पीएम मोदी इन दिनों यूरोप दौरे पर हैं और इसी सिलसिले में वह नीदरलैंड पहुंचे. टेक्नोलॉजी, व्यापार और ग्रीन एनर्जी को लेकर भारत और यूरोपीय देशों के बीच साझेदारी मजबूत करने की कोशिशों के बीच एक बार फिर नीदरलैंड्स चर्चा में है. लेकिन इस देश की सबसे दिलचस्प बात उसकी राजनीति नहीं, बल्कि यहां की ‘साइकिल संस्कृति’ है.
(Photo- X/Narendra Modi)
दुनिया में शायद ही कोई ऐसा विकसित देश होगा, जहां कार से ज्यादा साइकिल को अहमियत मिलती हो.नीदरलैंड्स उन्हीं देशों में शामिल है. यहां आम लोग ही नहीं, बड़े नेता भी साइकिल चलाते दिखाई दे जाते हैं. देश के पूर्व प्रधानमंत्री मार्क रुटे कई बार संसद तक साइकिल से जाते नजर आ चुके हैं.
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राजधानी एम्स्टर्डम में साइकिल सिर्फ यात्रा का साधन नहीं, बल्कि शहर की पहचान बन चुकी है. यहां बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बड़ी आसानी से साइकिल चलाते दिखाई देते हैं.
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आज जिस नीदरलैंड्स को लोग ‘साइकिलों का स्वर्ग’ कहते हैं, वहां एक समय कारों का दबदबा तेजी से बढ़ने लगा था. 1950 और 60 के दशक में आर्थिक विकास के साथ सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ी और शहरों का ढांचा कारों के हिसाब से बदलने लगा.
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हालात ऐसे हो गए कि साइकिलें धीरे-धीरे सड़कों से गायब होने लगीं, लेकिन इसी दौरान सड़क हादसों में तेजी आई. 1971 में हजारों लोगों की मौत हुई, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की थी। इसके बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा.
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नीदरलैंड्स में लोगों ने कारों के खिलाफ और सुरक्षित सड़कों के समर्थन में बड़ा अभियान शुरू किया. इस आंदोलन का नाम था-स्टॉप डी किंडरमोर्ड”, यानी ‘बच्चों की मौत रोको’. लोग सड़कों पर साइकिल लेकर उतर आए.
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इन प्रदर्शनों का असर हुआ. सरकार ने कारों की स्पीड सीमित की, नई डिजाइन वाली सड़कें बनाईं और साइकिल चालकों के लिए अलग रास्ते तैयार किए.1973 के वैश्विक तेल संकट ने भी नीदरलैंड्स की सोच बदल दी. उस दौर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और सरकार ने रविवार को कई सड़कों पर कारों की आवाजाही रोक दी.
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जब लोग खाली सड़कों पर साइकिल चलाने लगे तो उन्हें महसूस हुआ कि कम ट्रैफिक वाला शहर ज्यादा आरामदायक और सुरक्षित है.यहीं से देश में साइकिल को फिर से बढ़ावा मिलने लगा.आज नीदरलैंड्स में हजारों किलोमीटर लंबे साइकिल ट्रैक मौजूद हैं.
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आज नीदरलैंड्स में हजारों किलोमीटर लंबे साइकिल ट्रैक मौजूद हैं. कई शहरों में साइकिल के लिए अलग सिग्नल, पार्किंग और लेन बनाई गई हैं. यहां रोजाना होने वाली यात्राओं का बड़ा हिस्सा साइकिल से पूरा किया जाता है. एम्स्टर्डम को अब दुनिया की ‘साइकिल राजधानी’ भी कहा जाता है.
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