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बनारस की मस्जिदों से गूंजी अमन की अजान, नमाजियों ने आतंकवाद के खिलाफ उठाई एकजुट आवाज

वाराणसी की मस्जिदों में जुमे की नमाज के दौरान आतंकवाद के खिलाफ विशेष दुआ मांगी गई. दारानगर की शिया जामा मस्जिद में सैकड़ों नमाजियों ने देश और सेना की सफलता के लिए प्रार्थना की. उन्होंने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और पाकिस्तान को सख्त सबक सिखाने की जरूरत है.

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सेना की सफलता के लिए मांगी दुआ.
सेना की सफलता के लिए मांगी दुआ.

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुई आतंकवादी घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया, जहां आतंकियों ने मासूमों को उनके धर्म के आधार पर चुन-चुनकर निशाना बनाया था. इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ पूरे देश में गुस्सा है, लेकिन साथ ही कई जगहों से ऐसे संदेश भी सामने आ रहे हैं जो आतंक के खिलाफ एकजुटता और भाईचारे की मिसाल पेश कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के वाराणसी से ऐसी ही एक मिसाल देखने को मिली.

दरअसल, आज शुक्रवार को बनारस की सभी प्रमुख मस्जिदों में जुमे की नमाज के दौरान विशेष दुआओं का आयोजन किया गया. नमाज के बाद सैकड़ों की संख्या में इकट्ठा हुए लोगों ने आतंकवाद के खात्मे, देश की सुरक्षा और सेना की कामयाबी के लिए अल्लाह से दुआ की. बनारस के दारानगर क्षेत्र स्थित शिया जामा मस्जिद में भी नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी. नमाज के बाद जब मौलवी ने आतंकवाद के खिलाफ विशेष दुआ कराई, तो पूरी मस्जिद ‘आमीन’ की गूंज से भर उठी.

वाराणसी

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मस्जिद में मौजूद नमाजियों ने कहा कि दहशतगर्दी का कोई मजहब नहीं होता. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसे देश जो आतंक को पनाह देते हैं, उन्हें सख्त जवाब मिलना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हो. लोगों ने सरकार से मांग की कि देश में हो रही आतंकी घटनाओं की गहन जांच हो और दोषियों को सख्त सजा दी जाए.

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वाराणसी

नमाजियों का कहना था कि मुसलमान होने के नाते वे किसी भी तरह की हिंसा, नफरत और आतंक के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि इस्लाम अमन और शांति का धर्म है और ऐसे वहशी हमलों का इससे कोई संबंध नहीं हो सकता. इस मौके पर मस्जिद के इमाम ने भी कहा, जो भी आतंकवाद फैलाता है, वह इस्लाम का दुश्मन है. अल्लाह के रसूल ने हमेशा अमन और इंसानियत का संदेश दिया है. बनारस की मस्जिदों से उठा यह पैग़ाम पूरे देश को एकजुटता, शांति और आतंक के खिलाफ साझा संघर्ष का संदेश दे रहा है.

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