सहिष्णुता और असहिष्णुता, ये दो शब्द पिछले कुछ सालों में काफी गूंज रहे हैं. खासकर मोदी सरकार के आने के बाद पिछले कुछ समय में भारत में सहिष्णुता बनाम असहिष्णुता का विमर्श काफी तेजी उभरा है.
लेकिन क्या आपको पता है कि हम सहिष्णुता-असहिष्णुता के मामले में विश्व में किस नंबर पर आते हैं.
सहिष्णुता और असहिष्णुता को लेकर सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पिछले कुछ सालों में विश्वभर में चर्चा तेज हुई है. कई देशों में गृहयुद्ध के हालात, शरणार्धियों की बढ़ती संख्या ने यह बहस तेज की है.
ऐसे में Ipsos MORI द्वारा 2018 की शुरुआत में एक सर्वे हुआ है.
स्टडी के लिए 27 देशों में करीब 20 हजार लोगों का इंटरव्यू किया गया.
इसमें उन तथ्यों को सामने लाने की कोशिश की गई जो नागरिकों के मुताबिक समाज को बांटते हैं.
सहिष्णुता के पैमाने पर नए सर्वे का रिजल्ट सामने आया है. इसके मुताबिक भारत सहिष्णु देशों की लिस्ट में चौथे स्थान पर है.
भारत से ऊपर कनाडा, चीन और मलयेशिया के बाद स्थान आता है.
सर्वे के मुताबिक 63 फीसदी भारतीय अलग-अलग बैकग्राउंड्स, संस्कृति या दृष्टिकोण वाले लोगों के पॉइंट पर भारत को सहिष्णु देश मानते हैं.
वहीं हंगरी के लोग अपने देश को सबसे कम सहिष्णु मानते हैं. इसके बाद साउथ कोरिया और ब्राजील का स्थान है.
सर्वे के मुताबिक भारत में 49 फीसदी लोगों को लगता है कि राजनीतिक विचारों में मतभेद तनाव का का कारण बनते हैं. 48 फीसदी लोग इसके लिए धर्म जबकि 37 फीसदी लोग सामाजिक-आर्थिक गैप को वजह मानते हैं.
सर्वे के मुताबिक 53 फीसदी भारतीयों को लगता है कि दूसरे बैकग्राउंड, संस्कृति या दृष्टिकोण वाले लोगों से मेलजोल पर आपसी समझ और सम्मान की भावना पैदा होती है.