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73 साल की दादी ने पैदल पूरी की केदारनाथ यात्रा, कहा- बाबा ने दी ताकत

महाराष्ट्र की 73 वर्षीय महिला ने अपनी हिम्मत और श्रद्धा से सभी को प्रेरित कर दिया है. उन्होंने 11,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ मंदिर तक की 22 किलोमीटर लंबी कठिन यात्रा बिना किसी सहारे के पैदल पूरी की. जहां अधिकतर लोग घोड़े, पालकी या हेलीकॉप्टर का उपयोग करते हैं, वहीं इस दादी ने केवल अपने मजबूत इरादे और विश्वास के दम पर यह चुनौती पार की.

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यात्रा के दौरान कई बार ऐसे मौके आए जब रास्ता कठिन और थकाने वाला था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. ( Photo: Insta/@ piyushhhrai)
यात्रा के दौरान कई बार ऐसे मौके आए जब रास्ता कठिन और थकाने वाला था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. ( Photo: Insta/@ piyushhhrai)

महाराष्ट्र की 73 साल की एक बुजुर्ग महिला ने अपनी हिम्मत और भगवान के प्रति गहरी आस्था से सबको हैरान कर दिया है. उन्होंने उत्तराखंड के पवित्र केदारनाथ मंदिर तक की कठिन यात्रा बिना किसी मदद के पैदल पूरी की. इतनी ज्यादा उम्र और मुश्किल रास्ते के बावजूद उनका आत्मविश्वास और जज्बा लोगों के लिए बड़ी प्रेरणा बन गया है. जहां अधिकतर लोग घोड़े, पालकी या हेलीकॉप्टर का उपयोग करते हैं, वहीं इस दादी ने केवल अपने मजबूत इरादे और विश्वास के दम पर यह चुनौती पार की. यात्रा के दौरान वे हर हर महादेव और जय शिवाजी, जय भवानी के नारे लगाती रहीं. उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग उनकी हिम्मत को सलाम कर रहे हैं. यह कहानी साबित करती है कि उम्र कभी भी किसी के जज्बे और आस्था के आगे बाधा नहीं बन सकती.

हर हर महादेव के जयकारों से गूंजा पूरा रास्ता
महाराष्ट्र की 73 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला, जिन्हें लोग प्यार से 'आजी' कह रहे हैं, इन दिनों अपनी अद्भुत हिम्मत और अटूट श्रद्धा के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं. उन्होंने उत्तराखंड में स्थित पवित्र केदारनाथ की कठिन यात्रा को जिस तरह पूरा किया, वह हर किसी के लिए प्रेरणा बन गया है. केदारनाथ धाम तक पहुंचने के लिए लगभग 22 किलोमीटर लंबी और बेहद कठिन पहाड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है. यह रास्ता समुद्र तल से करीब 11,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां ऑक्सीजन की कमी, ठंडा मौसम और ऊबड़-खाबड़ रास्ते यात्रा को और भी चुनौतीपूर्ण बना देते हैं.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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मदद ठुकराकर बढ़ती रहीं आगे
आमतौर पर इस यात्रा को पूरा करने के लिए ज्यादातर श्रद्धालु घोड़े, खच्चर, पालकी या हेलीकॉप्टर जैसी सुविधाओं का सहारा लेते हैं, खासकर बुजुर्ग लोग. लेकिन इस आजी ने इन सभी विकल्पों को छोड़कर केवल अपने हौसले और विश्वास के दम पर पूरी यात्रा पैदल तय करने का निश्चय किया. उनकी यह जिद केवल शारीरिक ताकत का नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और गहरी आस्था का भी प्रतीक है. यात्रा के दौरान कई बार ऐसे मौके आए जब रास्ता कठिन और थकाने वाला था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

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एक यात्री ने जब उनसे पूछा कि क्या उन्हें किसी तरह की मदद चाहिए, तो उन्होंने मुस्कुराकर मना कर दिया और बिना रुके आगे बढ़ती रहीं. उनके चेहरे पर थकान के बजाय आत्मविश्वास और संतोष झलक रहा था. वे पूरे रास्ते जय शिवाजी, जय भवानी और हर हर महादेव के नारे लगाती रहीं, जिससे उनका उत्साह और ऊर्जा लगातार बनी रही. आज के समय में, जब लोग छोटी-छोटी कठिनाइयों में हार मान लेते हैं, इस उम्र में इतनी कठिन यात्रा को पैदल पूरा करना सच में असाधारण बात है.

सोशल मीडिया पर उनकी इस यात्रा का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखने के बाद लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई लोग उन्हें सच्ची प्रेरणा और हौसले की मिसाल बता रहे हैं. यह कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर इंसान के अंदर सच्ची श्रद्धा और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता.

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