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ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद सीएम योगी ने ली बैठक, सभी 75 जिलों के लिए जारी हुए आदेश 

ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सभी मंत्रियों और पार्टी के सांसदों, विधायकों, एमएलसी, पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों के साथ एक वर्चुअल बैठक की है. सभी को जिम्मेदारी दी गई कि  इस एक महीने में अधिक मतदाताओं का रजिस्ट्रेशन करें

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (FIle Photo: ITG)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (FIle Photo: ITG)

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होते ही  राजनीतिक दल एक्टिव मोड में आ गए हैं. एक ओर जहां निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के बाद लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर नए मतदाताओं को जोड़ने और कटे हुए नामों को दोबारा शामिल कराने के लिए राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है. खासतौर पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस एक महीने को बेहद अहम मानते हुए संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर जिम्मेदारियां तय कर दी हैं.

ड्राफ्ट मतदाता सूची के सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ है. इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी और सरकार के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक वर्चुअल बैठक कर आगे की रणनीति तय की. बैठक में राज्य सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, एमएलसी, संगठन के पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अगले एक महीने में अधिक से अधिक मतदाताओं का रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित कराया जाए.

भाजपा नेतृत्व की ओर से यह संदेश साफ तौर पर दिया गया है कि इस अभियान में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पार्टी का फोकस तीन प्रमुख वर्गों पर रखा गया है पहला, नए युवा मतदाता जो उम्र पूरी होने के बावजूद अब तक वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए हैं; दूसरा, वे मतदाता जिनके नाम दस्तावेजों की कमी या तकनीकी त्रुटियों के कारण सूची से हट गए हैं; और तीसरा, ऐसे मतदाता जिनका पता सत्यापन के दौरान नहीं मिल पाया या जिनकी मैपिंग नहीं हो सकी.

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मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जारी किए आंकड़े 

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने आंकड़े साझा किए, जिसने सियासी हलकों में हलचल और तेज कर दी. उनके मुताबिक SIR प्रक्रिया के बाद प्रदेश भर में कुल 2.89 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. अकेले राजधानी लखनऊ में सबसे ज्यादा 12 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं. इसके बाद प्रयागराज दूसरे स्थान पर है, जहां 11.56 लाख नाम सूची से हटाए गए हैं.

आंकड़ों के अनुसार कानपुर नगर में करीब नौ लाख, आगरा में 8.36 लाख, गाजियाबाद में 8.18 लाख और बरेली में 7.14 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं. मेरठ में 6.65 लाख, गोरखपुर में 6.45 लाख, सीतापुर में 6.23 लाख और जौनपुर में 5.89 लाख नाम कटे हैं. निर्वाचन आयोग की ओर से यह भी बताया गया है कि नए वोटर जोड़ने की प्रक्रिया लगातार जारी है. अब तक 15 लाख से अधिक लोगों ने फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया है. इनमें बड़ी संख्या युवा मतदाताओं की है, जो पहली बार वोटर बनने जा रहे हैं.

SIR प्रक्रिया के तहत 75 जिलों में वोट कटे हैं और कई जिलों में यह प्रतिशत काफी ज्यादा रहा है. सहारनपुर में 16.37 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर में 16.29 प्रतिशत, मेरठ में 24.65 प्रतिशत और गाजियाबाद में 28.83 प्रतिशत वोट कटे हैं. बुलंदशहर में 15.14 प्रतिशत, गौतमबुद्ध नगर में 23.98 प्रतिशत, बागपत में 18.15 प्रतिशत और आगरा में 23.25 प्रतिशत वोट कटने की बात सामने आई है.  पश्चिमी यूपी के अलावा मध्य और पूर्वांचल में भी आंकड़े चौंकाने वाले हैं. अलीगढ़ में 18.60 प्रतिशत, मथुरा में 19.19 प्रतिशत, फिरोजाबाद में 18.13 प्रतिशत, मैनपुरी में 16.17 प्रतिशत और एटा में 16.80 प्रतिशत वोट कटे हैं. हाथरस में 16.30 प्रतिशत, बरेली में 20.99 प्रतिशत और बदायूं में 20.39 प्रतिशत वोट कटने से स्थानीय राजनीति गरमा गई है.

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कानपुर नगर में 25.50 प्रतिशत, प्रयागराज में 24.64 प्रतिशत और लखनऊ में 30.04 प्रतिशत वोट कटने के आंकड़े सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. पूर्वांचल और बुंदेलखंड में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है. वाराणसी में 18.18 प्रतिशत, जौनपुर में 16.51 प्रतिशत, गाजीपुर में 13.85 प्रतिशत और चंदौली में 15.45 प्रतिशत वोट कटे हैं. मिर्जापुर और सोनभद्र में करीब 18 प्रतिशत, भदोही में 16.73 प्रतिशत और आजमगढ़ में 15.25 प्रतिशत वोट कटने की जानकारी दी गई है. बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा और बांदा जिलों में भी हजारों नाम सूची से हटे हैं. वहीं अवध क्षेत्र में सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, गोंडा, बहराइच और बलरामपुर जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में मतदाता सूची से बाहर हुए हैं. बलरामपुर में 25.98 प्रतिशत और बहराइच में 20.44 प्रतिशत वोट कटने का आंकड़ा खासा चौंकाने वाला है.

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