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'पासपोर्ट तैयार रखें...', ईरान में कितने भारतीय रहते हैं, रेस्क्यू और इवैकुएशन की क्या तैयारियां हैं?

ईरान में रह रहे भारतीयों को तुरंत वापस आने की एडवाइजरी जारी की गई है. उन्हें अपना पासपोर्ट तैयार रखने को कहा गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि ईरान में आखिर कितने भारतीय रहते हैं और उन्हें कैसे वापस लाया जाएगा.

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ईरान छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं भारतीय नागरिक  (Representational Photo - Pexels)
ईरान छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं भारतीय नागरिक (Representational Photo - Pexels)

अमेरिका और ईरान के बढ़ते तनाव के बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने अपने लोगों को तुरंत ईरान छोड़ने की एडवाइजी जारी की है. इस बीच ईरान में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्रा और कामकाजी प्रोफेशनल्स सुरक्षित वापस आने की तैयारी में हैं. ऐसे में जानते हैं कि वहां कितने इंडियन रह रहे हैं और उन्हें कैसे वापस लाया जाएगा. 

विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, ईरान में कुल 10765 प्रवासी भारतीय रहते हैं. इनमें  10320 एनआरआई और  445 भारतीय मूल के हैं. इनमें से कई स्टूडेंट्स हैं और काफी लोग वहां शिक्षा, इंजीनियरिंग और कारोबार से जुड़े क्षेत्र में काम करते हैं. अधिकांश भारतीय ईरान के प्रमुख शहरों तेहरान, इस्फान और जाहेदान में रहते हैं.          

अभी ईरानी हवाई क्षेत्र खुला है और वाणिज्यिक उड़ानें चल रही हैं. इसलिए सरकार वहां रह रहे लोगों को फंसा हुआ नहीं मानती है.हालांकि,  तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय को तुरंत ईरान छोड़ देने की एडवाइजरी जारी की है और लगातार वहां रह रहे लोगों की मदद के लिए उनके संपर्क में है. लोगों को अपने पासपोर्ट और यात्रा संबंधी डॉक्यूमेंट तैयार रखने को कहा गया है. साथ ही जिन भारतीय नागरिकों ने दूतावास से संपर्क नहीं किया है उन्हें एंबेसी के आधिकारिक लिंक से रजिस्ट्रेशन कराने की सलाह दी गई है.

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पिछले साल ईरान और इजरायल के बीच जब तनाव के हालात बने थे. तब ऑपरेशन सिंधु (जून 2025) के तहत वहां रहने वाले भारतीयों को सकुशल वापस लाया गया था. अभी तनाव बढ़ रहा है, लेकिन ईरान का एयर स्पेस अब भी खुला है और कमर्शियल फ्लाइट भारत के लिए आ रही हैं.  इसलिए भारत लौटने के इच्छुक भारतीय नागरिकों को नियमित वाणिज्यिक हवाई सेवाओं का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है.

यह भी पढ़ें: 'सत्ता परिवर्तन के इतने करीब...', खामेनेई को ईरान की प्रिंसेज नूर पहलवी का चैलेंज

हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान किसी भी भारतीय नागरिक के लापता या मारे जाने की कोई रिपोर्ट नहीं है. सरकार ने इससे पहले भी  5 और 14 जनवरी 2026 को यात्रा सलाह जारी की थी. इसमें ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने का आग्रह किया गया था. ईरान में मौजूद भारतीयों को वाणिज्यिक उड़ानों के माध्यम से निकलने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है. 

 मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन PM को लिखी चिट्ठी
इधर, तेहरान स्थित इंडियन एंबेसी की ओर से जारी एडवाइजरी के मद्देनजर  ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने भी पीएम को चिट्ठी लिखकर वहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की वापसी और करियर को लेकर चिंता जताई है. लेटर में AIMSA ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह जल्द से जल्द फंसे हुए भारतीय स्टूडेंट्स को सुरक्षित निकालने और वापस लाने की व्यवस्था करे.

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एसोसिएशन ने सरकार से यह भी रिक्वेस्ट किया है कि वह सुरक्षा की स्थिति और भारतीय नागरिकों को देश छोड़ने की एडवाइजरी को देखते हुए, वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए तय एग्जाम को पोस्टपोन करने के लिए ईरानी यूनिवर्सिटी और अधिकारियों के साथ तुरंत कोऑर्डिनेट करें.

सिर्फ परीक्षा देने के लिए छात्रों का ईरान में रहना ठीक नहीं
एसोसिएशन ने कहा कि सिर्फ़ एग्जाम देने के लिए ईरान में रहना छात्रों के लिए न तो सुरक्षित है और न ही मुमकिन है. लेटर में लिखा है कि हमें पक्का यकीन है कि आपका दयालु और अहम दखल विदेश में पढ़ रहे हजारों भारतीय छात्रों की जिंदगी और भविष्य को सुरक्षित रखेगा. इसमें कहा गया है कि तेहरान में एम्बेसी ने सोमवार को एक एडवाइजरी जारी की, जिसमें छात्रों समेत सभी भारतीय नागरिकों से तुरंत ईरान छोड़ने को कहा गया.

लेटर में कहा गया कि अभी के टेंशन वाले जियोपॉलिटिकल माहौल में स्टूडेंट्स के लिए सिर्फ एग्जाम देने के लिए ईरान में रहना न तो सेफ है और न ही मुमकिन है. उनकी सेफ़्टी और भलाई को सबसे बड़ी नेशनल प्रायोरिटी माना जाना चाहिए. इसके अलावा, एग्जाम को लेकर कन्फ्यूजन स्टूडेंट्स और उनके परिवारों में साइकोलॉजिकल स्ट्रेस और पढ़ाई में रुकावट पैदा कर रहा है.

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