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मध्य प्रदेश: 22 साल तक इस शख्स को लोहे के खूंटे से बांधकर रखा

कलेक्टर रमेश भंडारी ने कहा है कि जांच के लिए इलाके के तहसीलदार एवं ईशानगर पुलिस थाने की टीम भेजी गई थी. पीड़ित को ग्वालियर की मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती करा दिया जाएगा

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प्रतीकात्मक फोटो: Getty Images
प्रतीकात्मक फोटो: Getty Images

मध्य प्रदेश के छतरपुर के एक गांव में मानसिक बीमारी से ग्रस्त एक व्यक्ति को परिजनों ने 22 साल से एक खूंटे से बांधकर कमरे में कैद कर रखा. जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर स्थित हरपुरा गौर गांव में 58 वर्षीय बैजनाथ यादव को खेत में बने एक छोटे से कमरे में जंजीरों से बांधकर अंधेरे में रखा गया. बीते हफ्ते मामले का खुलासा हुआ था.

शुक्रवार तक नहीं ले गए हॉस्पिटल

भाषा के मुताबिक, छतरपुर के कलेक्टर रमेश भंडारी ने कहा है कि जांच के लिए इलाके के तहसीलदार एवं ईशानगर पुलिस थाने की टीम भेजी गई थी. पीड़ित को मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती कराने के लिए डॉक्टर का प्रमाणपत्र चाहिए. शनिवार तक प्रमाणपत्र बन जाएगा और उसके बाद उसे ग्वालियर की मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती करा दिया जाएगा.

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असल में पीड़ित के 32 साल के बेटे देवीदीन यादव ने पटवारी श्यामलाल अहिरवार से अपने पिता के नाम की जमीन खुद के नाम पर कराने के लिए संपर्क किया था. पटवारी ने पिता की सहमति जरूरी बताई. इस पर देवीलाल ने पिता की स्थिति बताई. इसके बाद पटवारी ने बैजनाथ को एक कमरे में जंजीर से बंधा पाया.

अहिरवार ने बताया कि उसके परिवार वालों ने उसे करीब 22 साल से लोहे के खूंटे से बांधकर रखा हुआ है. उन्होंने कहा, ‘जब मैं खूंटे से बंधे बैजनाथ के पास गया, तो वह हाथ जोड़कर विनती करने लगा कि इस अंधेरे से बचा लो और इन जंजीरों से छुड़वा दो.’

इसके बाद पटवारी ने यह बात छतरपुर तहसीलदार आलोक वर्मा को बताई. तहसीलदार ने 27 साल से मनोरोगियों के लिए काम कर रहे वकील संजय शर्मा को इसकी जानकारी दी. इसके बाद शर्मा उसे छुड़ाने एवं मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती कराने के लिए 21 जुलाई को उसके घर गये.

शर्मा ने कहा- ‘हमने उसके परिजनों से उसे बेड़ियों से मुक्त करने को कहा, लेकिन बेटे देवीदीन ने यह कहकर उसे मुक्त करने से इनकार कर दिया कि यदि पिताजी को खुला रखा गया तो वह फिर लोगों को मारने लगेंगे. वह 10-12 लोगों के पकड़ने में भी नहीं आते हैं.’

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आश्वासन देने के बाद भी बेटा उन्हें आजाद करने पर राजी नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि बैजनाथ का परिवार अत्यंत गरीब है. उनके पास उनका इलाज के लिए पैसा भी नहीं है. शर्मा ने कहा, ‘मैंने उसके परिजनों को समझाया था कि बैजनाथ का इलाज संभव है. उसे मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती करा दूंगा. वह स्वस्थ हो जाएगा. लेकिन तब भी वे उसे मुक्त करने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे.’

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