तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और DMK प्रमुख एम. करुणानिधि का मंगलवार शाम 94 साल की उम्र में निधन हो गया. डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि का परिवार को मुलायम सिंह यादव कुनबे के बाद देश का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार माना जाता है. इस परिवार के कई सदस्य राजनीति में सक्रिय हैं. हालांकि करुणानिधि ने कुछ साल पहले ही डीएमके की कमान अपने पुत्र एम के स्टालिन को सौंपी दी थी.
भले ही वर्तमान में स्टालिन DMK प्रमुख एम. करुणानिधि के उत्तराधिकारी हैं, लेकिन आने वाले दिनों में उन्हें अपने बड़े भाई अलागिरी से चुनौती मिल सकती है. भले ही आज की डीएमके में दो भाईयों और उनके समर्थकों का संघर्ष है. हालांकि एक समय ऐसा भी था एम. करुणानिधि किसी और को अपनी राजनीतिक विरासत सौंपना चाहते थे.
ये और कोई नहीं एम. करुणानिधि के सबसे बड़े बेटे एमके मुथु थे.
एमके मुथु एम. करुणानिधि और उनकी पहली पत्नी पद्मावति के एकलौते बेटे थे.
एम. करुणानिधि ने सबसे पहने एमके मुथु को अपनी फिल्मी विरासत सौंपी और 1960 और 1970 के दौर में उन्हें फिल्मों में प्रमोट किेया.
बतौर एक्टर सिंगर एमके मुथु ने कई फिल्मों में काम किया. इसमें एम. करुणानिधि द्वारा लिखी गई फिल्म पिल्लई ओ पिल्लई (बेटे मेरे बेटे) भी शामिल थी. हालांकि एमके मुथु का फिल्मी करियर ज्यादा लंबा नहीं चल सका और वह एक फ्लॉप अभिनेता साबित हुए.
फिल्म की तरह एम. करुणानिधि एमके मुथु को राजनीति में भी लेकर आए. उस दौर में फिल्म स्टार और तमिलनाडु के पूर्व सीएम एमजीआर और एम. करुणानिधि साथ में डीएमके को लीड कर रहे थे.
कहा जाता है कि एमके मुथु एमजीआर की तरह तैयार होकर डीएमके की बैठकों में शामिल होते थे.
हालांकि बेटे एमके मुथु और पिता एम. करुणानिधि के बीच ज्यादा बन नहीं पाई. एमके मुथु को शराब की काफी लत लग गई.
यही नहीं एमके मुथु एमजीआर को ज्यादा मानते थे और एआईडीएमके बनने के बाद उनक झुकाव उस पार्टी की ओर हो गया.
ऐसे में कह सकते हैं कि करुणानिधि के लिए उनके बेटे हमेशा समस्या का विषय बने रहे. एमके मुथु से ही इसकी शुरुआत हुई थी. भले ही एम. करुणानिधि एमके मुथु को एमजीआर के खिलाफ खड़ा करना चाहते थे, लेकिन जयललिता द्वारा एआईएडीएमके की कमान संभालने के दौरान मुथु उस पार्टी में चले गए.
2008 में मुथु ने एक फिल्म मथुथावाणी के लिए गाना गाया था.
2009 में एम. करुणानिधि के बीमार होने पर मुथु की परिवार में वापसी हुई, लेकिन इससे उनके निजी जिंदगी में कोई फायदा नहीं हुआ. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 75 साल के मुथु आज गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं. साथ उनका पारिवारिक जीवन भी परेशानी में गुजर रहा है और पिछले 4 साल से उनकी तबियत भी खराब है. साथ ही उनका अपने बेटे से विवाद चल रहा है.
ऐसे में मुथु तो अब करुणानिधि के उत्तराधिकारी की रेस में नहीं हैं, लेकिन करुणानिधि की मौत के बाद स्टालिन और अलागिरी में विवाद और बढ़ सकताहै. जहां स्टालिन ने शुरुआत से राजनीति में अपनी रुचि दिखा दी थी, वहीं अलागिरी ने काफी बाद में राजनीति में एंट्री ली. स्टालिन मिसा के तहत आपातकाल के दौरान जेल भी गए थे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जेल में स्टालिन की काफी बुरी तरीके से पिटाई की गई थी. माना जाता है कि स्टालिन ने यहां तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत की है और धीरे धीरे पार्टी के सर्वोच्च पद पर पहुंचे हैं.
आपको बता दें कि स्टालिन और अलागिरी के अलावा करुणानिधि के अपनी पत्नी दयालु अम्माल से एक बेटा थामिझासरासु और बेटी सेल्वी हैं. वहीं उनकी अपनी तीसरी पत्नी से एक बेटी सांसद कनिमोझी हैं.