कभी अपने मनोरंजन के लिए, तो कभी बस यूं ही. जानवरों पर इंसानों का शोषण किसी परिचय का मोहताज नहीं है. चाहे हम किसी सर्कस का रुख करें या फिर किसी मदारी को देखें. हमारे मनोरंजन के नाम पर जानवरों को जो यातनाएं दी जाती हैं, वो सोच और कल्पना से परे हैं. हालांकि, कई बार लैब टेस्ट जैसे मामलों में ये लीगल तरीके से भी किया जाता है लेकिन एनिमल लवर्स अक्सर इससे जुड़े मुद्दे उठाते रहते हैं. वहीं कई वैज्ञानिक ऐसे जानवरों की मानसिक हालत पर शोध करते हैं. शोध के नतीजे किस हद तक भयावय हो सकते इसके लिए हम पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का रुख कर सकते हैं.
बचपन से क्रूरता का शिकार होते हैं रीसस बंदर
इसी तरह के एक शोध में पाकिस्तान में लोगों का मनोरंजन करने वाले खास 'रीसस बंदर' अत्यधिक तनाव से पीड़ित पाए गए हैं. दरअसल, ऐसे बंदरों को बचपन में ही बड़ी क्रूरता से उनकी मां से अलग कर दिया जाता है और डराकर कलाबाज़ी, कूदने, सलाम करने जैसी चीजों की ट्रेनिंग दी जाती है. फिर पैसे कमाने के लिए इन बंदरों को फुटपाथों और सड़क पर नाचने के लिए मजबूर किया जाता है.
स्ट्रेस हार्मोन का लेवल हैरान करने वाला
रिसर्चर्स ने छोटे रीसस बंदरों पर ऐसी गतिविधियों के प्रभाव के बारे में सोचा है. ग्लासगो विश्वविद्यालय में पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की एक जोड़ी मिशाल अकबर और नील प्राइस इवांस ने इस मामले पर आगे गौर किया. एप्लाइड एनिमल बिहेवियर साइंस जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन में अकबर और इवांस ने पाया कि नाचने वाले बंदरों में स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बहुत अधिक होता है.
ट्रेन्ड एसेट के रूप में प्रसिद्ध हैं
इस नतीजे पर पहुंचने के लिए, वैज्ञानिकों ने पाकिस्तान में पालतू नाचने वाले बंदरों से फर के सैंपल लेकर उनका टेस्ट किया. इसके बाद उनमें स्ट्रेस हार्मोन के लेवल की तुलना फ्लोरिडा में प्राइमेट सेंक्चुरी में रहने वाले समान बंदरों से की.
बता दें कि पाकिस्तान के प्रसिद्ध नाचने वाले बंदर, जिन्हें रीसस बंदर के नाम से भी जाना जाता है, जो शो दिखाकर अपने ट्रेनर को पैसे कमाने में मदद करते हैं. यह प्रजातियां अपनी सुन्दरता और बुद्धिमत्ता के साथ-साथ पालतू जानवर, लैब टेस्ट और ट्रेन्ड एसेट के रूप में उपयोग के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं.
टेस्टोस्टेरोन का लेवल बुरी तरह प्रभावित
बालों के नमूनों की तुलना से पता चला कि जिन बंदरों को नचाया जाता था, उनमें सैंक्चुरी में रहने वाले बंदरों की तुलना में एवरेज 55% अधिक कोर्टिसोल का लेवल था. इससे साफ है कि नाचने वाले बंदर लगभग लगातार तनाव में रहते हैं.
उन्होंने यह भी पाया कि ऐसे बंदरों का टेस्टोस्टेरोन का लेवल भी प्रभावित हुआ है, क्योंकि परीक्षण किए गए सभी रीसस बंदर नर थे. उनका ये कांन्सटैंट तनाव इस बात का संकेत है कि उन्होंने कहीं न कहीं अपने भाग्य को स्वीकार कर लिया है.