अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एक वरिष्ठ महिला प्रोफेसर ने अपने विभागाध्यक्ष और डीन पर मौखिक और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं. प्रोफेसर का कहना है कि उनके कामकाज को जानबूझकर रोका गया और उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया. हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी शिकायतों पर नियमों के तहत निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की जा रही है.
राजनीति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर रचना कौशल ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने सितंबर 2025 में इस पूरे मामले की शिकायत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून से की थी. इसके बावजूद अब तक उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह विश्वविद्यालय के विजिटर को पत्र लिखेंगी और फिर अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगी.
वरिष्ठ महिला प्रोफेसर के गंभीर आरोप
प्रोफेसर रचना कौशल ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय रहते उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया होता तो वह इस मामले को सार्वजनिक नहीं करतीं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह मामला किसी साम्प्रदायिक या धार्मिक पूर्वाग्रह से जुड़ा नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी शिकायतों में कभी भी धार्मिक पहचान को उत्पीड़न का कारण नहीं बताया है.
उन्होंने कहा कि वह पिछले पच्चीस वर्षों से अधिक समय से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़ी हुई हैं और इस संस्थान को अपनी कर्मभूमि मानती हैं. उनका कहना है कि वह कभी भी विश्वविद्यालय की छवि खराब करने के लिए झूठे आरोप नहीं लगा सकतीं.
सितंबर 2025 में कुलपति से की गई थी शिकायत
हालांकि पीटीआई द्वारा एक्सेस की गई उनकी 22 सितंबर 2025 की लिखित शिकायत में यह उल्लेख है कि उन्हें उनकी धार्मिक पहचान के कारण परेशान किया जा रहा है. इस बिंदु को लेकर अब बयान और लिखित शिकायत के बीच अंतर भी सामने आया है.
वहीं विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने लापरवाही या मनमानी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. गुरुवार को जारी एक मीडिया बयान में एएमयू प्रशासन ने कहा कि प्रोफेसर द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लिया गया है और विश्वविद्यालय के नियमों और अधिनियमों के तहत सभी शिकायतों का निष्पक्ष समाधान किया जा रहा है.
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों को किया खारिज
राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नफीस अहमद अंसारी फिलहाल अलीगढ़ से बाहर हैं. संपर्क किए जाने पर उन्होंने कहा कि वह अलीगढ़ लौटने के बाद इन आरोपों पर अपना पक्ष रखेंगे. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में कई तरह की गलतफहमियां हैं, जिन्हें उनके लौटने के बाद स्पष्ट किया जाएगा. फिलहाल यह मामला विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.