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'कुर्सी के डर से जो नोएडा नहीं आए...', जेवर एयरपोर्ट पर नहीं थम रही रार, अब CM योगी का अखिलेश पर वार

CM योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव का नाम लिए बिना उन पर सीधा हमला बोलते हुए सवाल किया कि जो नेता मुख्यमंत्री रहते हुए कुर्सी जाने के डर से कभी नोएडा नहीं आए, उन्हें आज विकास पर बात करने का क्या हक है?

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UP में जेवर के उद्घाटन के बाद गरमाई सियासत.(Photo:Screengrab)
UP में जेवर के उद्घाटन के बाद गरमाई सियासत.(Photo:Screengrab)

जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के ठीक एक दिन बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव के उस पुराने 'अंधविश्वास' की याद दिलाई, जिसके चलते वे मुख्यमंत्री रहते हुए कभी नोएडा नहीं आए थे. दरअसल, UP के राजनीतिक हलकों के कुछ वर्गों में यह अंधविश्वास है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा का दौरा करता है, वह अपनी सत्ता गंवा देता है.

योगी आदित्यनाथ ने कहा, "ये वे लोग हैं जो अंधविश्वासों में विश्वास रखते हैं और जिन्होंने भारत की आस्था पर उंगली उठाने की हिम्मत की? मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करते हुए उन्होंने कभी उस जगह का दौरा नहीं किया."

आदित्यनाथ ने कहा, "फिर भी आज विभाजनकारी राजनीति से प्रेरित होकर वे नोएडा और ग्रेटर नोएडा पहुंचे. उस समय, उन्होंने इस क्षेत्र के विकास में बाधा के रूप में काम किया और रुकावटें पैदा कीं. आज वे किस हक से विकास की बात करते हैं?" 

UP के मुख्यमंत्री की ये टिप्पणियां शनिवार को नोएडा में हुए इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एक दिन बाद आई हैं. उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी पिछली SP सरकार पर उसके कार्यकाल के दौरान 'नोएडा को लूट के लिए एक ATM में बदलने' का आरोप लगाते हुए निशाना साधा था और विपक्षी नेताओं पर 'अंधविश्वासों' के कारण नोएडा से दूर रहने का आरोप लगाया था.

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यह भी पढ़ें: '7 में से 6 नये एयरपोर्ट तो बंद...', अखिलेश यादव ने यूपी के हवाई अड्डों पर उठाए सवाल 

बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि BJP ने राज्य में 7 हवाई अड्डों का उद्घाटन किया है, लेकिन उनमें से 6 चालू नहीं हैं.

वहीं, रविवार को गौतम बुद्ध नगर जिले के दादरी में एक रैली में SP प्रमुख ने अपने कथित अंधविश्वास पर की गई टिप्पणियों को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जब वे मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने नोएडा का दौरा नहीं किया था.

₹200 करोड़ का प्रोजेक्ट ₹800 करोड़ में भी अधूरा

इसके अलावा, योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लखनऊ में जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (JPNIC) स्थापित करने की परियोजना का अनुमानित मूल्य 200 करोड़ रुपये था, लेकिन भारी-भरकम 800 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी, यह परियोजना अधूरी है.

आदित्यनाथ ने कहा, "यह समाजवादी पार्टी का विकास मॉडल है. एक परियोजना जिसका मूल अनुमान 200 करोड़ रुपये था, अंततः 800 करोड़ रुपये की हो गई. वे किस हिम्मत से विकास की बात करते हैं?" 

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 300 करोड़ रुपये थी, लेकिन इस पर 1400 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

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जेवर एयरपोर्ट से मिलेगा 1 लाख युवाओं को रोजगार 

जेवर एयरपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनाने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि UP की आबादी सबसे ज्यादा है. उन्होंने आगे कहा कि जब यह पूरी तरह से चालू हो जाएगा, तो इससे सीधे तौर पर 1 लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा.

2017 से पहले जहां शाम 5 बजे कर्फ्यू लगता था

CM ने आगे कहा, "यह एयरपोर्ट उस इलाके में बनाया गया है, जिसे 2017 से पहले न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश की 'क्राइम कैपिटल' के तौर पर जाना जाता था. वहां हर तरह के जघन्य अपराध आम बात थे. शाम 5 बजे के बाद हर तरह की हलचल थम जाती थी. सुबह 10 बजे तक वहां कर्फ्यू जैसा माहौल रहता था.

मुख्यमंत्री ने कहा, "और आज इस डबल-इंजन सरकार की रफ्तार और मजबूत इच्छाशक्ति की बदौलत महज 9 सालों के अंदर हमने उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के लिए निवेश का सबसे बेहतरीन ठिकाना बना दिया है."  

UP में बनेंगे अब 'सेमीकंडक्टर'

आदित्यनाथ ने कहा कि अब देश और दुनिया की हर बड़ी संस्था यहां आना चाहती है. आज के जमाने में पूरी दुनिया सेमीकंडक्टर के बिना अधूरी है. जिस तरह दुनिया तेल के बिना अधूरी महसूस करती है, ठीक उसी तरह सेमीकंडक्टर के बिना भी दुनिया अधूरी है और अब, ये सेमीकंडक्टर उत्तर प्रदेश में बनाए जाएंगे.

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बीमारू राज्य से 'Revenue Surplus' तक का सफर

CM ने कहा, "क्या 2017 से पहले कोई इसकी कल्पना भी कर सकता था? क्यों? 2017 से पहले ये सारे काम क्यों नहीं हो पाए? क्योंकि तब न तो कोई सोच थी और न ही कोई इच्छाशक्ति... वे पहले ये काम करना ही नहीं चाहते थे. आज भी उनमें वह इच्छाशक्ति नहीं है. इसके बजाय, वे उन कामों में रुकावट डाल रहे हैं, जो अभी किए जा रहे हैं."

'वेतन देने के पैसे नहीं थे'

आदित्यनाथ ने कहा कि जो राज्य कभी बीमारू माना जाता था, वह अब भारत की अर्थव्यवस्था का 'ग्रोथ इंजन' बन चुका है. एक ऐसा राज्य, जिसके पास कर्मचारियों की तनख्वाह देने के लिए भी पैसे नहीं होते थे, आज उसके पास राजस्व का सरप्लस (बचत) मौजूद है. देश का सबसे ज़्यादा आबादी वाला राज्य होने के बावजूद, प्रति व्यक्ति आय के मामले में यह सबसे निचले पायदान पर था यानी, सबसे नीचे के 5-6 राज्यों में से एक था. और आज वही राज्य देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन चुका है.

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