धर्म और पहचान के सवाल अक्सर निजी आस्था से आगे बढ़कर सार्वजनिक बहस का रूप ले लेते हैं. इन दिनों ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दो मुस्लिम महिलाएं बुर्का पहने कांवड़ उठाए दिखाई दे रही हैं. बताया जा रहा है कि वे शिव मंदिर में जलाभिषेक करने जा रही थीं. वीडियो सामने आते ही जहां कुछ लोगों ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बताया, वहीं कई यूजर्स ने धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए.
वीडियो के वायरल होने के बाद बरेली से ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजबी का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि इन दिनों बुर्का पहने महिलाओं का कांवड़ यात्रा में शामिल होने का मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग शरियत के नजरिये से इसका हुक्म जानना चाहते हैं.
मौलाना रजबी ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि इस्लाम में शरियत की रोशनी में यह सीधा हुक्म है कि कोई भी मुसलमान- चाहे वह पुरुष हो या महिला, दूसरे मजहब के धार्मिक त्योहारों या अनुष्ठानों को नहीं अपना सकता. उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरी कौम की शक्ल या सूरत अपनाता है तो उसकी गिनती उसी कौम में की जाएगी. उनके मुताबिक कांवड़ यात्रा में भाग लेना या जलाभिषेक जैसे धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होना मुसलमानों के लिए नाजायज और सख्त गुनाह है.
उन्होंने संबंधित महिलाओं और मुस्लिम समाज से अपील की कि ऐसे कदम न उठाएं जिससे समुदाय की बदनामी हो. मौलाना ने कहा कि गुनाह से बचना और तौबा करना ही बेहतर रास्ता है तथा भविष्य में इस तरह की गतिविधियों से परहेज किया जाना चाहिए.