यूपी के बांदा में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने ऐसा बयान दिया है कि सुर्खियों में आ गया. उन्होंने कहा कि जिस दिन तिरंगे में चांद आ गया, उस दिन न तो शर्मा बचेंगे न वर्मा बचेंगे, न क्षत्रिय बचेंगे, न रैदास वाले बचेंगे. धीरेंद्र कृष्ण यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि न तुलसी दास वाले बचेंगे न अगड़ा बचेगा ना पिछड़ा बचेगा. इसका सबसे बड़ा उदाहरण बांग्लादेश है. जहां एक-एक विधवा से 40-40 लोगों ने रेप किया. इसलिए कास्टवाद नहीं देश मे राष्ट्रवाद होना चाहिए.
हमारा परिचय जाति से नहीं, हिंदू से होना चाहिए
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस काल में वही व्यक्ति सफल है, वही ताकतवर है, उसी की सत्ता है, वही बच सकता है जो एकजुट है. मुसलमानों में 72 फिरके हैं, पठान, खान, सिया, सुन्नी मगर उनके मजहब पर बात आती है तो वो सिर्फ मुसलमान हैं. हमारे भारत में 9 राज्यों में हिंदूओं की घटती हुई आबादी इस बात का सूचक है कि की हम हिंदू हैं, मगर हम एक नहीं हो पाए.
हिंदू विचारधारा वाले लोगों के अलावा किसी भी हिंदू से अगर पूछो तो वह या तो अपने को वर्मा बताता है या शर्मा बताता है या फिर पंडित बताता है या अन्य. मगर मेरी सबसे प्रार्थना है कि हमारा परिचय जाति से नहीं हिंदू से होना चाहिए.
चच्चे के 30-30 बच्चे तो हिंदुओं के 4 क्यों नहीं?
हिंदुओं को बचाने का एकमात्र यही रास्ता है कि हिंदुओं को अपनी जनसंख्या बढ़ानी चाहिए. जब चच्चे के 30-30 बच्चे हो सकते हैं तो हिंदुओं के क्यों नहीं? इसलिए हिंदुओं के बेटे 4 यही लगाएंगे बेड़ा पार. 2 बच्चे घर के लिए, 1 बच्चा स्वयं सेवक संघ के लिए व 1 बच्चा हिंदू राष्ट्र के लिए.
वर्तमान समय में हिंदुओं को बांटने की साजिश रची गई है. कास्टवाद ने हिंदुओं को खोखला कर दिया. इसलिए इस देश में कास्टवाद नहीं बल्कि राष्ट्रवाद चलना चाहिए.