नौकरी गई.. दूसरा काम मिलना मुश्किल था. गांव-घर से हजारों किलोमीटर दूर, एक ऐसे देश में रहना... जहां सांस लेने के लिए भी पैसा चाहिए. वहां बिना जॉब के रहना किसी चुनौती से कम नहीं था. फिर भी नौकरी जाने के दुख से आजाद होने की खुशी ज्यादा थी. क्योंकि, ये एक अवसर था अपना कुछ करने का, अपने सपनों को जीने का. सोशल मीडिया पर 'Chaiguy' के नाम से वायरल. प्रभाकर प्रसाद का ये दर्द नहीं.. संघर्ष और अंदर की खुशी को बयां करता एहसास है.प्रभाकर अमेरिका के लॉस एंजिल्स में रहते हैं. इन दिनों इंस्टाग्राम पर LA में चाय बेचते इनकी वीडियो काफी वायरल होती रहती है. भारत में मेनस्ट्रीम मीडिया में भी इनकी काफी चर्चा है.
हंसते-मुस्कुराते अमेरिका के लोगों को खलिस दूध देसी मसाला चाय पिलाते प्रभाकर काफी खुश-मिजाज नजर आते हैं. असल जिंदगी में भी अपने वीडियो की तरह ये हमेशा खुश रहते हैं, चाहे हालात कैसे भी हो. जब आजतक डिजिटल की टीम ने प्रभाकर से संपर्क किया और अमेरिका में चाय बेचने की वजह और उससे होने वाली कमाई के बारे में जानने की कोशिश की, तो इसका एक स्याह पहलू सामने आया.
प्रभाकर बिहार की राजधानी पटना से सटे छोटे से कस्बे बाढ़ से ताल्लुक रखते हैं. वहां से निकलकर एक मुकाम हासिल करने वो अमेरिका पहुंचे. वहां अच्छी नौकरी भी मिल गई, लेकिन एक समय ऐसा आया जब ले-ऑफ की वजह से वहां रहने का सपना टूट गया. लेकिन, प्रभाकर की हिम्मत नहीं टूटी. उन्होंने इसे अवसर की तौर पर देखा और यहीं से उनके नए सफर की शुरुआत हुई.
अभी काफी कम हो रही कमाई
प्रभाकर ने खुलकर सबकुछ बताया. उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर लॉस एंजिल्स में मेरे चाय बेचने के वीडियो देखकर, लोग तुरंत मेरी इनकम कैलकुलेट कर लेते हैं. क्योंकि मैंने जब अपने रील्स ये बताया कि मैं 8 डॉलर में एक कप चाय और 16 डॉलर में एक प्लेट पोहा बेचता हूं तो लोग समझ बैठते हैं कि अच्छी-खासी कमाई हो रही है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसी कहानी देखकर मुझे हैरानी हुई कि मेरी कमाई के बारे में जो भी कैलकुलेशन की गई हैं, वो सच्चाई से मीलों दूर हैं.
हां, मैं खुद अपने वीडियो में एक कप चाय और एक प्लेट पोहा की कीमत बताता हूं और ये भी दिखाता हूं कि आज मेरी कितनी कमाई हुई. इसका मतलब ये नहीं है कि मेरी रोज इतनी कमाई होती है. अगर मैं एक दिन में 300 या 400 डॉलर कमा रहा हूं, तो ये भी जान लें कि मेरा स्टॉल सिर्फ महीने में 7-8 दिन ही लग पाता है. बाकी दिन मैं इस जद्दोजहद में रहता हूं कि और क्या किया जाए, जिससे अमेरिका के इस महंगे शहर में टिके रहने के लिए ठीक-ठाक इनकम हो जाए.
लॉस एंजेल्स में रहने का इतना है खर्चा
प्रभाकर ने बताया कि यहां रहने के लिए हर महीने 3000 डॉलर सिर्फ रेंट देना पड़ता है. फिर कार मेंटेनेस और इंश्योरेंस का पैसा. मैं जहां भी अपना फूड स्टॉल लगता हूं, वहां भी कुछ फीस देना होता है. इसलिए मेरे लिए सबकुछ आसान नहीं है. फिर भी एक बात तो है कि मैं बहुत खुश हूं. मैं अपने इस बिजनेस को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा हूं और इसके लिए जी तोड़ मेहनत भी करता हूं. सबसे बड़ी बात ये है कि मैं अपने मन का मालिक हूं. हां, इनकम कम हो गई है, लेकिन अब मैं कॉरपोरेट गुलाम नहीं हूं.
जब प्रभाकर से पूछा गया कि अमेरिका में आपने चाय बेचने का काम ही क्यों चुना. आप चाय तो बेच ही रहे हैं. साथ ही साथ सोशल मीडिया पर इसके वीडियो भी डाल रहे हैं, जिसने आपको एक वायरल शख्सियत बना दिया है. क्या ये सबकुछ पहले से तय एक प्लानिंग का हिस्सा था? इस पर प्रभाकर ने जो बताया वो आंख खोलने वाला है. उन्होंने बताया कि मैं सबकुछ शुरू से बताता हूं. ये जो कुछ मैं कर रहा हूं, ये शौकिया नहीं है.
