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'मिसाइल की रेंज 5000 नहीं 2000KM रहे...', मरने के बाद खामेनेई का बयान वायरल- VIDEO

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. यह वीडियो साल 2017 का बताया जा रहा है, जिसमें खामेनेई ईरान की मिसाइल नीति को लेकर एक अहम बयान देते नजर आते हैं.

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तेहरान में इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) एयरोस्पेस फोर्स म्यूज़ियम का दौरा करते एक ईरानी धर्मगुरु. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)
तेहरान में इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) एयरोस्पेस फोर्स म्यूज़ियम का दौरा करते एक ईरानी धर्मगुरु. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है. यह वीडियो साल 2017 का बताया जा रहा है. इसमें खामेनेई ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल नीति को लेकर एक अहम बात कहते नजर आते हैं.

वीडियो में खामेनेई कहते हैं कि ईरान 2000 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाली मिसाइलें विकसित नहीं करेगा. उन्होंने यह भी माना था कि ईरानी वैज्ञानिक और सेना इससे कहीं ज्यादा दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें बनाना चाहते थे, लेकिन उन्होंने खुद इस पर रोक लगाने का फैसला किया.

4–5 हजार किमी की मिसाइल बनाने की थी इच्छा

खामेनेई ने अपने बयान में कहा था कि ईरान के वैज्ञानिक और सेना 4 से 5 हजार किलोमीटर रेंज तक की मिसाइलें बनाने की क्षमता रखते हैं. लेकिन उन्होंने कहा कि देश की जरूरतों को देखते हुए इतनी लंबी दूरी की मिसाइल बनाना जरूरी नहीं है.

इसलिए उन्होंने मिसाइल कार्यक्रम को 2000 किमी की सीमा के अंदर रखने का फैसला किया. उस समय ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के पूर्व कमांडर मोहम्मद अली जाफरी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस नीति की पुष्टि की थी.

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क्यों तय की गई थी 2000 किमी की सीमा

विशेषज्ञों के मुताबिक 2000 किलोमीटर की रेंज ईरान की रणनीति के हिसाब से काफी मानी जाती थी. इस दूरी में इजरायल, मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी देश आसानी से आ जाते हैं.

लेकिन इस सीमा की वजह से अमेरिका जैसी दूर की जगहें ईरानी मिसाइलों की पहुंच से बाहर रहती थीं. यही कारण है कि ईरान अक्सर अपनी मिसाइल नीति को 'रक्षात्मक' बताता रहा है.

विदेश मंत्री ने भी कही थी यही बात

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी हाल ही में कहा था कि देश ने जानबूझकर मिसाइलों की रेंज 2000 किलोमीटर से कम रखी है. उनके मुताबिक यह सीमा ईरान की सुरक्षा जरूरतों के लिए पर्याप्त है.अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन भी बताते हैं कि फिलहाल ईरान के पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) की क्षमता नहीं है.

खामेनेई की मौत के बाद नई बहस

हालांकि फरवरी 2026 में अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद हालात बदल गए. इस ऑपरेशन में खामेनेई समेत ईरान के कई शीर्ष नेताओं की मौत हो गई.इसके बाद ईरान के मिसाइल ठिकानों, उत्पादन सुविधाओं और लॉन्चरों पर बड़े हमले हुए. जवाब में ईरान ने इज़राइल, अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे.

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क्या अब बदल सकती है मिसाइल नीति?

खामेनेई की मौत के बाद सोशल मीडिया और कुछ ईरानी स्रोतों में यह चर्चा तेज हो गई है कि अब मिसाइल रेंज की यह सीमा हटाई जा सकती है.

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि नया नेतृत्व लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने की दिशा में कदम उठा सकता है, जिससे क्षेत्रीय संतुलन बदल सकता है.

अमेरिका और इजरायल का क्या कहना है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमलों को सही ठहराते हुए कहा था कि ईरान अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें बनाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि खुफिया रिपोर्ट्स में अब तक इसका कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है.फिलहाल इज़राइल और अमेरिका का लक्ष्य ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को कमजोर करना बताया जा रहा है.

अब दुनिया की नजर ईरान पर

विशेषज्ञों का कहना है कि खामेनेई की नीति ईरान को एक तरह से 'रक्षात्मक' ढांचे में रखती थी. लेकिन मौजूदा युद्ध के माहौल में नई सरकार इस सीमा को बदल सकती है.इसी वजह से 2017 का यह वीडियो एक बार फिर चर्चा में है. लोग इसे शेयर करते हुए पूछ रहे हैं कि क्या खामेनेई की मौत के बाद ईरान की मिसाइल रणनीति बदल जाएगी?
 

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