पाकिस्तान का कर्ज और देनदारी बढ़कर 35 ट्रिलियन रुपए (पाकिस्तानी मुद्रा) हो गई है. ये कर्ज पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के कुल आकार के लगभग बराबर पहुंच चुका है. भारी-भरकम कर्ज के बोझ तले पाकिस्तान की सरकार की चिंता और बढ़ गई हैं.
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) ने नए आंकड़े जारी किए हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्तीय वर्ष में जुलाई से मार्च की अवधि में ही देश के कुल कर्ज में करीब 5.2 ट्रिलियन रुपए का इजाफा हुआ है जो जून 2018 के कर्ज के मुकाबले करीब 18 फीसदी ज्यादा है.
पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के मुताबिक, मार्च 2019 तक पाकिस्तान पर करीब 105 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज और देनदारी है. वित्तीय वर्ष के पहले नौ महीनों में ही पाक के विदेशी कर्ज में 10 अरब डॉलर का इजाफा हो चुका है.
दिसंबर 2018 में पाकिस्तान का कुल विदेशी कर्ज और देनदारी (EDL) 99 अरब डॉलर था लेकिन जनवरी-मार्च 2019 तक कर्ज 100 अरब डॉलर के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर चुका है.
इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की ईकाइयों का कर्ज, गैर-सरकारी विदेशी कर्ज और विदेशी प्रत्यक्ष निवेशकों से लिए गया कर्ज शामिल है. चीन, सऊदी अरब और यूएई से पाकिस्तान ने सबसे ज्यादा कर्ज लिया है. पाकिस्तान की सरकार पर सीधे तौर पर 28.6 ट्रिलियन रुपए का कर्ज है जबकि अप्रत्यक्ष तौर पर वित्त मंत्रालय द्वारा दी गई गारंटी और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की भूमिका की वजह से बाकी कर्ज के लिए भी देनदारी है.
पाकिस्तान का कुल कर्ज अब उसकी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 91.2 फीसदी के बराबर है. कर्ज की सर्विसिंग में ही पाकिस्तान अपने कुल बजट का 36 फीसदी हिस्सा खर्च कर देता है.
कर्ज की बढ़ोतरी में ब्याज दरों का बढ़ना और रुपए का अवमूल्यन भी वजह है.
एक रुपए का अवमूल्यन सार्वजनिक कर्ज में 105 अरब रुपए का इजाफा कर देता है.
इसी तरह ब्याज दरों में एक फीसदी की बढ़ोतरी भी कर्ज में 180 अरब रुपए का
बोझ डाल देता है.
हर पाकिस्तानी पर एक लाख से ज्यादा का कर्ज-
अगर कुल कर्ज को पाकिस्तान के नागरिकों में बांटे तो 2013 में हर पाकिस्तानी पर करीब 96,422 रुपए का कर्ज था. अब इमरान खान की सरकार में हर पाकिस्तानी पर कर्ज बढ़कर 159,000 पाकिस्तानी रुपए हो गया है.
पाकिस्तान का कर्ज सुपरसोनिक विमान की गति से बढ़ता जा रहा है और विश्लेषक आशंका जता रहे हैं कि अगर यह परंपरा रुकी नहीं तो इमरान खान की सरकार के पांच वर्षों के कार्यकाल में ही पिछले 70 सालों के बराबर कर्ज हो जाएगा.
इमरान खान ने हाल ही में कहा था कि वर्तमान की मुश्किल में पड़ी
अर्थव्यवस्था बस कुछ वक्त की बात है और थोड़े समय बाद यह बेहतर हो जाएगी.
पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था के लिए इमरान पूर्ववर्ती सरकारों को दोषी
ठहराते हैं.
पाकिस्तान को हाल ही में आईएमएफ से 6 अरब डॉलर का पैकेज मिला है लेकिन इसके बाद भी अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक संकेत ही मिले हैं.