सर्वाइवल के लिए ये काम शुरू किया था
मैं पहले जॉब करता था. अच्छी खासी सैलरी थी. इतनी इनकम थी कि कोई कमी नहीं थी. आज चाय बेचकर उतनी कमाई नहीं हो पाती है. यहां तक कि इससे महीने के खर्चे भी नहीं निकल पाते हैं. फिर भी मैं खुश हूं. तब पैसा ज्यादा था, आजादी कम थी और खुशी उससे भी कम थी. अब पैसा बहुत कम है, आजादी ज्यादा है और खुशी बहुत ज्यादा है. यह सबकुछ सर्वाइवल के लिए शुरू किया था.
प्रभाकर ने बताया - जहां तक चाय बेचने और सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात है तो मैं बताता हूं कि पहले से इसकी कोई प्लानिंग नहीं थी. सब एक के बाद एक अपने आप होता गया. एक के बाद एक आइडिया आया और उस पर मैं अमल करता गया. पिछले साल फरवरी में मेरी कंपनी में ले-ऑफ हुआ और मेरी जॉब चली गई. मैंने इसे एक अवसर के रूप में देखा. क्योंकि, यही वो समय था, जब मैंने खुद के मन का कुछ करने की ठानी. इससे पहले जब आदमी जॉब में रहता है और उसे अच्छी-खासी सैलरी मिलती रहती है, तो लोग एक चक्र में फंसे रहते हैं. कुछ नया या अपने मन की चाह कर भी नहीं कर पाते.
मुझे जब नौकरी से निकाल दिया गया, तब मैंने कोई ऐसा छोटा-मोटा कारोबार शुरू करने का सोचा जिसे कम पूंजी में शुरू किया जा सके और जिसमें मेरी रुचि हो. मुझे खाना बनाना और दूसरों को खिलाना पसंद है. इसलिए मैंने ऐसा ही कुछ शुरू करना चाहा. यहां छोटा एक ढाबा या फूड स्टॉल खोलने के लिए भी कम से कम 3000 डॉलर प्रति महीना किराया लग जाता है. ऐसे में मैंने यहां वीकली फार्मर मार्केट में फूड स्टॉल लगाने की प्लानिंग की.
लॉस एंजिल्स में मैं टोपंगा नाम के एरिया में रहता हूं, जो पहाड़ पर है. पास ही मलिबु नाम का एक इलाका है. इन जगहों पर शुक्रवार, शनिवार और रविवार को फार्मर मार्केट लगता है. ये भारत में लगने वाले छोटे साप्ताहिक बाजार की तरह ही होते हैं, जहां वीकेंड पर लोग रोजमर्रा की जरूरत के सामान खरीदने आते हैं. मैंने सबसे पहले मलिबु के फार्मर मार्केट में स्टॉल लगाना शुरू किया. फिर एक रविवार को भी मैं अपना स्टॉल लगाने लगा. स्टॉल के लिए एक दिन के हिसाब से मार्केट कमेटी को फीस देना पड़ता है.
मैं अपने स्टॉल पर चाय और पोहा बनाकर बेचने लगा. मेरा ये बिजनेस आइडिया काम तो कर गया, लेकिन इससे इनकम बहुत ज्यादा नहीं होती है, लेकिन लोग मेरी चाय और पोहे को काफी पसंद करने लगे हैं. मैंने चाय का स्टॉल शुरू करने से पहले केरल के एक आयुर्वेद एक्सपर्ट से संपर्क कर आयुर्वेदिक चाय के लिए एक स्पेशल मसाले का फॉर्मूला लिया. इसके बाद मैंने एकदम ऑर्गेनिक चाय बेचना शुरू किया. इसी तरह पोहे की भी तैयारी एकदम ऑर्गेनिक तरीके से होती है.
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शुरुआत में तो सबकुछ ऐसे ही चलता रहा. मैं हर वीकेंड पर फार्मर मार्केट में चाय और पोहे का स्टॉल लगाता था. उससे पहले मैं मार्केट में बेचने के लिए पोहा और चाय बनाने की तैयारी करता था. इस तरह करते-करते 6 महीने बीत गए. छह महीने बाद मैंने अपने इस काम के प्रचार-प्रसार के लिए पब्लिसिटी स्टंट के तौर पर एलए में बिहारी अंदाज में चाय बेचने का रील बनाया. मैंने 'चायगाय' के नाम से इस रील को शेयर किया. इसके बाद मैंने ऐसे ही कुछ और रील्स बनाए.
ऐसे आया 'Chaiguy' का आइडिया
धीरे-धीरे इंस्टाग्राम पर लोगों ने मेरे ऐसे रील्स को पसंद करने लगे. फॉलोअर की तादाद बढ़ने लगी और कब मैं वायरल हो गया मुझे पता नहीं चल पाया. अब मैंने 'Chaiguy' के नाम से सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बना ली है. हालांकि, मुझे सोशल मीडिया से अबतक कोई इनकम नहीं हो रहा है, लेकिन मैं इसे एक विकल्प के तौर पर देख रहा हूं.
प्रभाकर ने बताया कि बस यही मेरी कहानी है. नौकरी छूटने के बाद सोर्स ऑफ इनकम के लिए अपना कुछ करने की चाहत में मैंने अमेरिका में चाय बेचना शुरू किया और पब्लिसिटी के लिए अपने काम की व्लॉगिंग करने लगा और बन गया 'Chaiguy'. आगे सफर बहुत लंबा है. क्योंकि, इस 'चायगाय' को एक ब्रांड बनना है और कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में भी कुछ शुरुआत करनी है. कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जो पाइपलाइन में हैं. बिहार के छोटे से कस्बे से निकलकर अमेरिका तक पहुंचने और अपना अलग मुकाम और पहचान बनाने की एक लंबी कहानी है.