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कैसे चलते थे भारी-भरकम डायनासोर, मैनचेस्‍टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक तलाशेंगे जवाब

ब्रिटेन के मैनचेस्टर यूनाइटेड यूनिवर्सिटी ने डिप्लोडोकस प्रजाति के डायनासोर का डिजीटल एनिमेशन तैयार किया है. यूनिवर्सिटी यह पता लगाना चाहती है कि आखिर यह भारी भरकम जानवर किस तरह चलता-फिरता था. इससे पूर्व ब्रिटेन में इसी प्रजाति के डायनासोर के कंकाल की करोड़ों रुपये में नीलामी भी हुई थी.

ब्रिटेन के मैनचेस्टर यूनाइटेड यूनिवर्सिटी ने डिप्लोडोकस प्रजाति के डायनासोर का डिजीटल एनिमेशन तैयार किया है. यूनिवर्सिटी यह पता लगाना चाहती है कि आखिर यह भारी भरकम जानवर किस तरह चलता-फिरता था. इससे पूर्व ब्रिटेन में इसी प्रजाति के डायनासोर के कंकाल की करोड़ों रुपये में नीलामी भी हुई थी.

गौरतलब है कि हमारी धरती पर करोड़ों साल पहले डायनोसोर रहा करते थे. इनमें से कई बहुत विशाल थे, जो आज दिखाई देने वाले किसी भी जानवर से आकार में कई गुणा बड़े थे. उनमें से ही एक प्रजाति थी डिप्लोडोकस, जिसकी लंबाई 40 मीटर थी. यानी वह 22-22 गज की क्रिकेट की दो पिचों के बराबर लंबे और 80 टन वजनी होते थे जबकि एक हाथी बस छह-सात टन भारी होता है.

कैसी रही होंगी उनकी हड्डियां और मांसपेशियां
वैज्ञानिकों के लिए यह सवाल हमेशा से अबूझ रहा है कि आखिर इतने भारी शरीर के साथ डायनासोर कैसे चल-फिर पाते होंगे. उनकी हड्डियां और मांसपेशियां भी वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी गुत्थी रही है. इन्‍हीं सवालों के जवाब ढ़ूंढने लिए वैज्ञानिकों ने एनिमेशन से एक विशाल डायनासोर का डिजीटल ढांचा बनाया है.

लगाईं डिजीटल मांसपेशियां, डायनासोर रोबोट को चला कर देखा
ढांचा निर्माण के लिए वैज्ञानिकों की इस टीम ने अर्जेनटीना के म्यूज़ियम में रखे एक ढांचे का स्कैन किया और उसपर डिजीटल मांसपेशियां लगाईं. इसके बाद उन्होंने इस डायनासोर रोबोट को चला के देखा कि उसके पैर की मांसपेशियां कैसे मुड़ती होंगी. अपनी रिसर्च में वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि डायनसोर कैसे खाना खाने के लिए अपनी लंबी गर्दन को घुमाते रहे होंगे. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि डायनसोरों की जानकारी होने से इंसानों के बारे में भी अंदाजा हो सकता है कि उनकी हड्डियां और मांसपेशियां किस हद तक दबाव झेल सकती हैं.

...तो देख सकेंगे डायनासोर को दौड़ते हुए
मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 30 हजार कंप्यूटरीकृत उपकरणों और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर 40 मीटर लंबे और 80 टन वजनी सौरापोड डायनासोर का एक डिजिटल रफ तैयार किया है जो अधिकतम पांच मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है. डायनासोर को किसी ने नहीं देखा है. ऐसे में इस महाजानवर की तस्‍वीर सिर्फ कल्‍पनाओं पर आधारित है. लेकिन फिर भी डायनासोर से लोगों का जुड़ाव ऐसा है कि वो इसके लिए पैसे खर्च करने को तैयार रहते हैं. यही कारण है कि ब्रिटेन में पिछले दिनों करोड़ों में इसके कंकाल की नीलामी हुई.

फिल्‍मों ने दिलाई इस महाजानवर को लोकप्रियता
अधिकतर लोगों को सबसे पहले डायनासोर के बारे 20 साल पहले तब पता चला जब सिल्‍वर स्‍क्रीन पर स्‍टीवन स्‍पीलबर्ग ने इसे फिल्‍म जुरासिक पार्क में दिखाया. साइंस और फिक्शन पर आधारित इस फिल्म ने ऐसी कामयाबी हासिल की. कि डायनासोर को लोग जुरासिक पार्क से जोड़ कर देखने लगे. इस फिल्म ने अरबों डॉलर कमाए साथ ही कई अवार्ड भी जीते. इस सीरीज की अकेली एक फिल्म ने 900 मिलियन डॉलर तक का कारोबार किया है. साथ ही बेस्ट साउंड इफेक्ट्स, एडिटिंग, बेस्ट साउंड और बेस्ट विजुअल इफेक्ट्स का ऑस्कर भी जीता. इस फिल्म के तीन सीक्वेल बन चुके हैं औऱ सभी ने कमाई के रिकॉर्ड तोड़े. फिल्‍म का चौथा सीक्वेल अगले साल जून में रिलीज़ होने जा रहा है. जुरासिक पार्क सीरीज की 20वीं सालगिरह के मौके पर इस साल अप्रैल में ओरिजिनल फिल्म को 3डी और आईमैक्स 3डी में भी रिलीज किया गया था.

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