scorecardresearch
 

दिल की धड़कन 40 घंटे तक बंद रही, फिर भी जिंदा बच गया शख्स

चीन में एक शख्स के दिल की धड़कन 40 घंटे तक बंद रही. इसके बाद भी वह जिंदा बच गया. एक डॉक्टर ने सोशल मीडिया पर ऐसा दावा किया है. उसके बाद से वहां लोगों के बीच इस घटना को लेकर बहस छिड़ गई है.

Advertisement
X
40 घंटे धड़कन बंद रहने के बाद भी जिंदा बच गया शख्स (Photo - Pexels)
40 घंटे धड़कन बंद रहने के बाद भी जिंदा बच गया शख्स (Photo - Pexels)

चीन में एक शख्स चमत्कारिक रूप से ऐसे हालत में भी जिंदा बच गया, जब उसके दिल की धड़कन 40 घंटे तक बंद रही. इस घटना ने जीवन बचाने की नवीनतम चिकित्सा तकनीकों को लेकर ऑनलाइन बहस छेड़ दी है. 

यह मामला तब सामने आया जब झेजियांग विश्वविद्यालय के मेडिकल स्कूल के दूसरे संबद्ध अस्पताल के इमरजेंसी डॉक्टर लू जिओ ने इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया, जिसके तीन मिलियन फॉलोअर्स हैं.

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, लू ने बताया कि 40 साल के एक  व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ा था. कई बार इलेक्ट्रिक डिफिब्रिलेशन के बाद भी दिल नहीं धड़का. डॉक्टरों की टीम  ने उस व्यक्ति पर एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ईसीएमओ) किया. तब जाकर उसकी जान बच पाई, हालांकि उसका दिल ने लगभग दो दिनों से धड़कना बंद कर दिया था.

ईसीएमओ एक जीवन रक्षक मशीन है जो आर्टिफिशियल हृदय और फेफड़े की तरह काम करती है. यह उन लोगों के खून में ऑक्सीजन जोड़ती है और कार्बन डाइऑक्साइड को हटाती है जिनके अंग काम करना बंद कर चुके हैं.

Advertisement

इस मशीन का इस्तेमाल अक्सर दिल के दौरे से पीड़ित मरीजों और हृदय और फेफड़े के ट्रांसप्लांट से गुजर रहे लोगों को अस्थायी सहायता प्रदान करने के लिए किया जाता है. पिछली रिपोर्टों में बताया गया है कि मशीन की बदौलत दिल का दौरा पड़ने के घंटों बाद लोगों को बचाया गया था.

पहले भी इस तकनीक से कई मरीजों की बची है जिंदगी
पिछले साल, मध्य चीन के हुबेई प्रांत में एक 53 साल की महिला को दिल की धड़कन रुकने के पांच घंटे बाद फिर से जीवित किया गया था. 2022 में, पूर्वी चीन के जियांग्सू प्रांत में स्थित यानचेंग नंबर 1 पीपुल्स हॉस्पिटल ने घोषणा की है कि उसने 36 साल की एक महिला को ईसीएमओ मशीन की मदद से बचाया, जिसका दिल 96 घंटे तक धड़कना बंद था.

अस्पताल के अनुसार, यह मशीन हृदय गति रुक ​​जाने वाले मरीजों के जीवित रहने की दर को पारंपरिक सीपीआर से मिलने वाले एक प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर सकती है. हालांकि, ईसीएमओ उपचार को लंबा खींचने के जोखिम भी हैं. 40 साल के इस शख्स के मामले में, डॉक्टर लू ने कहा कि उन्हें रक्त के थक्के बनने से रोकने के लिए खून की पंपिंग बढ़ाने के उपाय करने पड़े, जो घातक हो सकते थे.

Advertisement

इसके अलावा, चिकित्सा दल को रक्त के थक्के बनने और ब्लीडिंग के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता होती है, जो ईसीएमओ की एक सामान्य और खतरनाक जटिलता है. इसका अर्थ है कि निरंतर निगरानी आवश्यक है और चिकित्सा कर्मचारियों के पास उत्कृष्ट पेशेवर कौशल होना चाहिए.

जब उस व्यक्ति के दिल की धड़कन सामान्य हो गई, तो वह लगभग 10 दिनों तक ईसीएमओ उपचार पर जीवित रहा. लू ने कहा कि 20 दिनों के बाद वह लगभग ठीक हो गए, खुद चलकर अस्पताल से बाहर आए और उन पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ा. हालांकि, इसके साइड इफेक्ट में स्ट्रोक, किडनी फेलियर,  चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याएं शामिल हो सकती हैं.

लू ने इस घटना को चमत्कार बताया. उन्होंने कहा कि मरीज भाग्यशाली है. हर सफल इलाज चिकित्सा जगत में हुए विकास, डॉक्टर-नर्सों की लगन और भाग्य का नतीजा होता है. इस मामले ने चीन के सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी.

काफी खर्चीला है यह इलाज 
एक व्यक्ति ने कहा कि वह शख्स बहुत भाग्यशाली है क्योंकि उसे समय पर इलाज मिल गया, अन्यथा ईसीएमओ भी उसकी जान नहीं बचा पाता. एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि उस व्यक्ति को अपने इलाज का खर्च उठाने के लिए अपने परिवार का भी शुक्रिया अदा करना चाहिए.

Advertisement

चीन में इस मशीन को चालू करने में कथित तौर पर लगभग 50,000 युआन (7,000 अमेरिकी डॉलर) का खर्च आता है और उसके बाद प्रतिदिन 10,000 युआन से अधिक का खर्च होता है.  इस मशीन से इलाज का खर्च आमतौर पर मेडिकल इंश्योरेंस कवरेज के तहत भी नहीं आता है. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement