सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको पर ड्रोन हमले ने पूरी दुनिया को हैरत
में डाल दिया है. अमेरिका हमले के पीछे ईरान का हाथ बता रहा है लेकिन
हमेशा की तरह ईरान ने इस आरोप को खारिज कर दिया है. इस हमले की जिम्मेदारी
हूती संगठन ने ली है जिसे ईरान का समर्थन हासिल है.
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने शनिवार को हुए हमले के बाद ट्वीट कर कहा कि ईरान ने दुनिया के सबसे बड़े तेल ठिकाने पर हमला किया है. इसका कोई सबूत नहीं है कि हमला यमन की तरफ से किया गया.
ईरान के पास ऐसे हमले करने की आधुनिक तकनीक मौजूद है. सऊदी की तेल कंपनी सऊदी अरामको पर यह दूसरा हमला है. 17 अगस्त को भी 20 ड्रोन से सऊदी अरब के प्राकृतिक गैस भंडार को निशाना बनाया गया था.
ईरान ने इससे पहले एक अमेरिकी ड्रोन को भी मार गिराया था जिसके बाद ट्रंप ने ईरान पर हमले का मन बना लिया था हालांकि कार्रवाई से कुछ मिनट पहले ट्रंप ने अपना फैसला पलट दिया. अमेरिकी विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी अरामको पर हुआ यह हमला काफी सुनियोजित था. एक सवाल ये भी उठता है कि दुनिया भर में तेल की आपूर्ति करने वाले सऊदी के पास जब पैसे की कमी नहीं है तो फिर उसके खिलाफ लगातार हमले क्यों हो रहे हैं.
सऊदी अरब का सैन्य बजट ईरान के मुकाबले बहुत ज्यादा है जिससे वह पश्चिमी
देशों से भी हथियार आयात करता है. हालांकि, यमन में हूती विद्रोहियों से
निपटने में नाकामी से यही पता चलता है कि सऊदी अपना पैसा सही तरह से खर्च
नहीं कर पा रहा है. सऊदी की सेना ना तो बहुत ही व्यवस्थित है और ना ही उसकी
सेनाओं के बीच बेहतरीन तालमेल है. समुद्र में ईरान सऊदी से कहीं ज्यादा ताकतवर है.
ग्लोबल फायरपावर के मुताबिक, सऊदी अरब और ईरान की सैन्य क्षमता की तुलना इस तरह है-
सऊदी अरब के पास 231,000 सैनिक हैं लेकिन ईरान की तुलना में यह संख्या आधी है. सऊदी के पास 25,000 रिजर्व सैनिक हैं. दूसरी तरफ, ईरान के पास 534,000 सैनिक और 400,000 रिजर्व सैनिक हैं. यह मध्य-पूर्व में सबसे बड़ी फौज है. ईरान में 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के पुरुषों के लिए सैन्य प्रशिक्षण भी अनिवार्य है.
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट (SIPRI) के मुताबिक, सऊदी अरब
2017 में सैन्य खर्च के मामले में तीसरे स्थान पर रहा था. सऊदी का रक्षा
बजट 69.4 अरब डॉलर था. यह बजट मध्य-पूर्व के पांच बड़े देशों इराक, इजरायल,
अल्जीरिया और ओमान के कुल सैन्य खर्च से भी ज्यादा था. वहीं, ईरान का
सैन्य बजट 2017 में 14.5 अरब डॉलर था.
सऊदी अरब के टैंक
सऊदी अरब
की सेना के पास 1142 टैंक हैं. भारी-भरकम खर्च के बावजूद सऊदी अरब की अपनी
कोई आर्म्स इंडस्ट्री नहीं है. भारत के बाद सऊदी हथियारों का दूसरा सबसे
बड़ा आयातक देश है और अमेरिका सऊदी का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता देश है.
2016 में अमेरिका के साथ सऊदी ने अबराम टैंक की डील की थी. हालांकि, यमन
में इन्हीं टैंकों को हूती लड़ाकों ने ईरान में निर्मित रॉकेट की मदद से नष्ट
कर दिया था. ईरान के पास 1650 टैंक हैं. इसके पास स्ट्राइकर नाम का
युद्ध टैंक है.
सऊदी के पास 322 रॉकेट प्रोजेक्टर्स हैं जबकि ईरान के पास 1533 रॉकेट प्रोजेक्टर्स है. न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान रेगिस्तान में चुपके से आधुनिक मिसाइलें बना रहा है जिनकी रेंज बहुत ज्यादा है.
सऊदी अरब की रॉयल एयर फोर्स के पास 844 एयरक्राफ्ट हैं जिसमें अमेरिका का दो
इंजन वाला बोइंग एफ-15 ईगल और लड़ाकू विमान पानाविया टॉरनाडो भी शामिल है.
ईरान के पास कुल 505 एयरक्राफ्ट हैं जिसमें से अधिकतर 1979 के इस्लामिक
क्रांति से पहले सौंपे गए अमेरिकी प्लेन हैं.
सऊदी अरब के पास 203 लड़ाकू प्लेन हैं जिनका इस्तेमाल यमन में बम गिराने में भी किया गया.
ईरान
के पास 150 फाइटर प्लेन हैं जिसमें से अमेरिका में निर्मित एफ-4 और एफ-5
और एफ-14 शामिल है. ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की पैरामिलिट्री
फोर्स के कमांडर जनरल आमिर अली हाजिदा ने कहा था कि ईरान अपने सोवियत के जमाने
के Su-17 प्लेन को अपडेट करने जा रहा है.
सऊदी की नौसेना
कमजोर है. उसके पास सिर्फ 55 समुद्री जहाज हैं. वहीं, ईरान से लंबी समुद्री
सीमा लगती है. ईरान की समुद्र में मौजूदगी हैरान करने वाली है. उसके पास
398 समुद्री जहाज हैं.
ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के नौसेना अध्यक्ष
जनरल अलीरेजा तांगसिरी ने कहा था कि ईरान का फारस की खाड़ी पर पूरी तरह से
नियंत्रण है.
ईरान अपनी छोटी-छोटी स्पीडबोट्स से घातक हमले कर सकता है.
सऊदी अरब की छोटी सी समुद्री सेना में कोई पनडुब्बी नहीं है हालांकि अल
रियाद क्लास फ्रिगेट में डीसीएनएस एफ-17 एंटी सबमरीन टॉर्पीडो शामिल है.
वहीं, ईरान के पास 33 सब्मरीन्स है जिसमें स्वदेशी मिनी सबमरीन्स शामिल हैं
जो 533 मिलीमीटर के दो टॉर्पीडो ले जाने की क्षमता रखते हैं.
पैट्रोल क्राफ्ट-
सऊदी के पास 11 पैट्रोल क्राफ्ट है जो ईरान के पैट्रोल क्राफ्ट के मुकाबले पांच फीसदी ही है. ईरान के पास 230 पैट्रोल बोट्स हैं जो फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के खिलाफ अहम भूमिका निभाती हैं. ईरान को पता है कि अमेरिकी नौसेना बड़ी नावों को आसानी से निशाना बना लेगी इसलिए वह छोटी-छोटी नावें तैनात करता है जिसे ईरानी आत्मघाती लड़ाकू नावें कहते हैं.
सऊदी अरब की परमाणु क्षमता-
सऊदी के पास कोई परमाणु हथियार नहीं हैं और
वह मध्य-पूर्व को परमाणु हथियारों से मुक्त रखने की वकालत करता रहा है.
वर्ल्ड न्यूक्लियर एसोसिएशन के मुताबिक, सऊदी की दो बड़े न्यूक्लियर
रिएक्टर्स बनाने की योजना है. 2015 में सऊदी के रक्षा अधिकारियों ने
पाकिस्तान से परमाणु हथियार हासिल करने की रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया था.
ईरान
के पास भी परमाणु हथियार नहीं हैं. हालांकि, इसके पास मध्य-पूर्व में
बैलेस्टिक मिसाइल का सबसे बड़ा जखीरा है. अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम
को आगे बढ़ाता है तो वह परमाणु हथियारों को लॉन्च करने में सक्षम हो जाएगा.
सऊदी
अरब और अमेरिका एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं. ट्रंप के आने के बाद से दोनों
देशों की दोस्ती और भी गहरी हुई है. सऊदी का दूसरा खास दोस्त चीन है. सऊदी
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने चीन के साथ संबंध मजबूत करने के लिए
तमाम प्रयास किए हैं.
ईरान के साथ कौन?
पिछले कुछ सालों में रूस के साथ ईरान के रिश्ते मजबूत हुए हैं. ईरान खुले तौर पर हेजबुल्लाह और हमास जैसे संगठनों को भी समर्थन देता है जिनके पास मजबूत सैन्य क्षमता है.
किसके पास कितने तेल भंडार?
सऊदी अरब के पास 266.5 अरब बैरल प्रामाणिक तेल भंडार हैं. ईरान के पास भी 158 अरब बैरल प्रामाणिक तेल भंडार मौजूद हैं. वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, सऊदी अरब की जीडीपी 2017 में 683.8 अरब डॉलर की थी जबकि ईरान की जीडीपी 439.5 अरब डॉलर की थी. हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है.
किसके पास कितनी विदेशी मुद्रा?
सऊदी अरब के पास 509 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है जो दुनिया में
चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार है. ईरान का कुल विदेशी मुद्रा भंडार
132.6 अरब डॉलर का है जो दुनिया में 19वें स्थान पर आता है.