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कनाडा में 4:30 बजे खत्म होता है काम, भारत में घंटों ओवरटाइम-IT कल्चर पर छिड़ी बहस

कनाडा में रहने वाले एक भारतीय व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उसने कनाडा और भारत के आईटी वर्क कल्चर की तुलना की है. वीडियो में दिखाया गया कि कनाडा में कर्मचारी शाम 4:30 बजे तक ऑफिस से निकल जाते हैं, जबकि भारत में कई लोगों को 10–12 घंटे काम करना पड़ता है.

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इस वीडियो ने वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है.( Photocorporate_kahanii): Insta/ @
इस वीडियो ने वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है.( Photocorporate_kahanii): Insta/ @

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कनाडा में रहने वाले एक भारतीय व्यक्ति ने वहां और भारत की आईटी नौकरी के माहौल का अंतर समझाया है. इस वीडियो ने लोगों के बीच काम और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई बहस शुरू कर दी है. वीडियो में वह शख्स दिखाता है कि कनाडा में लोग समय पर ऑफिस से निकल जाते हैं. वह शाम करीब 4:30 बजे का समय दिखाते हुए कहता है कि वहां के आईटी ऑफिस में लोग अपना काम खत्म करके घर चले जाते हैं. उसके दोस्त भी उसी समय ऑफिस से निकल रहे होते हैं. उसके मुताबिक, वहां यह बिल्कुल सामान्य बात है कि काम के बाद लोग अपनी निजी जिंदगी के लिए समय निकालते हैं.

इसके बाद वह भारत की स्थिति से तुलना करता है. वह बताता है कि भारत में ज्यादातर लोगों को लंबे समय तक ऑफिस में काम करना पड़ता है. कई बार 10-12 घंटे तक लोग ऑफिस में रहते हैं. यहां तक कि कई जगहों पर कर्मचारी तभी घर जा पाते हैं, जब उनका बॉस उन्हें जाने की अनुमति देता है. यानी समय पर काम खत्म करना आसान नहीं होता. वह आगे कहता है कि कनाडा में लोगों के पास काम के बाद अपने शौक पूरे करने का समय होता है. कोई जिम जाता है, कोई घूमने जाता है या अपने परिवार के साथ समय बिताता है. वहीं भारत में काम का दबाव इतना ज्यादा होता है कि लोगों के पास अपने लिए समय ही नहीं बचता.

कनाडा में काम के बाद शौक और परिवार के लिए समय
वीडियो में यह भी बताया गया कि विदेशों में काम और वर्क-लाइफ बैलेंस को ज्यादा महत्व दिया जाता है. वहां छुट्टियां, तय समय पर काम खत्म करना और व्यक्तिगत समय को जरूरी माना जाता है. जबकि भारत में कई जगहों पर हर समय उपलब्ध रहने की उम्मीद की जाती है, जिससे लोगों पर दबाव बढ़ता है. उस व्यक्ति का कहना है कि काम सिर्फ पैसा कमाने का जरिया होना चाहिए, न कि पूरी जिंदगी पर हावी हो जाना चाहिए. उसने यह भी कहा कि अगर भारत में काम के घंटे और ओवरटाइम को लेकर सख्त नियम बनाए जाएं, तो यहां काम करना और भी बेहतर हो सकता है.

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विदेशों में छुट्टियों और पर्सनल टाइम को ज्यादा महत्व
इस वीडियो पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है. कई लोगों ने कहा कि यही वजह है कि विदेश जाने वाले लोग वहां रहना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस मिलता है. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि भारत में टैलेंट और मौके तो बहुत हैं, लेकिन ऑफिस कल्चर में सुधार की जरूरत है. कुल मिलाकर, यह वीडियो एक जरूरी सवाल उठाता है कि क्या हम काम के चक्कर में अपनी जिंदगी को नजरअंदाज कर रहे हैं. यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है.

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