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अब भगवान भी देंगे प्रॉपर्टी टैक्स, जारी हुआ फरमान

भगवान की पूजा-पाठ तो ज्यादातर लोग करते हैं और मंदिरों में को भगवान का घर कहा जाता है. अब इसी घर में रहने वाले भगवान को भी टैक्स भरना पड़ेगा और इसके लिए फरमान भी जारी हो गया है. आइए जानें, कहां पर हुई ये अनोखी घटना...

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भगवान को जारी हुआ टैक्स भरने का नोटिस
भगवान को जारी हुआ टैक्स भरने का नोटिस

हरियाणा के फतेहाबाद में विभिन्न देवताओं को उनके निवास स्थान (मंदिरों) का प्रॉपर्टी टैक्स भरने के लिए नोटिस जारी हुआ है. आश्चर्यजनक बात ये भी है कि प्रॉपर्टी टैक्स भरने के लिए जो नोटिस बिल भेजे गए हैं और ये नोटिस देवी-देवताओं के नाम और उनके निवास स्थान (मंदिर) के नाम से जारी किए गए हैं.

नगरपरिषद के इस कारनामे की चर्चा पूरे शहर में चल रही है और हर कोई व्यक्ति यह सुनकर हैरान है कि आखिर भगवान से भी प्रॉपर्टी टैक्स सरकार वसूल करेगी. खास बात ये भी है कि प्रॉपर्टी टैक्स वसूली के नोटिस बिलराशि हजारों में ना होकर लाखों रुपये में हैं.

शहर के संन्यास आश्रम मंदिर को 2 लाख 77 हजार रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बिल भेजा गया है. वहीं दुर्गा माता को उनके मंदिर के लिए 1 लाख, 10 हजार रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स भरने का नोटिस भेजा गया है. इसके अलावा शहर के बाबा रामदेव जी को उनके मंदिर के लिए करीब 14 हजार 466 रुपये का बिल भेजा गया है. इतना ही नहीं, नगर परिषद ने तो बकायदा शमशान भूमि सभा से भी प्रॉपर्टी टैक्स की डिमांड करते हुए बिल भिजवाया है.

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संन्यास आश्रम मंदिर कमेटी के प्रधान अशोक नारंग के मुताबिक संन्यास आश्रम मंदिर की स्थापना 78 साल पहले हुई थी और आज तक किसी भी सरकार के रहते हुए मंदिर को टैक्स भरने का नोटिस नहीं आया. यह पहली बार हो रहा है कि इस तरह से टैक्स भरने का नोटिस मिला है और वो भी करीब 3 लाख रूपये तक का.


वहीं दूसरी तरफ इन नोटिसों से विभिन्न मंदिरों के प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारी हैरान-परेशान हैं क्योंकि आज तक कभी मंदिरों का प्रॉपर्टी टैक्स नहीं मांगा गया था. लेकिन इस बार ऐसा हुआ है और मंदिरों से हजारों रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स लंबित दिखाया गया है.

नोटिस प्राप्त होने वाले मंदिरों की कमेटियों के प्रधानों ने उक्त मामले को लेकर नगर परिषद चेयरमैन दर्शन नागपाल से बातचीत की और उन्हें पत्र सौंपकर मंदिरों का टैक्स माफ किए जाने का आग्रह किया है.

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मामला मीडिया में आने के बाद नगर परिषद चेयरमैन दर्शन नागपाल ने सफाई देते हुए कहा कि धार्मिक जगहों के प्रॉपर्टी टैक्स के लिए सर्वे एक कंपनी की ओर से किया गया है जो कि पिछली सरकार में हुआ था. हमारे संज्ञान में सामने आया है कि कंपनी की ओर से बिल भेजे गए और हमने बिल बंटवा दिए. लेकिन धार्मिक जगहों के लिए जारी हुए बिलों की जांच और उचित निवारण के लिए 5 सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया है.

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