एक भारतीय बिजनेसमेन देवांश भंडारी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर की है जिसकी काफी चर्चा हो रही है. उन्होंने अपने पोस्ट में बताया कि कई बार कम सैलरी कमाने वाला व्यक्ति भी ज्यादा पैसे बचा सकता है, जबकि ज्यादा सैलरी कमाने वाले की हाथ में आने वाली रकम काफी कम होती है. देवांश ने अपने दो दोस्तों का उदाहरण दिया. उनका पहला दोस्त गूगल में काम करता है और उसका सालाना पैकेज 62 लाख रुपये है. वहीं दूसरा दोस्त एक रिमोट कॉन्ट्रैक्टर है, जो घर से काम करता है और सालाना करीब 36 लाख रुपये कमाता है. देखने में लगता है कि गूगल वाले कर्मचारी की कमाई ज्यादा होगी, लेकिन असलियत कुछ अलग है.
देवांश के अनुसार, गूगल कर्मचारी के पैकेज का बड़ा हिस्सा शेयर और बोनस में होता है. यानी पूरा पैसा सीधे बैंक खाते में नहीं आता. 62 लाख के पैकेज में लगभग 22 लाख बेसिक सैलरी होता है, जबकि बाकी हिस्सा शेयर और बोनस के रूप में मिलता है. शेयरों का पैसा तुरंत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि उन्हें मिलने में समय लगता है. टैक्स कटने के बाद गूगल कर्मचारी के खाते में हर महीने लगभग 1.5 लाख से 1.8 लाख रुपये ही आते हैं.

पैकेज ज्यादा, पैसे कम
दूसरी तरफ, रिमोट कॉन्ट्रैक्टर को ज्यादातर पैसा सीधे नकद के रूप में मिलता है. उसे एक खास टैक्स नियम का फायदा भी मिलता है, जिससे उसकी आय पर कम कर लगता है. इसी वजह से उसे हर महीने लगभग 2.7 लाख से 2.9 लाख रुपये तक मिल जाते हैं. यानी कागजों पर गूगल कर्मचारी का पैकेज ज्यादा दिखता है, लेकिन वास्तव में रिमोट काम करने वाले व्यक्ति के हाथ में ज्यादा पैसा आता है. देवांश भंडारी ने कहा कि केवल बड़ा पैकेज देखकर प्रभावित नहीं होना चाहिए. असली बात यह है कि हर महीने आपके पास कितना पैसा बचता है और आपकी टैक्स डिडक्शन कैसा है.
सोशल मीडिया पर लोगों ने किया कमेंट
इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर लोगों ने अलग-अलग राय दी. कुछ लोगों ने कहा कि घर से काम करने वालों का खर्च भी कम होता है, क्योंकि उन्हें बड़े शहरों में रहने का महंगा किराया नहीं देना पड़ता. वहीं, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बड़ी कंपनियों की नौकरी में स्वास्थ्य सुविधाएं, नौकरी की सुरक्षा और दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं, जिनकी अपनी अहमियत होती है. इस चर्चा से एक बात साफ होती है कि सिर्फ बड़ा वेतन ही सब कुछ नहीं होता. असली मायने यह रखते हैं कि आपके हाथ में कितना पैसा आता है, आपका खर्च कितना है और आप भविष्य के लिए कितना बचा पाते हैं.