नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में शव मिलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. मृतक के परिजनों ने इसे दहेज के लिए की गई हत्या बताया है, जबकि ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा ने आत्महत्या की है. फिलहाल, भोपाल पुलिस ने SIT का गठन कर दिया है और हत्या या आत्महत्या की गुत्थी सुलझाने में जुट गई है. इस बीच सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इस मामले में रिएक्ट किया है.
बकौल सपा मुखिया- 'उत्तर प्रदेश की एक बेटी की, मध्य प्रदेश के भोपाल में हुई दहेज 'हत्याकांड' की गंभीर जांच हो और पीड़ित पक्ष को न्याय मिले. जब दोनों राज्यों- एमपी और यूपी में भाजपा सरकारें हैं तो फिर कार्रवाई न करने का क्या कारण है. ये स्पष्ट किया जाए.'
आपको बता दें कि भोपाल के कटारा हिल्स स्थित घर में 12 मई की रात को 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा का शव मिला था. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा शर्मा की मौत की मुख्य वजह 'दम घुटना' सामने आई है, लेकिन इसके साथ ही उसके शरीर के अन्य हिस्सों पर कई गंभीर चोटों के निशान भी दर्ज किए गए हैं. मृतका के पिता नवनिधि शर्मा और भाई मेजर हर्षित शर्मा ने इस घटना को सीधे तौर पर दहेज के लिए की गई हत्या करार दिया है. वहीं, भोपाल पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो मौत के असली कारणों और सबूतों की जांच कर रही है.
ससुराल पक्ष का दावा और दर्ज हुई एफ़आईआर
ट्विशा की मौत को लेकर उनके ससुराल पक्ष और रिटायर्ड जज सास का दावा है कि उन्होंने आत्महत्या की है. हालांकि, पुलिस ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु, प्रताड़ना और दहेज निषेध कानून के तहत मामला दर्ज किया है. शादी के महज साढ़े पांच महीने के भीतर हुई इस मौत के बाद एसआईटी प्रमुख ने बताया कि शरीर पर मिले चोट के निशानों और परिजनों द्वारा सौंपे गए प्रताड़ना के व्हाट्सऐप चैट्स को जांच का हिस्सा बनाया गया है.
कथित फंदे और साक्ष्यों पर उठे गंभीर सवाल
ट्विशा के परिवार ने आरोप लगाया है कि यह हत्या का मामला है और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है. उनका कहना है कि कथित फंदे को पोस्टमार्टम के दौरान प्रस्तुत नहीं किया गया था. इस पर एसीपी ने माना कि एफएसएल टीम ने फंदे को घटनास्थल से जब्त किया था, लेकिन वह पोस्टमार्टम के लिए क्यों नहीं पहुंचा, इसकी तत्कालीन जांच अधिकारी के खिलाफ जांच की जा रही है. पिता ने सवाल उठाया कि घर के पास पुलिस चौकी होने के बाद भी कानून के जानकार ससुराल वालों ने पुलिस को तुरंत सूचना क्यों नहीं दी और शव को दूसरी मंजिल से नीचे लाकर कैमरे के सामने सीपीआर देने का नाटक किया.
पति समर्थ सिंह फरार, सास को मिली जमानत
इस हाई-प्रोफाइल मामले में कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त और पेशे से वकील पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिसके बाद पुलिस ने उस पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है और वह फिलहाल फरार है. दूसरी तरफ, सेवानिवृत्त जज और ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है. जमानत मिलने के बाद गिरिबाला सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोपों को खारिज किया और दावा किया कि ट्विशा मानसिक और चिकित्सकीय समस्याओं से गुजर रही थीं, जिसका मृतका के परिवार ने कड़ा विरोध किया है.
शादी के बाद से प्रताड़ना और गर्भपात का आरोप
मूल रूप से नोएडा की रहने वाली एमबीए पास ट्विशा शर्मा, जो मॉडलिंग और ब्यूटी पेजेंट्स से भी जुड़ी थीं, उसकी मुलाकात समर्थ से 2024 में एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी. दिसंबर 2025 में दोनों की शादी हुई, लेकिन शादी के बाद से ही स्टैंडर्ड के नाम पर दहेज प्रताड़ना शुरू हो गई. एफआईआर के मुताबिक, अप्रैल 2026 में ट्विशा गर्भवती थीं, तब उनके चरित्र पर सवाल उठाए गए और मई के पहले सप्ताह में दबाव बनाकर उनका गर्भपात करा दिया गया. 12 मई की रात को माता-पिता से व्हाट्सऐप कॉल पर बात करते समय अचानक फोन कटा और बाद में सास ने उनकी मौत की खबर दी.