जिंदा रहते हुए तो किराए पर घर लेकर रहना इंसानों की मजबूरी होती है. वहीं इस धरती पर एक ऐसी भी जगह है, जहां मरने के बाद भी लोगों को रेंट पर घर लेना होता है. यहां बात हो रही है, एक ऐसे सेमेट्री की जहां लोगों को रेंट पर कब्र मिलती है, जिसमें वो अपने रिश्तेदारों को दफना सकते हैं. यह कब्रिस्तान बोलिविया में है.
बोलिविया के ला पाज का सबसे बड़ा कब्रिस्तान सीमेंटारियो जनरल है. यहां लोगों को अपने रिश्तेदारों के अंतिम संस्कार के लिए किराये पर कब्र दी जाती है. इस कब्रिस्तान में हर साल 50,000 तक शवों की देखभाल की जाती है.
यहां भी शवों को पहले पश्चिमी रीति-रिवाज से दफनाया जाता है या किसी तहखाने में रखा जाता है. फिर, 10 वर्षों के भीतर, उन्हें कब्र से निकालकर जला दिया जाता है. दाह संस्कार के बाद, परिवार राख या अस्थियां रखने के लिए कब्रिस्तान की दीवारों में बने छोटे-छोटे ताक या कांच की प्लेट से बंद छोटी तिजोरी जैसी जगह किराये पर ले लकते हैं. इसमें मृतक की स्मृति चिह्न, अस्थियां और फूल चढ़ाए जाते हैं.
प्रत्येक दीवार पर ऐसे सैकड़ों छोटे-छोटे दरवाजे होते हैं. कुछ दीवारों को ऊपर की ओर इतना बढ़ा दिया गया है कि वे तीन या चार मंजिला अपार्टमेंट ब्लॉक जैसी दिखती हैं. यह कब्रिस्तान एक चहल-पहल वाला स्थान होता है, जहां लोग अपने मृतक रिश्तेदारों से मिलने और ताजे फूल चढ़ाने या पानी देने के लिए लोग आते-जाते रहते हैं.
बोलीविया के सबसे बड़े कब्रिस्तान, सीमेंटारियो जनरल में खड़ा पाया। मृत्यु दुनिया भर में करोड़ों डॉलर का कारोबार है, और ला पाज़ भी इसका अपवाद नहीं है। आश्चर्यजनक दक्षता के साथ, सरकार - यदि आवश्यक शुल्क का भुगतान किया जाता है - प्रति वर्ष 50,000 तक शवों की देखभाल करती है और बाद में उनका अंतिम संस्कार करती है
यह कब्रिस्तान के 210 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. इसमें लगभग 20 लाख लाशों के अवशेष दफन हैं. यहां लोगों को सिर्फ 5 साल के लिए शव दफनाने का पट्टा मिलता है. इसके बाद पांच साल पूरे होने पर किराया देने का समय आ जाता है और एक नोटिस लगाया जाता है जिसमें लोगों को सूचित किया जाता है कि किराया न चुकाने पर उन्हें कब्र खाली करना पड़ेगा.
अगर तय समय पर कब्र खाली नहीं किया जाता है तो शव को निकालकर फेंक दिया जाएगा. इसलिए लोग अपने परिजन के अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए फिर से एक छोटी सी जगह कब्रिस्तान की दीवार पर किराए पर लेते हैं और उनमें अपने प्रियजन की स्मृतियों को सजा कर रखते हैं और हर साल श्रद्धांजलि देने आते हैं.