17 अप्रैल 1970 को पूरी दुनिया की उत्सुकता भरी निगाहों के बीच, अपोलो-13 सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आया था. यह एक अमेरिकी चंद्रयान था, जो चंद्रमा की यात्रा के दौरान एक गंभीर खराबी का शिकार हो गया था. पृथ्वी से 200,000 मील दूर अंतरिक्ष में इस चंद्रयान का ऑक्सीजन टैंक अचानक फट गया था. इस वजह से सवार अंतरिक्षयात्रियों की जान पर बन आई थी.
11 अप्रैल को, फ्लोरिडा से तीसरा मानवयुक्त चंद्रयान मिशन लॉन्च किया गया. इसमें अंतरिक्ष यात्री जेम्स ए. लवेल, जॉन एल. स्विगर्ट और फ्रेड डब्ल्यू. हैस सवार थे. मिशन का उद्देश्य चंद्रमा के फ्रा मौरो पर्वतमाला पर उतरना था. हालांकि, मिशन के दो दिन बाद ही 13 अप्रैल 1970 को पृथ्वी से 200,000 मील दूर अंतरिक्ष में स्पेसक्राफ्ट का ऑक्सीजन टैंक नंबर 2 फट गया.
स्विगर्ट ने पृथ्वी पर मिशन कंट्रोल को सूचना दी. ह्यूस्टन, हमें यहां एक समस्या हुई है और पता चला कि ऑक्सीजन, बिजली, प्रकाश और पानी की सामान्य सप्लाई बाधित हो गई थी. ऑक्सीजन टैंक फट जाने के बाद क्षतिग्रस्त अंतरिक्ष यान चंद्रमा की ओर बढ़ा. इसके बाद लैंडिंग मिशन रद्द कर दिया गया. फिर चालक दल और ग्राउंड कंट्रोल टीम ने एक भयावह रेस्क्यू मिशन चलाया. चंद्रयान ने चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाया, और पृथ्वी की ओर एक लंबी, ठंडी वापसी यात्रा शुरू की.
यह भी पढ़ें: जब चंद्रमा पर जा रहे अपोलो-13 के ऑक्सीजन टैंक में विस्फोट हुआ
अपोलो-13 अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम (1961-1975) का सातवां मानवयुक्त मिशन था और इसे तीसरा चंद्रयान माना जा रहा था, लेकिन इसमें सवार तीनों अंतरिक्ष यात्री कभी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाए.ह्यूस्टन स्थित ग्राउंड कंट्रोल ने आपातकालीन योजना बनाने के लिए तेजी से काम शुरू किया, जबकि दुनिया भर में लाखों लोग इसे देख रहे थे और तीन अंतरिक्ष यात्रियों - कमांडर जेम्स ए. लवेल जूनियर, चंद्र मॉड्यूल पायलट फ्रेड डब्ल्यू. हैस जूनियर और कमांड मॉड्यूल पायलट जॉन एल. स्विगर्ट - का जीवन दांव पर लगा हुआ था.
अंतरिक्षयात्रियों और मिशन नियंत्रण दल को अंतरिक्ष यान और उसकी ऑक्सीजन आपूर्ति को स्थिर करने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ा. साथ ही फ्यूएल सेल के नष्ट हो जाने के कारण बैटरी पर निर्भर रहकर पृथ्वी के वायुमंडल में सफलतापूर्वक प्रवेश करना भी एक चुनौती थी. नेविगेशन भी एक बड़ी समस्या थी और अपोलो-13 के मार्ग को बार-बार नाटकीय और अप्रशिक्षित युद्धाभ्यासों के माध्यम से ठीक किया गया. 17 अप्रैल को त्रासदी विजय में तब्दील हो गई जब अपोलो 13 के अंतरिक्ष यात्री प्रशांत महासागर में सुरक्षित रूप से उतर गए.