवाह पेश किए.
वादी की तरफ से उनके अधिवक्ता ने बहस की और तमाम सबूत पेश किए. कोर्ट ने सिपाही को दोषी पाते हुए सख्त रुख अपनाया. जज ने आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. साथ ही 33-33 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माने की दो तिहाई धनराशि पीड़ित को देने के भी आदेश भी दिया गया है.
मामले में 200 तारीखें पड़ीं, पांच जज भी बदल गए
2014 के मामला के बाद 8 साल और 8 माह बाद मामले का फैसला आया है. मामले में करीब 200 तारीखें पड़ीं साथ ही 5 जज भी बदल गए. अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम (ADJ) मो. कमरुज्जमा की अदालत ने पूरा मामला बिस्तार से बताते हुए 49 पन्ने का फैसला सुनाया है.
साथ ही कहा कि आरोपी पुलिस विभाग से जुड़ा है, उसे कानून का भी ज्ञान था. जानकारी के बावजूद भी उसने घटना को अंजाम दिया है, जो माफी के योग्य नहीं है. इसलिए उसे अधिक से अधिक सजा दी जानी चाहिए, जिससे समाज में ऐसी घटनाएं और न हों. न्यायाधीश ने तुरंत आरोपियों को जेल भेजने के आदेश जारी किए.
पीड़ित ने कहा- कोर्ट ने उसके साथ किया न्याय
वादी अयोध्या ने बताया कि उनके साथ कोर्ट ने न्याय किया है. मुझे तो लग रहा था पुलिस का आदमी है, सिपाही है. इसका क्या होगा? जबकि सब कुछ पुलिस को करना था. मगर, कोर्ट में जज साहब ने न्याय किया. पीड़िता और उसका पूरा परिवार इस फैसले से खुश है.
कोर्ट के सरकारी अधिवक्ता सुशील कुमार तिवारी और श्रवण कुमार ने बताया कि मामला साल 2014 का था. इसमें एक सिपाही ने गांव के एक व्यक्ति पर गोली मारी थी, जो घायल हो गया था. इसके बाद लेखपाल की शिकायत पर केस दर्ज किया गया था.
आरोप पत्र के बाद कोर्ट में हमने 7 गवाह पेश किए. इसके बाद आज न्यायाधीश ने आरोपी सिपाही और उसके बेटे को उम्रकैद की सजा सुनाई है. साथ ही 33- 33 हजार जुर्माना भी लगाया है. जिला शासकीय अधिवक्ता बृज बहादुर सिंह परिहार, कमल सिंह, मनीज दीक्षित, विमल सिंह आदि ने कोर्ट के इस फैसले पर खुशी जताई है.