पीएम मोदी रवांडा के बाद अफ्रीकी देश युगांडा के दौरे पर जाने वाले हैं. युगांडा में करीब 20 हजार भारतीय रहते हैं. खास बात ये है कि इन लोगों का युगांडा की इकोनॉमी में खास योगदान है. हालांकि, युगांडा में रहने वाला भारतीय समुदाय सरकार से खुद को ट्राइब घोषित किए जाने की मांग करता है. (प्रतीकात्मक फोटो: Getty Images)
युगांडा में भारतीयों के जाने की शुरुआत करीब 100 साल पहले हुई थी. ब्रिटिश लोग भारतीयों को मजदूर के रूप में युगांडा में लेकर आए थे. इसके बाद लोगों ने बिजनेस शुरू कर किया और कम्यूनिटी बढ़ने लगी. (प्रतीकात्मक फोटो: Getty Images)
कई दशक तक भारतीय और अन्य एशियाई लोगों का यहां की इकोनॉमी में काफी योगदान रहा. एक वक्त में तो युगांडा में एशियाई लोगों की संख्या 80 हजार तक पहुंच गई. (प्रतीकात्मक फोटो: Getty Images)
हालांकि, 1972 में तानाशाह ईदी अमीन ने 90 दिनों के भीतर एशियाई मूल के लोगों को देश से चले जाने का आदेश दिया. इसके बाद बिजनेस खत्म हो गए, लोगों के घर बर्बाद हो गए. (प्रतीकात्मक फोटो: Getty Images)
लेकिन बाद में ईदी अमीन का शासन खत्म होने के बाद अगले राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी ने लोगों को वापस आने के लिए प्रोत्साहित किया. हालांकि, कई लोग सालों बाद भी यह महसूस करते रहे कि युगांडा में उनके साथ गलत हुआ. (प्रतीकात्मक फोटो: Getty Images)